स्किल डेवलपमेंट स्कैम: चंद्रबाबू नायडू के वकील ने कोर्ट में क्या कहा? 18 प्वाइंट में जानिए
पूर्व मुख्यमंत्री एन सी नायडू पर कार्रवाई को उनके वकील लूथरा ने राजनीति से प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आ रहे हैं और चंद्रबाबू को फंसाने के लिए फिर से केस को ओपन किया गया है।
तेलंगाना में इन दिनों दिग्गज नेताओं के बीच बवाल मचा हुआ है। स्किल डेवलपमेंट से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में तेलुगू देशम पार्टी (TDP) के अध्यक्ष एन चंद्रबाबू नायडू की गिरफ्तारी के बाद सियासत गरमा गई है। टीडीपी नेता की गिरफ्तारी के बाद रविवार (10 सितंबर) को वे कड़ी सुरक्षा के बीच वे विशेष अदालत में पेश किए गए। कोर्ट में पेशी के दौरान चंद्रबाबू नायडू के अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कौशल विकास स्कीम से जुड़े कथित घोटाले के तहत कार्रवाई पर कई तरह की आशंकाएं व्यक्त की।
एसीबी कोर्ट में पेशी के दौरान टीडीपी चीफ नायडू की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे जनसेना पार्टी प्रमुख पवन कल्याण को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया। वहीं अदालत में एनसी नायडू के खिलाफ एक्शन को राजनीति से प्रेरित बताया। एडवोकेट लूथरा ने कहा कि चुनाव नजदीक है। ऐसे में राजनीतिक फायदे के लिए मामले को फिर से ओपन किया गया, जबकि हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी थी। अदालत ने फैसला भी सुरक्षित कर लिया है।

एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने चंद्रबाबू नायडू का पक्ष रखते हुए अदालत में निम्न बातें कहीं-
- कौशल विकास घोटाला राजनीति से प्रेरित है।
- 2021 में दर्ज इस मामले में हाई कोर्ट में बहस पूरी हो चुकी है।
- फैसला भी सुरक्षित कर लिया गया है। केस की सुनवाई खत्म हो चुकी है। मामले में सभी आरोपियों को जमानत भी मिल चुकी है।
- चुनाव आ रहे हैं और चंद्रबाबू को फंसाने के लिए फिर से मामला खोला गया है
- चंद्रबाबू पर लगे आरोप निराधार हैं। सरकार ने उन्हें फंसाने के लिए ऐसा किया है।
- धारा-409 चंद्रबाबू पर लागू नहीं होती। जब ए-35 गनी वेंकट सत्यभास्कर प्रसाद को हिरासत में लिया गया तो धारा-409 लागू नहीं थी।
- चंद्रबाबू का नाम FIR में नहीं है, तो CID उन्हें कैसे गिरफ्तार कर सकती है?
- रिमांड रिपोर्ट में जांच अधिकारी द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा पर ध्यान दें।
- समझ नहीं आ रहा कि चंद्रबाबू को कोर्ट में पेश किये बिना 24 घंटे तक गिरफ्तार क्यों किया गया?
- CID के आरोपों के कारण चंद्रबाबू लंदन नहीं जा रहे हैं।
- CID का कहना है कि चंद्रबाबू को सुबह 6 बजे गिरफ्तार किया गया। लेकिन उससे पहले रात 11 बजे बाबू को CID पुलिस ने घेर लिया।
- इसे उसी समय से गिरफ्तारी माना जाना चाहिए।
- रात 11 बजे गिरफ्तारी व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन है।
- गिरफ्तार पुलिस का 48 घंटे का कॉल डेटा कोर्ट में जमा किया जाए।
- सीआईडी ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून के मुताबिक काम नहीं किया।
- चंद्रबाबू की गिरफ्तारी के लिए राज्यपाल की अनुमति की आवश्यकता थी।
- दलीलें रिमांड रिपोर्ट तक ही सीमित रहनी चाहिए।
- लूथरा ने रिमांड रिपोर्ट खारिज करने के लिए पंजाब मनिंदर सिंह मामले का हवाला दिया।
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