इस कांग्रेसी नेता ने की थी सिंगर अदनान सामी को भारत की नागरिकता देने की सिफारिश?
बेंगलुरू। कांग्रेस लगातार सिंगर अदनान सामी को मिले पदमश्री सम्मान को लेकर मोदी सरकार हमलावर है, लेकिन मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने मोदी सरकार के फैसले का समर्थन करके कांग्रेस को भी चौंका दिया है। कांग्रेस आलाकमान पूर्व पाकिस्तानी नागरिक अदनान सामी को पदश्री देने का यह कहकर विरोध कर रही है, क्योंकि 1965 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध में एयरफोर्स में रहे उनके पिता ने युद्ध में हिस्सा लिया था।

अदनान सामी को भारतीय नागरिकता देने और पद्मश्री से सम्मानित करने पर खुशी जता चुके दिग्विजय सिंह एक ट्विट के जरिए अपनी खुशी भी जाहिर की थी। उन्होंने लिखा था, मुझे खुशी है कि प्रसिद्ध गायक एवं संगीतकार और पाकिस्तानी मुसलमान प्रवासी अदनान सामी को भी पदमश्री दिया गया है। हालांकि अब गेयर बदलते हुए दिग्विजय सिंह ने सीएए के बहाने ने 2016 में भारतीय नागरिक बन चुके अदनान सामी को पदमश्री देने पर यह कहकर सवाल उठा दिए हैं कि उनके पिता ने भारत पर युद्ध के दौरान बमबारी की थी।

गौरतलब है दिग्विजय सिंह ने वर्ष 2011 में अदनान सामी को भारतीय नागरिकता देने की वकालत की थी। दिग्विजय सिंह ने अदनान सामी को भारतीय नागरिकता देने की पैरवी के बाद वर्ष 2013 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने भी अदनान सामी को भारतीय नागरिकता देने का समर्थन किया था। सवाल यह है कि कांग्रेसी सरकार में अदनान सामी की नागरिकता का समर्थन करने वाले कांग्रेसी नेता अब किस मुंह से अदनान को पदमश्री सम्मान की आलोचना कर रहे हैं।

यह बात दीगर है कि अदनान सामी की भारतीय नागरिकता पर बीजेपी और कांग्रेस का एक मत है। एक भारतीय नागरिक के नाते ही अदनान सामी को पदमश्री सम्मान संगीत के क्षेत्र में उनके योगदानों के लिए दिया गया है। चूंकि अदनान सामी अब भारतीय है तो कांग्रेस अदनान सामी को पदमश्री सम्मान को अब गलत नहीं ठहराया जा सकता है। यह सवाल कांग्रेस पूछा जाना चाहिए कि आंध्र प्रदेश की वाईएस राज शेखर रेड्डी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2008 में तब पाकिस्तानी नागिरक अदनान सामी को नौशाद संगीत पुरस्कार किस हैसियत से दिया था।

निः संदेह कांग्रेस अदनान मामले में राजनीति कर रही है और जबरन अदनान सामी को नागरिकता संशोधित कानून से जोड़ने की कोशिश कर रही है। पीटीआई को दिए बयान में खुद दिग्विजय सिंह ने कह चुके हैं कि उन्होंने अदनान सामी को भारतीय नागरिकता देने के लिए भारत सरकार से सिफारिश की थी। सिंह ने तब कहा कि भारत सरकार को भारतीय नागरिकता चाहने वाले हर धर्म के किसी भी व्यक्ति को नागरिकता देने का पूरा अधिकार है।

उल्लेखनीय है वर्ष 2005 में कांग्रेस के आमंत्रण पर सिंगर अदनाम सामी ने पंडित हरिप्रसाद चौरसिया जैसे दिग्गजों के साथ ताजमहल के जश्न के दौरान परफार्म किया था। उसके तीन वर्ष बाद 2008 में अदनान सामी को आंध्र प्रदेश की कांग्रेसी सरकार द्वारा नौशाद संगीत पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, वह भी तब जब अदनान पाकिस्तानी मूल के थे, लेकिन अब जब अदनान सामी भारतीय नागरिक बन चुके हैं, तो सीएए के विरोध और राजनीतिक फायदे के लिए कांग्रेस ने अपने सुर बदल लिए हैं।

अदनान सामी विरोध करके अपने ही स्टैंड से पीछे खिसक रही है कांग्रेस
यह कांग्रेस की सुविधा की राजनीतिक कही जा सकती है, जो वह अब अदनान सामी के मामले में कर रही है, क्योंकि जब भारतीय संसद में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) पारित किया गया था और अधिनियम में चिन्हित तीनों देशों के मुस्लिम समुदाय को बाहर रखा गया था तो कांग्रेस ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि कानून में पड़ोसी देशों के मुसलमानों के साथ अन्याय है। कांग्रेस के मुताबिक जो भी मुस्लिम भारत में आना चाहते हैं, यहां बसना चाहते हैं और नागरिक बनना चाहते हैं, उन्हें वह अधिकार मिलना चाहिए, लेकिन अदनान सामी विरोध करके अपने ही स्टैंड के खिलाफ बयान दे रही है। अदनान भले ही पूर्व पाकिस्तानी है, लेकिन अदनान ने भारतीय नागरिकता हासिल करने के लिए कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया और तब जाकर उसे नागरिकता प्राप्त की है।

