मोदी की पत्नी से पहले राहुल की शादी के बारे में सोचे कांग्रेस- शिवसेना

पार्टी के मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में कहा गया है कि मोदी की शादी कोई मुद्दा नहीं है. इससे न ही गरीबों की रोटी चलती है न ही घोटालों के जरिए लूटा गया पैसा वापस आने की उम्मीद बंधती है।
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कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए 'सामना' में लिखा है, 'कांग्रेस के राजनैतिक गुंडों और नेताओं ने अब तक असीमित महिलाओं को फंसाया है। कई अबलाओं की जिंदगी बर्वाद की है।
शादी का प्रलोभन और पद का लालच देकर कई महिलाओं को ठगा है. कांग्रेस पार्टी का मतलब भ्रष्टाचार और व्याभिचार का गटर और वहीं कांग्रेस वाले मोदी के विवाह को लेकर उनकी पत्नी जशोदा बेन पर हुए तथाकथित अन्याय के खिलाफ बांह उठाकर खड़े हैं।'
इस लेख में आगे लिखा गया है, 'मोदी की निजी जिंदगी में नाक घुसेड़ना मतलब स्वयं को रखें ढंककर, दूसरों को देखें झुककर। ऐसा ही सब मामला है।
कांग्रेस वालों को मोदी की शादी राष्ट्रीय प्रचार का मुद्दा लगता है तो यह उनका दिवालियापन है। मोदी की शादी पर बवाल मचाने से देश में महंगाई और भ्रष्टाचार कम होने वाला है क्या? कोयला घोटाले में पैसा खाकर जिन्होंने डकार भी नहीं ली वे सारे लोग लूट का माल देश की तिजोरी में जमा करनेवाले हैं क्या?
असम में घुसे बांग्लादेशी वापस लौटनेवाले हैं क्या? मोदी की शादी से आम आदमी के दैनिक जीवन का तिल भर भी संबंध है क्या? यह सवाल जनता की कमाई से संबंधित है क्या? राजनीति के मूल मुद्दे को बगल में करने के लिए ही इस तरह के मुद्दे चर्चा के लिए उठाए जा रहे हैं।
मोदी ने पत्नी जशोदा बेन की जानकारी अब तक छुपा कर रखी, लेकिन क्या इससे गुजरात का विकास थम गया? अब जानकारी दी है न, फिर उसे स्वीकार करो।'
राहुल गांधी की शादी की फिक्र करने की नसीहत देते हुए इस संपादकीय में लिखा गया है, 'जिन्हें ऐसा लगता है कि मोदी कानून की कैंची में अटकेंगे तो वे मुर्खों के नंदनवन में विचरण कर रहे हैं. पहले राहुल बाबा को सेहरा बांधो, फिर मोदी की शादी की चर्चा करो!'












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