चौंकाने वाले आंकड़े आए सामने, 92 प्रतिशत लोगों को नहीं लगी है कोविड वैक्‍सीन की बूस्‍टर डोज

नई दिल्‍ली, 14 जुलाई: कोरोना वायरस से बचाव के लिए एकमात्र उपाय वैक्‍सीनेशन ही है लेकिन बूस्‍टर डोज को एक चौंका देने वाले सरकारी आंकड़े सामने आए हैं। जिसका खुलासा खुद स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने किया है।

covid

केन्‍द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार भारत की लगभग 92 फीसदी आबादी ऐसी है, जिनको अभी कोविड वैक्‍सीनेशन का डोज नहीं लगा है। इन आंकड़ों के अनुसार भारत में लगभग 594 मिलियन वयस्क आबादी है जिन्‍होंने कोरोना की एहतियाती बूस्‍टर डोज के लिए देरी कर चुकी हैं।

शुरू किया बूस्‍टर डोज अभियान

इन आकंड़ों के अनुसार 92% भारतीय ऐसे हैं जिन्‍हें वर्तमान में कोविड -19 वैक्सीन की तीसरी, या बूस्टर डोज लगवानी है। इस डेटा के बाद ही बुधवार को राष्ट्रीय 75-दिवसीय फ्री वैक्‍सीनेशन की घोषणा की गई है ताकि अधिक से अध‍िक लोग बूस्‍टर डोज लगवाकर सुरक्षित हो सके।

95 दिन पहले लगनी शुरू हुई थी बूस्‍टर डोज

सरकार का ये आंकड़ा सभी वयस्कों के लिए कोविड -19 से बचाव के लिए टीकों की बूस्टर डोज शुरू करने के ठीक95 दिन बाद आया है। हाल के दिनों में जनता के बीच बूस्टर डोज को बढ़ावा देन के लिए दूसरी बड़ी नीतिगत घोषणा की गई।

सरकार ने किया ये बूस्‍टर डोज के लिए किया ये बदलाव

6 जुलाई को सरकार ने दूसरी खुराक और बूस्टर खुराक के बीच के अंतर को नौ से छह महीने तक कम करने की घोषणा की। लेकिन क्या यह तर्क देने के लिए पर्याप्त सबूत हैं कि बूस्टर खुराक लेने की अनिच्छा टीकों के मुफ्त प्रावधान से कम हो जाएगी?

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