सीएए के बहाने अदनान सामी की निष्ठा पर सवाल रही है कांग्रेस
चूंकि नागरिकता मामले में कांग्रेस फंस गई तो अब 1965 भारत-पाकिस्तान युद्ध में उनके पिता की कथित भूमिका का हवाला देकर अदनान को निशाना बना रही है, क्या कांग्रेस यह कहना चाहती है कि जब अदनान और अदनान के पिता पाकिस्तानी थे, तब भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान अदनान के पिता पाकिस्तान से गद्दारी करते हुए अपने वतन खिलाफ लड़ते तो ठीक होता। अदनान के पिता पाकिस्तान के पिता एयरफोर्स में बड़े अफसर थे और उन्होंने एक पाकिस्तान सोल्जर होते हुए जो कुछ किया वह राष्ट्रवाद था, जिसे अदनान सामी के बतौर भारतीय निष्ठा पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है।

2011 में दिग्विजय सिंह ने अदनान को नागरिकता देने की सिफारिश की
अदनान सामी की निष्ठा और पदमश्री सम्मान पर सवाल उठाने से पहले कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह को वर्ष 2011 में अदनान सामी के बारे में दिए अपने बयान को याद करना चाहिए, जिसमें उन्होंने कहा था कि अदनान सामी एक अच्छे गायक हैं और उनके भारत में बहुत सारे प्रशंसक हैं और वह भारत में रहना चाहता है, उसे यहां रहने की अनुमति दी जानी चाहिए।

भारत की नागरिता हासिल करने के लिए 15 वर्ष तक इंतजार किया
अदनान सामी ने भारत की नागरिता हासिल करने के लिए 15 वर्ष तक इंतजार किया। फिर जाकर अदनान को वर्ष 2016 में भारत की नागरिकता जाकर मिली। इसी पुष्टि एक आरटीआई में पूछे गए सवाल के जवाब भी करती है, जिसमें भारत सरकार कीओर से जवाब दिया था अदनान सामी को भारत की नागरिकता कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह और शशि थरूर की सिफारिश पर दी गई थी।

पूरी दुनिया में लोकप्रिय हैं गायक, पियानोवादक व संगीतकार अदनान सामी
एक गायक, पियानोवादक और संगीतकार के रूप में चार दशक के करियर में अदनान सामी भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में लोकप्रिय हैं। 120 से अधिक गीतों और 90 से अधिक रचनाओं के साथ अदनान दक्षिण एशिया के एकमात्र संगीतकार हैं, जिन्होंने वेम्बले स्टेडियम, लंदन में 8 हाउस-फुल संगीत कार्यक्रम दिए।

पूरे एशियाई क्षेत्र के एकमात्र ऐसे कलाकार हैं अदनान सामी
अदनान पूरे एशियाई क्षेत्र के एकमात्र ऐसे कलाकार थे, जिन्होंने वृहद वेम्बली स्टेडियम में लगातार दो रात परफॉर्म किया, जिसमें 90000 दर्शकों को जुटाना पड़ता है।अदनान ने यह कारनामा वर्ष 2005, 2008 किया था और 2017 में एक उपलब्धि दोहराई भी थी। यही नहीं, अदनान जब पाकिस्तानी नागरिक थे जब उन्होंने वर्ष 2003 क्रिकेट विश्व कप के लिए भारतीय क्रिकेट टीम के लिए एंथम की रचना की थी।

पाकिस्तान मूल के नहीं थे सामी के पिता अरशद सामी खान
इसमें कोई दो राय नहीं है कि अदनान सामी के पिता एक पाकिस्तानी एयरफोर्स के सोल्जर थे और उन्होंने वर्ष 1965 के युद्ध में भारत के खिलाफ युद्ध किया था। यह बहुत ही कॉमन बात है। हालांकि सामी के पिता अरशद सामी खान भी पाकिस्तान मूल के नहीं थे, उनका जन्म अफगानिस्तान के एक जातीय पश्तून परिवार में हुआ था और अफगानिस्तान में लगभग उनके पूरे परिवार को मार दिया गया था, जिसके बाद अदनान के पिता पेशावर और तत्कालीन ब्रिटिश भारत में चले आए थे। उन्होंने पाकिस्तानी वायु सेना की सेवा की और भारत के खिलाफ युद्ध भी लड़ने के साथ-साथ पाकिस्तान के तीन-तीन राष्ट्रपतियों और लगभग सभी पाकिस्तानी प्रधानमंत्रियों के संरक्षक बने। यही नहीं, अदनान के पिता करीब 14 देशों के राजदूत के रूप में भी कार्य किया।

अदनान के पिता के पुस्तक का विमोचन पूर्व PM आई के गुजराल ने किया
दिलचस्प बात यह है कि भारत-पाकिस्तान युद्ध में पाकिस्तान की ओर अदनान के पिता को टारगेट करने वाले कांग्रेस ने ही अदनान के पिता अरशद सामी खान उनकी पुस्तक 'प्रेसिडेंट्स एंड ए एड' को भारत में प्रकाशित करने में मदद की थी, क्योंकि उनके पुस्तक को पाकिस्तान में छापने के लिए कोई प्रकाशक नहीं मिला था। यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि 2008 में अदनान के पिता के पुस्तक का विमोचन पूर्व पीएम आई के गुजराल ने किया था और पुस्तक के विमोचन के दौरान तत्कालीन पंजाब के कांग्रेसी सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह भी मौजूद थे। यह बेहद हास्यास्पद है कि कांग्रेस को तब पाकिस्तानी अरशद सामी खान आपत्ति नहीं थी, लेकिन अब कांग्रेस को एक भारतीय को पदमश्री दिए जाने पर आपत्ति है।












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