मिलिए तीन बार तलाक की प्रथा चुनौती देने वाली दो बच्चों की मां शायरा से
नई दिल्ली। पिछले दिनों देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में जब मुसलमान समुदाय में प्रचलित तीन बार तलाक की प्रथा को चुनौती देने से जुड़ी एक याचिका की खबर आई तो पूरे देश में एक महिला का नाम सुर्खियों में था।

शायरा ने बताया दर्द
यह महिला है उत्तराखंड की रहने वाली 37 वर्ष की शायरा बानो जिन्होंने 10 वर्ष की अपनी शादी में कई जुल्म सहे हैं। शायरा ने एक इंटरव्यू में अपने साथ हुए दर्द की कहानी को बिना झिझके बताया है।
हालांकि शायरा भी तीन बार तलाक कहकर पत्नी को छोड़ देने वाली 'कुप्रथा' का शिकार बनी हैं। शायरा ने इंग्लिश डेली टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए अपने इंटरव्यू में अपने ऊपर हुए जुल्मों की फेहरिस्त को बयां किया है।
उन्होंने बताया है कि कैसे उनके पति और ससुराल वाले उन्हें परेशान करते थे और बुरी तरह से मारते-पीटते थे।
कौन हैं शायरा
- उत्तराखंड की शायरा ने पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है।
- इस याचिका में उन्होंने तीन बार तलाक को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है।
- शायरा ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि उनके पति ने उनसे जो मांग की है वह उसे पूरा नहीं कर सकती हैं।
- शायरा की 10 वर्ष की शादी में उसके पति ने छह बार जबरन उसका अबॉर्शन कराया है।
- शायरा के मुताबिक उसका पति खुद उनको गर्भनिरोधक गोलियां देता था।
- शायरा दो बच्चों की मां हैं और उनके बच्चें उनके पति के पास हैं।
- वह अब कोर्ट में बच्चों की कस्टडी के लिए लड़ाई लड़ना चाहती हैं।
- वह समाजशास्त्र से पोस्टग्रेजुएट हैं और चाहती हैं कि उन्हें भी एक सामान्य जिंदगी का हक मिले।
- पिछले वर्ष शायरा के पति ने एक पेपर पर तीन बार,'तलाक, तलाक, तलाक' लिखकर उन्हें छोड़ दिया था।
- वह तब से अपने माता-पिता के साथ ही रहती हैं।
- शायरा ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के एप्लीकेशन एक्ट 1937 के सेक्शन दो को चुनौती दी है।
- शायरा ने मांग की है कि तीन बार तलाक को असंवैधानिक और निकाह को हलाला घोषित किया जाए।
- इसके अलावा शायरा ने मुस्लिम मैरिज एक्ट 1939 को खत्म करने की मांग भी की है।












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