शिवसेना का इशारों में कांग्रेस नेताओं पर हमला, अशोक और पृथ्वीराज चव्हाण को बताया 'बूढ़े दूल्हे'
नई दिल्ली- महाराष्ट्र में विधानसभा के शीतकालीन सत्र के बाद उद्धव ठाकरे मंत्रिमंडल का विस्तार होना तय माना जा रहा है। चर्चा है कि इस विस्तार में शिवसेना की सहयोगी पार्टियों- कांग्रेस और एनसीपी के कुछ दिग्गज नेताओं को जगह मिल सकती है। एनसीपी कोटे से अजित पवार को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की अटकलें पहले से चल रही हैं। इसी मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कांग्रेस के कुछ बड़े नेता पूरी ताकत के साथ अपने लिए कोई बड़ा मंत्रालय हासिल करने के लिए लॉबिंग कर रहे हैं। अब शिवसेना ने कांग्रेस के ऐसे ही नेताओं पर इशारों में ही तगड़ा तंज कसना शुरू कर दिया है। दरअसल, इसके लिए शिवसेना ने हमेशा की तरह अपने मुखपत्र 'सामना' की संपादकीय का इस्तेमाल किया है, जिसमें राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों पृथ्वीराज चव्हाण और अशोक चव्हाण को 'पुराने अचार' और 'बूढ़े दूल्हे' से तुलना कर निशाना साधा गया है।
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'सामना' के जरिए साधा निशाना
'सामना' ने अपने सोमवार के संपादकीय में महाराष्ट्र कांग्रेस के दो बड़े नेताओं को कैबिनेट में जगह पाने के लिए जोर आजमाइश के चलते आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस के ये दोनों दिग्गज नेता पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण और अशोक चव्हाण हैं। शिवसेना के मुखपत्र में इन दोनों के बारे में कहा गया है कि उन्हें कैबिनेट में जगह देना बहुत मुश्किल काम साबित हो सकता है। संपादकीय में कहा गया है- "नागपुर विधानसभा सत्र के बाद विभागों का फिर से बंटवारा होना है। दो पूर्व मुख्यमंत्री कैबिनेट में शामिल होना चाहते हैं। जब दो पूर्व मुख्यमंत्री कैबिनेट में आएंगे तो उन्हें देने के लिए उपयुक्त पोर्टफोलियो क्या होगा, यह एक सवाल है। उन्हें जगह देना बहुत बड़ा काम होगा।"

'बूढ़े दूल्हों का मजाक बनेगा'
इसके बाद संपादकीय में महाराष्ट्र की राजनीति नए लोगों को आगे आने देने की वकालत की गई है। लेकिन, उनके लिए रास्ता नहीं बनाने को लेकर ही दोनों चव्हाणों पर चुटकी ली गई है। संपादकीय कहता है- "पुराने अचार खाने में ही अच्छे लगते हैं। एक बूढ़े दूल्हे का सिर्फ मजाक बनेगा, लोग ऐसा ही महसूस करते हैं, लेकिन युवाओं के लिए रास्ता कौन बनाएगा।" सामना आगे कहता है जो मंत्री बनने के लिए लॉबिंग कर रहे हैं, उन्हें महत्वपूर्ण मंत्रालय भी चाहिए। गौरतलब है कि सामना का संपादकीय खुद पार्टी प्रवक्ता संजय राउत लिखते हैं और शिवसेना नेताओं का कहना है कि उनका इशारा सीधे तौर पर पृथ्वीराज चव्हाण और अशोक चव्हाण की ओर है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक दोनों ने दिल्ली में हाईकमान के पास भी उनके लिए उपयुक्त मंत्री पद के लिए लॉबिंग की है।

दोनों चव्हाण को सत्ता से दूर रखना चाहती है सेना!
माना जा रहा है कि शिवसेना इन दोनों नेताओं के मंत्रिमंडल में शामिल होने को लेकर बहुत ज्यादा उत्साहित नहीं है। क्योंकि, पार्टी को लगता है कि मुख्यमंत्री रह चुके नेताओं के मंत्री रहने पर उद्धव के सरकार चलाने में दिक्कत हो सकती है। सामना के संपादकीय की एक लाइन से भी उसकी इस आशंका को समझा जा सकता है। संपादकीय में लिखा गया है- "लोगों को इस भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि अगर वे सरकार में नहीं रहेंगे तो वह काम ही नहीं कर सकेगी।" माना जा रहा है कि यह टिप्पणी पूर्व सीएम अशोक चव्हाण की ओर इशारा करते हुए की गई है।

उद्धव के फैसले पर भी जताई गई हैरानी
सबसे बड़ी बात ये है कि सामना में गृह विभाग मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के अपने पास नहीं रखने पर भी हैरानी जताई गई है। पिछली सरकार में यह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास ही था। सामना में कहा गया है कि कैबिनेट विस्तार के बाद विभागों का फिर से बंटवारा होगा। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह विभाग एनसीपी के पास से उद्धव वापस अपने पास ले सकते हैं?












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