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Shiva Chouhan: सियाचिन में तैनात पहली महिला आर्मी ऑफीसर ने पूरे किए 100 दिन, जानें कैसा रहा अनुभव

सियाचिन ग्लेसियर में तैनात पहली महिला आर्मी Captain Shiva Chouhan ने इस कठिन पोस्टिंंग पर 100 दिन पूरे कर लिए हैं। जानिए कौन हैं शिवा चौहान और दुनिया के सबसे ऊंचे युद् क्षेत्र में तैनाती का अनुभव?

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Shiva Chouhan आर्मी की वो पहली महिला ऑफीसर है जिनकी पोस्टिंग दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन में तैनात किया गया था। शिवा चौहान ने बुधवार को सफलतापूर्व सियाचिमें तैनात होने के पूरे 100 दिन पूरे कर लिए हैं। यार रहे बर्फ से ढ़का हुआ ये युद्दक्षेत्र खराब मौसम और मानव शरीर को भारी नुकसान के लिए जाना जाता है।

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माइनस 60 डिग्री तक रहता है तापमान

सर्दियों के दौरान सियाचिन में तापमान माइनस 60 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है, हिमस्खलन और भूस्खलन सामान्य घटना है। ऑक्‍सीजन कम होने के कारण कम सांस आना बंद हो जाए और ड्यूटी के दौरान भारी बर्फबारी में कहां जमींदोज हो दफन हो जाए कुछ पता नहीं होता।

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बिताए 100 दिन

सियाचिन ग्‍लेशियर में इतनी कड़ी परिस्थितियों में पहली अकेली महिला आर्मी ऑफीसर शिवा चौहान ने वहां पर 100 दिन गुजारे। आइए जानते हैं दुनिया में सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र सियाचिन ग्‍लेशियर जो भारत-पाकिस्‍तान सीमा पर नियंत्रण रेखा के पास स्थित है वहां पर तैनात की गई पहली महिला अधिकारी क शिवा चौहान के बारे में जानिए और कैसा रहा उनका 100 दिन का अनुभव?

सियाचिन ग्लेसियर पर तैनाती से पहले दी गई थी ट्रेनिंग

भारतीय सेना की फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स ने दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र में कैप्टन शिवा चौहान के 100 दिन पूरे करने की जानकारी दी है। सियाचिन में तैनात होने से पहले, कैप्टन चौहान को कठोर ट्रेनिंग दी गई थी। आर्मी के अन्य अधिकारियों के साथ सियाचिन बैटल स्कूल में बर्फ की दीवार पर चढ़ना, हिमस्खलन और हिमस्खलन बचाव और उत्तरजीविता अभ्यास शामिल था। इसे सफलतापूर्वक पूरा करने में मदद की और उन्हें सियाचिन ग्लेशियर में तैनात किया गया।

15 हजार 632 फीट की ऊंचाई पर की गई थी पोस्टिंग

राजस्‍थान के उदयपुर शहर की Shiva Chouhan को सियाचिन ग्‍लेशियर में 15 हजार 632 फीट की ऊंचाई पर तैनात की गई थीं। एनजेआर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, उदयपुर से सिविल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट शिवा चौहान देश की पहली महिमा आर्मी अधिकारी हैं जिन्‍हें सियाचिन ग्लेशियर पर तैनात कर देश की सुरक्षा जैसी बड़ी जिम्‍मेदारी सौंपी गई है।

दो जनवरी 2023 की यहां की गई थी पोस्टिंग

बचपन से ही शिवा चौहान को भारतीय सशस्त्र बल में शामिल होने के लिए प्रेरित किया गया था और अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी (ओटीए), चेन्नई में प्रशिक्षण के दौरान अद्वितीय उत्साह दिखाया और मई 2021 में इंजीनियर रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। दो जनवरी 2023 को शिवा चौहान की पोस्टिंग लेह से सियाचिन ग्‍लेश्यिर में पोस्टिंग की गई थी।

शिवा चौहान की पिता की मौत होने के बाद मां ने सिलाई कर पाला

18 जुलाई 1997 को शिवा चौहान का जन्‍म उदयपुर निवासी राजेंद्र सिंह चौहान के घर हुआ। उनके पिता की रेडियम नंबर प्‍लेट की दुकान थी। मां अंजलि चौहान हाउस वाइफ थीं लेकिन 2007 में बीमारी के कारण पिता राजेंद्र चौहान की मौत हो गई। अचानक परिवार और बच्‍चों की पूरी जिम्‍मेदारी मां अंजलि चौहान पर आ गई। घर में सिलाई का काम करके जो थोड़े पैसे आते उससे दोनों बच्‍चों शुभम व शिवा चौहान भी पढ़ाई करवाती और जैसे तैसे घर चलाती थीं।

