'कर्नाटक के सिंघम' अन्नामलाई ने सिर्फ 9 साल में छोड़ दी IPS की नौकरी, इस वजह से भाजपा में हुए शामिल
नई दिल्ली- कर्नाटक कैडर के पूर्व आईपीएस के. अन्नामलाई मंगलवार को भाजपा में शामिल हो गए। उन्हें दिल्ली के पार्टी हेडक्वार्टर में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव पी मुरलीधर राव और तमिलनाडु के भाजपा अध्यक्ष एल मुरुगन ने पार्टी की सदस्यता दिलाई। अन्नामलाई ने इसी साल मई महीने में बेंगलुरु डीसीपी के पद पर रहते हुए आईपीएस की नौकरी से स्वैच्छिक रिटायरमेंट लिया था। उनके भाजपा में आने पर कर्नाटक के मेडिकल एजुकेशन मंत्री के सुधाकर राव ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्होंने ईमानदारी से बेंगलुरु और चिकमंगलुरु की सेवा की है और उनके पार्टी में आने से मुझे बुहत खुशी हो रही है।

'कर्नाटक के सिंघम' हुए भाजपा में शामिल
इस साल मई में जब अन्नामलाई ने भारतीय पुलिस सेवा से अचानक स्वच्छैक रिटायरमेंट लेने की घोषणा की थी तो पूरे कर्नाटक को एक तरह से झटका लगा था। क्योंकि, महज 9 साल की सेवा में ही उनकी पहचान 'कर्नाटक के सिंघम' के तौर पर हो चुकी थी। 2011 में आईपीएस ज्वाइन करने और फिर ट्रेनिंग के बाद उन्होंने करीब 7 साल ही फिल्ड में जनता की सेवा की है, लेकिन इतने कम समय में ही ईमानदारी और बहादुरी में इस पुलिस ऑफिसर की लोकप्रियता आसमान छूने लगी थी। उन्हें क्यों 'कर्नाटक का सिंघम' कहा जाता है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि छोटे से करियर के दौरान उनका कर्नाटक के उडुपी और चिकमंगलुरु जिलों के एसपी रहते हुए जब-जब ट्रांसफर किया गया, सरकार को स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। उनके ट्रांसफर के खिलाफ प्रदर्शन हुए।

'आईपीएस की जॉब छोड़ने के लिए हिम्मत और साहस चाहिए'
मई में जब उन्होंने आईपीएस की नौकरी से खुद ही निकलने का फैसला किया था, तभी से यह कयास लगाए जाने लगे थे कि वह राजनीति ज्वाइन कर सकते हैं। उनके इस्तीफे पर उस समय कर्नाटक सरकार की गृह सचिव डी रूपा ने ट्विटर पर लिखा था, 'आईपीएस अन्नामलाई से बात की। उन्होंने आज इस्तीफा दे दिया है। वह राजनीति में जा रहे हैं। ओहदेदार, सुरक्षित और कड़ी मेहनत से प्राप्त आईपीएस की जॉब छोड़ने के लिए हिम्मत और साहस चाहिए। ऐसे युवा विजेताओं को राजनीति में गोते लगाते देखकर खुशी होगी। उन्हें शुभकामनाएं। ' हालांकि, तब अन्नामलाई ने कहा था कि उन्होंने इस बारे में कोई फैसला नहीं लिया है और ना ही किसी सियासी दल या नेता से इस बारे में बात की है।

राष्ट्रवाद की भावना की ओर रहे हैं प्रेरित
अन्नामलाई शुरू से राष्ट्रवाद की भावनाओं के प्रति आवाज बुलंद करते रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी नीतियों के बहुत बड़े प्रशंसक हैं। यही वजह है कि उनके इस्तीफे के साथ ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि वह राजनीति में जाना चाहते हैं। लेकिन, उनके बारे में ऐसा कहा जाता था कि वह पहले से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अधिकारियों के संपर्क में रहे हैं। उन्होंने मीडिया वालों से कहा है, 'तमिलनाडु में भाजपा के बारे में बहुत सी गलत धारणा है और वहां जागरुकता के लिए काम करने की जरूरत है। मैं दिल से राष्ट्रवादी हूं और बीजेपी ही एकमात्र ऐसी पार्टी है, जिसमें भाई-भतीजावाद या कहूं तो चाटूकारिता नहीं है। मैं पार्टी के लिए कड़ी मेहनत करूंगा।' इससे जाहिर होता है कि वह तमिलनाडु में बीजेपी के लिए काम करेंगे। यही वजह है कि तमिलनाडु के भाजपा अध्यक्ष एल मुरुगन ने ही उन्हें पार्टी में शामिल कराया है।

इतना छोटा रहा आईपीएस अन्नामलाई का करियर
महज 36 साल के अन्नामलाई 2011 बैच के आईएएस ऑफिसर रहे हैं। उन्होंने 2013 में कर्नाटक के उडुपी जिले के करकला सब-डिविजन से एएसपी के तौर पर पुलिस ऑफिसर का कार्यभार संभाला था और फिर 2015 में उडुपी के ही एसपी बन गए। फिर उनका तबादला चिकमंगलुरु के एसपी के तौर पर हो गया। अक्टूबर, 2018 में उनकी पोस्टिंग बेंगलुरु दक्षिण के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस के तौर पर हुई थी और उसी पद पर रहते हुए उन्होंने स्वैच्छिक रिटारमेंट की घोषणा कर दी।












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