शशि थरूर ने 'जी-23' को बताया मीडिया की उपज, राहुल गांधी को लेकर कही ये बात
नई दिल्ली, 23 दिसम्बर। कांग्रेस नेता और लोकसभा सांसद शशि थरूर ने पार्टी के अंदर जी-23 समूह को लेकर कहा कि यह मीडिया की पैदाइश थी। जी-23 समूह पहली बार चर्चा में आया था जब कांग्रेस के 23 वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाया था। इन नेताओं ने पार्टी में अधिक लोकतंत्र की मांग की थी। इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले नेताओं में शशि थरूर भी थे। इन नेताओं को जी-23 ग्रुप के नाम से बुलाया जाने लगा था।

इसी जी-23 नाम को लेकर शशि थरूर ने कहा कि यह नाम मीडिया का दिया हुआ है। उन्होंने कहा 23 की जगह इसमें और भी नाम हो सकते थे लेकिन उस समय 23 लोग ही पहुंच सके थे इसलिए इन्हीं लोगों ने हस्ताक्षर किया था। थरूर ने अपनी नई पुस्तक के विमोचन के अवसर पर कहा "मैने इस पर हस्ताक्षर किए क्योंकि इसमें कुछ भी असाधारण नहीं है। इसमें (पत्र में) में कहा गया है कि कांग्रेस को खुद को और अधिक लोकतांत्रिक बनाना चाहिए, हमें पार्टी के संसदीय बोर्ड को पुनर्जीवित करना चाहिए। हमारे पास कार्य समिति की निर्वाचित सीटों के लिए चुनाव होना चाहिए और हमें पार्टी को जमीनी स्तर पर पुनर्जीवित करना चाहिए।
थरूर का दावा ऐसे समय आया है जब पार्टी के सामने उत्तराखंड में भी पंजाब जैसे संकट की आहट आ रही है जहां पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर संगठन पर खुलकर काम न करने देने का आरोप लगाते हुए अपनी बेबसी व्यक्त की है।
थरूर ने ये भी दावा किया कि पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले 23 नेता कभी एक साथ नहीं मिले। उन्होंने कहा कि मैने इस पर हस्ताक्षर करने के बारे में नहीं सोचा था खासतौर पर जब पार्टी में ऐसे लोग इसे बढ़ा रहे थे जो संगठन में काफी वरिष्ठ थे ऐसे में यह भी उतना ही बुरा था जितना कि हस्ताक्षर करने बाद पर इस पर चर्चा हुई। वास्तव में इन 23 नेताओं को बागी के तौर पर देखा गया जबकि मैं ऐसा नहीं मानता कि इन लोगों का ऐसा करने का कोई इरादा था।
राहुल गांधी को चुने जाने में दिक्कत नहीं- थरूर
कांग्रेस को निर्वाचित अध्यक्ष मिलने पर कहा कि थरूर ने कहा कि जो लोग परिवार से हैं वह भी निर्वाचित हो सकते हैं। थरूर ने राहुल गांधी को लेकर कहा "इसमें बहुत कम संदेह है कि राहुल गांधी अगर चुनाव लड़ने के इच्छुक थे तो कांग्रेस में किसी के खिलाफ चुने जाने में उन्हें कोई समस्या होगी। पार्टी कार्यकर्ताओं में दशकों से गांधी-नेहरू परिवार के प्रति निष्ठा है जो आसानी से दूर नहीं जाने वाली है।"
थरूर ने बताया कि राहुल गांधी ने अध्यक्ष का पद पूरी निष्पक्षता से छोड़ा था। राहुल गांदी ने यह तक कहा था कि अध्यक्ष मैं या मेरे परिवार से नहीं होना चाहिए लेकिन कार्यसमिति ने श्रीमती गांधी का समर्थन किया और उन्हें रिटायरमेंट से बार निकलकर नेतृत्व करने के लिए कहा गया। आज वे पार्टी का नेतृत्व कर रही हैं।












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