नौवीं कक्षा से घर खर्च में मदद करने के लिए शिवा ने पढ़ाया ट्यूशन

पढ़ाई में होशियार शिवा और उनकी बहन नौवीं कक्षा में पहुंची तो बच्‍चों को ट्यूशन पढ़ाने लगीं और मां को घर चलाने में मदद की। शिवा चौहान को भारतीय सेना में लेह इलाके में पहली पोस्टिंग उसकी बर्थडे वाले दिन 18 जुलाई 2021 को मिली जहां उन्‍होंने 100 दिन पूरे कर लिए हैं।

सियाचिन की बर्फ है जानलेवा

सियाचिन में दो तरह की बर्फ होती है जिसमें एक पक्‍की बर्फ वो जो वर्षों से वहां जमी रहती है। उसकी परत 20 से 30 फीट तक होती है जो स्‍थाई होती है जो कभी हटती नहीं केवल पिघलती हैं। दूसरी कच्‍ची बर्फ जो सड़कों पर जम जाती है जिसे आर्मी के जवान साफ करते रहते हैं।

जानें कैसे बिताए सियाचिन ग्लेसियर में 100 दिन

भारत पाकिस्‍तान की सीमा सियाचिन ग्‍लेशियर में भारत पाकिस्‍तान सीमा पर एक फौजी की ड्यूटी दो घंटे की होती है। बर्फबारी और 60 डिग्री तक माइनस डिग्री तापमान ओर सर्द हवाओं में इससे ज्‍यादा एक फौजी ड्यूटी नहीं कर सकता। इसलिए हर दो घंटे बाद फौजी को बंकर में आकर दोबारा शरीर को तरोजाता करना होता है। दो घंटे तक तो उसे सीमा पर बर्फ में मुस्‍तैदी से खड़े रहते हुए दुश्‍मनों पर दूरबीन से नजर और पेट्रोलिंग करनी होती है।

सियाचिन ग्लेसियर में कहां रहती है कैप्‍टन शिवा

पाकिस्‍तान की सीमा से आधा-एक किलोमीटर की दूरी पर बने आर्मी जवानों और ऑफीसर के बंकर होते हैं बर्फ से ढकीं चोटियों के बीच विशेष जगह पर बने ऐसे ही बंकर में शिवा चौहान ने ऐसे ही दिन बिताए जिसमें एक विशेष प्रकार का स्‍लीपिंग बेड होता है जो चारों तरफ से पैक रहता है इसी में अन्‍य अधिकारियों की तरह शिवा चौहान भी सोती हैं। शिवा की जहां पोस्टिंग है वहां वो अकेली और पहली महिला अधिकारी हैं।

शिवा चौहान सियाचिन में क्‍या खाती हैं?

बाकी आर्मी जवानों और अधिकारियों की तरह शिवा चौहान को भी पैक्‍ड फूड मिलता है जिसे कम्‍पो राशन कहा जाता है। जिसमें चिकन, मटन व अंडे का पाउडर और हलुआ समेत अन्‍य चीजें मौजूद रहती है। इसे जब भी शिवा चौहान को खाना होता तो उसमें गर्म पानी डालकर खाते है।

ठंड के कारण महीनों नहीं नहाते हैं आर्मी के जवान और अधिकारी

इतनी ठंड में अन्‍य जवानों की तरह शिवा चौहान ठंड से बचने के लिए एक विशेष तरह की यूनीफार्म और जूते पहन कर रहते हैं। इतने ठंडे इलाके में तैनात फौजी दो तीन महीनों तक नहाते तक नहीं है। ठंड के कारण कई बार फौजी बीमार पड़ जाते है तो उनका इलाज वहां मौजूद डॉक्‍टर ही करते हैं।

आर्मी जवानों की मौत का सबस बनती है बर्फ और खराब मौसम

पक्‍की बर्फ इतनी खतरनाक होती है कि अगर कोई उसमें दब जाए तो वो उसमें दब कर मौत हो जाती है। ग्लेसियर में सालों तक लोगों को शव बर्फ के नीचे दबा रहता है जो खोजने से भी नहीं मिलता। सियाचिन ग्‍लेशियर पर आर्मी के जवानों की मौत युद्ध की अपेक्षा बर्फ या क्‍लाइमेट की चपेट में आने से होती है।

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