तो क्या कर्जमाफी की उम्मीद में जानबूझकर लोन नहीं चुकाते किसान?
नई दिल्ली। एक ओर देश के कई राज्यों में किसान ऋण माफी के लिए आंदोलित हैं वहीं दूसरी ओर यह माना जा रहा है कि राज्यों के किसानों को ऋण माफी की उम्मीद ने वित्तीय संस्थानों का बकाया धन वापस ना करने के लिए प्रेरित किया है। इससे बैंकों पर दबाव बढ़ जाता है जो पहले से ही खराब कॉरपोरेट ऋण के रिकार्ड ढेर के साथ जूझ रहे हैं।

बैंकर्स ने मानी यह बात
कुछ बैंकर्स ने इस बात की पुष्टि की कि अब किसानों में इस बात का चलन बढ़ता जा रहा है कि वो ऋण नहीं चुकाते। यह मसला सोमवार (12 जून) को वित्त मंत्रालय की ओर से आयोजित की गई बैठक में उठाया गया। कृषि ऋण का अनुमान 10 लाख करोड़ रुपये का लगाया गया है। (तस्वीर में - 12 जून को आत्महत्या करने वाले किसान कालेश्वर महतो का परिवार)

खाते हो रहे हैं खाली
हालांकि, किसानों द्वारा ऋण ना चुकाने वाले किसानों की मात्रा का अनुमान लगाने की अभी शुरुआत हुई है ।बैंकरों का कहना है कि कुछ राज्यों में, हाल के महीनों में ऋण ना चुकाने की दर में 50% की बढ़ोतरी हुई है। एक बड़े बैंक के प्रमुख ने बताया, 'किसान अपने बैंक खातों को खाली कर रहे हैं ताकि हम उनसे भुगतान नहीं काट सकते।'

नेता और सरकार दबाव में
एक बड़े बैंक के अधिकारी ने कहा कि अगर मुझे उम्मीद है कि कोई मेरे 1 लाख रुपए की ऋण पर खुद भुगतान करेगा तो मैं वापस करना बंद कर दूंगा। यह वास्तव में बहुत से राज्यों में हो रहा है। आंध्र, तेलंगाना, यूपी और महाराष्ट्र ने कृषि ऋण छूटों की घोषणा की है। अन्य राज्यों, खासकर जहां चुनाव होने हैं, वहां भी नेता और सरकार दबाव में हैं।

आंध्र प्रदेश से नहीं मिला बकाया
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार कम से कम दो बैंक अध्यक्षों ने कहा कि वे आंध्र प्रदे से बकाया पाने में कठिनाई पा रहे हैं, जहां साल 2014 में विधानसभा चुनावों में एन चंद्रबाबू नायडू को जीत हासिल करने के बाद 40,000 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण माफ कर दिया था।

लेकिन उधार अनुशासन की कीमत पर नहीं
सरकारों से ऋण छूट या राहत हमारी बुक्स को क्लियर करने में मदद करती है और जहां डिफॉल्ट तक का सवाल है लेकिन यह लंबे समय में समग्र भुगतान संस्कृति पर असर डालता है।एसबीआई के अध्यक्ष अरुंधति भट्टाचार्य ने भी हाल ही में चेतावनी दी थी कि किसानों को सहायता जरूरी है , लेकिन उधार अनुशासन की कीमत पर नहीं है।












Click it and Unblock the Notifications