चुनाव से पहले बीजेपी ने कतरे महारानी के पर, अमित शाह ने शेखावत को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी

नई दिल्ली। राजस्थान में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं लेकिन बीजेपी के लिए वहां राह आसान नजर नहीं आती है। रास्ता और मुश्किल इसलिए है कि वहां बीजेपी खुद धड़ो में बंटी हुई है और केंद्रीय नेतृत्व के साथ भी उसकी तनातनी है। इस बीच ये मनमुटाव और बढ़ सकता है क्योंकि पार्टी ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को राजस्थान के लिए विधानसभा चुनाव प्रबंधन समिति का संयोजक नियुक्त किया है। असल में केंद्र का बीजेपी नेतृत्व शेखावत को राजस्थान में पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाना चाहता था लेकिन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने ये होने नहीं दिया। पर अब शेखावत सीएम की इच्छा के खिलाफ राज्य में चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा होंगे। पार्टी को ये कदम राजस्थान में नाराज राजपूतों को साधने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।

gajendra singh
वसुंधरा सिर्फ पैनल की सदस्य
पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल सैनी को भी बड़ी जिम्मेदारी दी है। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने उन्हें 16 सदस्यीय पैनल का नेतृत्व करने की ज़िम्मेदारी दी है। ये पैनल आने वाले राजस्थान विधानसभा चुनावों के बारे में सभी महत्वपूर्ण निर्णय लेगा। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे इस पैनल के सदस्यों में से एक हैं, जबकि केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और राजस्थान भाजपा प्रवक्ता सतीश पूनिया पैनल के सह संयोजक बनाए गए हैं।

उपचुनाव में लगा था झटका

उपचुनाव में लगा था झटका

गजेंद्र सिंह शेखावत जोधपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि राजस्थान की मुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख के बीच मतभेदों को देखते हुए उनकी नियुक्ति बहुत महत्वपूर्ण है। क्योंकि मतभेदों के चलते ही लगभग तीन महीने तक नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति में देरी हुई थी। यहां ये बात याद रखने वाली है कि वसुंधरा राजे के वफादार अशोक परनामी ने 16 अप्रैल को राजस्थान के भाजपा अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था, क्योंकि पार्टी राज्य में दो लोकसभा सीटों और एक विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में हार के बाद संगठन में कुछ बदलाव करना चाहती थी।

शेखावत, अमित शाह की पसंद

शेखावत, अमित शाह की पसंद

सूत्रों का कहना है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह शेखावत को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपना चाहते थे लेकिन इसका मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने विरोध किया था। वसुंधरा श्रीचंद्र कृपलानी को प्रदेश अध्यक्ष बनाना चाहती थीं। दरअसल कहा जाता है कि शेखावत का नाम पर राजस्थान बीजेपी दो हिस्सों में बंट गई थी। एक वर्ग शेखावत को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के बिल्कुल भी पक्ष में नहीं था। इसके बाद बीच का रास्ता निकालते हुए मदन लाल सैनी को जून में प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई।

राजपूतों को साधने की कोशिश

राजपूतों को साधने की कोशिश

अब जिस तरह से एससी/एसटी एक्ट को लेकर राजस्थान में भी अगड़ी जातियां विरोध कर रही हैं उसे देखते हुए भी कहा जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व ने गजेंद्र सिंह शेखावत को आगे किया है। इसके अलाव चुनाव के लिए बनाई गई कमेटी में दो राज्य मंत्रियों यूनुस खान और राजेंद्र राठौड़ को सदस्य के रूप में शामिल किए गया है। राज्यसभा के सदस्य किरोड़ी लाल मीणा को भी समिति में जगह दी गई है। केंद्रीय मंत्री सीआर चौधरी और राज्य के गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया भी टीम का हिस्सा होंगे।

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