जब शीला दीक्षित को देखकर लड़कों ने गाया था गाना... 'एक लड़की भीगी-भागी सी...'

नई दिल्ली। शीला दीक्षित, देश के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल थीं, जिनका सम्मान केवल पक्ष ही नहीं बल्कि विपक्ष भी करता था,इसी कारण आज उनके जाने से सियासी गलियारे में सन्नाटा पसरा हुआ है। शीला दीक्षित को लोग एक सरल स्वभाव वाली निडर और कड़े फैसले लेने वाली महिला के रूप में जानते थे, उनके राजनीतिक जीवन से जुड़ी बातों को तो हर कोई जानता है लेकिन उनके निजी जीवन के बारे में कम लोगों को ही पता है।

शीला दीक्षित ने सुनाया था दिलचस्प किस्सा

शीला दीक्षित ने सुनाया था दिलचस्प किस्सा

कुछ वक्त पहले बीबीसी हिंदी को दिए एक इंटरव्यू में शीला ने बताया था कि एक बार वो कानपुर स्टेशन पर अपने पति विनोद दीक्षित को छोड़ने के बाद जैसे ही बाहर आईं तो तेज बारिश होने लगी थी, उन्हें रास्ता नहीं मालूम था, वह स्टेशन के आस-पास ही इधर-उधर भटक कर रास्ते की तलाश कर रही थीं, तभी वहां मौजूद कुछ लड़के उन्हें देखकर गाना गाने लगे- 'एक लड़की भीगी-भागी सी...'. शीला दीक्षित ने कहा था कि लड़कों की उस हरकत ने मुझे थोड़ा सा डरा दिया था क्योंकि उस वक्त रात हो रही थी, बारिश तेज थी और मुझे रास्ता नहीं दिख रहा था।

पुलिस वालों ने शीला दीक्षित की बात को किया था इ्ग्नोर

पुलिस वालों ने शीला दीक्षित की बात को किया था इ्ग्नोर

लेकिन तभी संजोग से वहां एक पुलिसवाला आ गया, शीला दीक्षित ने उससे कहा कि वह उन्हें थाने लेकर चले, थाने पहुंचकर मे शीला दीक्षित ने कहा कि वह एक IAS की पत्नी हैं, उन्हें लखनऊ जाना है इसलिए एस्कॉर्ट चाहिए लेकिन पुलिस वालों ने शीला की बात को नजरअंदाज कर दिया, उन्हें लगा कि शीला दीक्षित झूठ बोल रही हैं, इसके बाद शीला ने रात करीब डेढ़ बजे कानपुर के पुलिस कमिश्नर को फोन किया और सारी बात बताई जिसके बाद कमिश्नर ने पुलिसकर्मियों को जमकर फटकारा और शीला को लखनऊ छोड़ कर आने के लिए कहा। इसके बाद पुलिसकर्मी उन्हें छोड़ने लखनऊ तक आए, पूरे रास्ते शीला दीक्षित ने खुद ही गाड़ी चलाई थी।

दिलचस्प था सियासी सफर

दिलचस्प था सियासी सफर

आपको बता दें कि शीला दीक्षित 81 वर्ष की थीं और लंबे वक्त से बीमार चल रही थीं, वर्तमान में वो दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष का पद संभाल रहीं थी। वो लगातार 15 सालों तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं थी और 2014 में उन्हें केरल का राज्यपाल बनाया गया था हालांकि कुछ समय बाद ही उन्होंने राज्यपाल के पद से इस्तीफा दे दिया था।

अंतिम सांस तक कांग्रेस के लिए लड़ती रहीं

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और वो दिल्ली में फिर से सक्रिय हो गईं थीं, दिल्ली को 'नई' दिल्ली बनाने के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाता रहेगा। हाल ही में 2019 के लोकसभा चुनाव में वो दिल्ली की उत्‍तर-पूर्व दिल्‍ली सीट से चुनाव लड़ीं थी। हालांकि इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

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