Shocking: बिकने वाला है 70 साल पुराना राज कपूर का आइकॉनिक 'RK' स्टूडियो
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मुंबई। आरके स्टूडियो केवल एक स्थान का नाम नहीं है, बल्कि ये मायानगरी मुंबई की, खूबसूरत जगहों में से एक है। ये स्टूडियो, शो-मैन राजकपूर की बॉलीवुड को दी गई वो सौगात है, जहां से ऐसी फिल्मों का उद्गम हुआ, जो कि हिंदी सिनेमा के लिए मील का पत्थर साबित हुईं, लेकिन वक्त और हालात का शिकार ये स्टूडियो आज बिकने जा रहा है। आज राजकपूर का परिवार इस स्टूडियों को बेचने के लिए मजबूर हो गया है क्योंकि पिछले साल स्टूडियो में लगी आग ने इसे काफी नुकसान पहुंचाया है।
साल 1948 में बना था RK स्टूडियो
आपको बता दें कि इस स्टूडियो को राजकपूर ने साल 1948 में बनवाया था, इसे बेचने का निर्णय राजकपूर के बेटे ऋषि कपूर के लिए भी आसान नहीं है, उन्होंने खुद कहा कि सीने पर पत्थर रखकर इसे बेचने का फैसला लिया गया है। दरअसल पिछले साल राज कपूर स्टूडियो में आग लगने से काफी नुकसान हुआ था, जिसे अब बनवाने में बहुत खर्चा होगा। इसके चलते कपूर फैमिली ने इसे बेचने का बडा़ कदम उठाया है।

यहीं राजकपूर 'आवारा' हुए थे...
इस ऐतिहासिक स्टूडियो में सबसे पहले जो फिल्म शूट हुई थी, उसका नाम 'आग' था, इसके बाद अगले ही साल 1949 में आरके स्टूडियो में शूट हुई थी फिल्म 'बरसात', जो बॉक्स ऑफिस पर, सुपर हिट साबित हुई। इस फिल्म में राजकपूर और नरगिस ने बतौर लीड एक्टर्स अभिनय किया था। इसके बाद तो राजकपूर ने यहां एक से एक नायाब फिल्मों को शूट किया, जिसमे ना केवल कमाई की बल्कि नई मिसाल भी कायम की। यहीं राजकपूर 'आवारा' हुए तो यहीं पर उनकी बेस्ट फिल्म 'श्री 420' की शूटिंग हुई थी।

स्टूडियो के बिकने से परिवार भी निराश और कलाकार भी
इस स्टूडियो में उनकी फिल्म 'जिस देश में गंगा बेहती है' शूट हुई थी तो यहीं फिल्म 'मेरा नाम जोकर', 'बॉबी', 'सत्यम शिवम सुंदरम', 'प्रेम रोग' और राम तेरी गंगा मैली' को शूट किया था। साल 1988 में राजकपूर ने दुनिया से विदाई ले ली। इसके बाद कुछ फिल्में जैसे 'प्रेमग्रंथ', 'हिना' और 'आ अब लौट चले' फिल्मों को यहां शूट किया गया था। आपको बता दें कि चेंबूर में स्थित आर के स्टूडियो की देख रेख का काम राज कपूर के निधन के बाद से ही रणधीर कपूर के पास था। इस स्टूडियो के बिकने से जहां कपूर खानदान दुखी है वहीं इस स्टूडियो में बनी फिल्मों में काम करने वाले कलाकार भी इस बात से काफी निराश हैं।

गजब है लोगो की कहानी
आरके स्टूडियो के लोगो की बात करें तो उसे किसी ने डिजाइन नहीं किया था। ये एक अचानक से आए आइडिया का नतीजा था। आरके फि्ल्म्स के बैनर तले जो पहली फिल्म सुपरहिट साबित हुई वो थी 'बरसात' इसलिए उस फिल्म के एक सीन को ही स्टूडियो का लोगो बना दिया गया। इस लोगो में राजकपूर नरगिस को अपने हाथों में थामे हैं और कैपिटल लेटर्स में लिखे आरके के ऊपर खडे़ हैं।












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