भाजपा के खिलाफ खुलकर सामने आई शिवसेना, जारी की घोटालेबाज भाजपा बुकलेट
नई दिल्ली। भाजपा पर छिटपुट हमला बोलने वाली शिवसेना ने अब पार्टी के खिलाफ पूरी तरह से मोर्चा खोल दिया है। शिवसेना ने महाराष्ट्र की देवेंद्र फड़नवीस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, उसने बकायदा अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओ को एक बुकलेट बांटी है जिसका शीर्षक है घोटालेबाज भाजपा। दरअसल हाल ही में देवेंद्र फड़नवीस ने शिवसेना पर आरोप लगाया था कि शिवसेना दोहरी भूमिका निभा रही है वह कभी सहयोगी तो कभी विपक्षी दल बन जाती है।

शिक्षामंत्री का भी नाम शामिल
शिवसेना के मुखिया उद्धव ठाकरे ने बुधवार को भाजपा के खिलाफ बुकलेट को अपने आवास पर जारी किया। अपने आवास मातोश्री पर आयोजित कार्यक्रम में ठाकरे ने इसकी अध्यक्षता की। इस बुकलेट में भाजपा के उन तमाम नेताओं के नाम हैं जिनपर जमीन हड़पने, भ्रष्टाचार के आरोप हैं। इसमे वरिष्ठ भाजपा नेता एकनाथ खड़से का भी नाम है, साथ ही शिक्षामंत्री विनोद तावड़े और गिरीश महाजन का नाम भी बुकलेट में शामिल है।
कई नेताओं ंके नाम शामिल
बुकलेट में भाजपा के नताम नेता और प्रदेश सरकार के मंत्रियों के नाम भी शामिल हैं, जिसमे विष्णु सरवा, प्रवीण ठाकरदारेकर, जयकुमार रावल, चंद्रशेखर बावनकुले, रजित पाटिल, संभाजी पाटिल का नाम भी शामिल है। साथ ही इन तमाम नेताओं पर लगे आरोपों की भी जानकारी इसमे दी गई है। बुकलेट में राष्ट्रीय स्तर के घोटालों का भी जिक्र किया गया है, इसमे भाजपा की पिछली सरकार में हुए ताबूत घोटाले सहति अन्य राज्यों में जहा भाजपा की सरकार है वहां के खोटालों का भी जिक्र किया गया है।
गठबंधन खतरे में
आपको बता दें कि मौजूदा समय में शिवसेना ना सिर्फ महाराष्ट्र में भाजपा के साथ सरकार में शामिल है बल्कि वह केंद्र में भी सरकार में शामिल है, बावजूद इसके वह लगातार भाजपा पर हमला बोलती रहती है। लेकिन जिस तरह से अब योजनाबद्ध तरीके से बुकलेट को जारी किया गया है, उसने पार्टी के कार्यकर्ताओं को यह साफ संदेश दे दिया है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में अब दोनों ही दल एक दूसरे के सामने होंगे।
अलग-अलग लड़ा था बीएमसी चुनाव
इसी साल बीएमसी के चुनाव में शिवसेना और भाजपा में खुलकर विरोध सा्मने आया था, जिसके बाद दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। लेकिन चुनाव के नतीजे आने के बाद दोनों दल एक बार फिर से साथ आ गए थे, उस वक्त देवेंद्र फड़नवीस ने कहा था कि शिवसेना सहयोगी और विपक्षी दल दोनों की भूमिका निभा रही है, ऐसे में उद्धव ठाकरे को गठबंधन पर फैसला कर लेना चाहिए।
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