अडानी मुद्दे को लेकर JPC पर शरद पवार के रुख नरम, बोले- विपक्षी एकता के हित में नहीं करूंगा विरोध

एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने अडानी मुद्दे की जांच को लेकर अपनी आशंकाओं के बीच जेपीसी का विरोध नहीं करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि वे विपक्षी एकता के हित में संयुक्त संसदीय समिति का विरोध नहीं करेंगे।

Sharad Pawar

Sharad Pawar on JPC for Adani Issue: यूएस शार्ट सेलर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को लेकर अडानी ग्रुप के बहाने विपक्ष लगातार बीजेपी नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को निशाने पर ले रहा है। अडानी ग्रुप के लेनदेन की जांच विपक्ष की ओर से JPC (Joint Parliamentary Committee) से लगातार मांग की जा रही थी। इस बीच एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने जेपीसी जांच को लेकर कई आशंकाएं व्यक्त की थीं और कहा था कि अडानी मुद्दे की जांच सुप्रीम कोर्ट से की समिति से कराया जाना जेपीसी की तुलना में बेहतर होगा। वहीं अब एनसीपी चीफ ने जेपीसी को लेकर दिए अपने बयान पर नरम पड़ गए।

कांग्रेस सहित कई अन्य विपक्षी अडानी मुद्दे की दल जेपीसी जांच की मांग कर रहे हैं। ऐसे में मंगलवार को शरद पवार जेपीसी को लेकर दिए अपने बयान पर नरम दिखे। उन्होंने कहा हालांकि वे अडानी मुद्दे की जांच संयुक्त संसदीय समिति (JPC) से कराने को समर्थन नहीं दे रहे लेकिन वे इसका विरोध भी नहीं करेंगे। एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के रुख में ये बड़ा बदलाव यूं ही नहीं आया। दरअसल वे विपक्षी एकता को बनाए रखने में सहयोग करना चाहते हैं। उन्होंने अपने बयान में साफ किया किया वे सिर्फ विपक्षी एकता के हित में जेपीसी का विरोध का ना करने का फैसला ले रहे हैं।

एसीपी चीफ ने आगे कहा, " विपक्षी दलों की एकता में एक दोस्त की राय मेरे से अलग हो सकती है, लेकिन हमें इसमें एकजुट होना होगा। मैंने केवल अपनी राय व्यक्त की। लेकिन अगर सहयोगियों को लगता है कि जेपीसी जांच की जरूरत है, तो मैं इसका विरोध नहीं करूंगा। मैं उनकी राय से सहमत नहीं हो सकता, लेकिन विपक्ष की ताकत को प्रभावित नहीं होने देंगे।" उन्होंने कहा, "यदि एक जेपीसी का गठन किया गया था, तो बहुमत वाले सदस्य लोकसभा में बहुमत के कारण भाजपा से होंगे और शेष कुछ विपक्ष से होंगे, हालांकि, अगर विपक्ष चाहता है, तो मैं आपत्ति नहीं करूंगा।"

इससे पहले एक इंटरव्यू में शरद पवार ने कहा था कि अडानी मुद्दे पर एनसीपी ने जेपीसी का समर्थन किया है, लेकिन मुझे लगता है कि जेपीसी में सत्ताधारी पार्टी का वर्चस्व होगा। इसलिए सच्चाई सामने नहीं आएगी।

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