लेटर विवाद: बीजेपी के आरोपों पर शरद पवार का पलटवार, बोले-मुद्दों से भटकाना चाहती है सरकार

नई दिल्ली। एपीएमसी ऐक्ट में बदलाव को लेकर राज्यों की लिखी गई चिट्ठी पर मचे घमासान पर एनसीपी प्रमुख शरद पवार की ओर से सफाई आई है। जिसमें उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री के रूप में कृषि क्षेत्र में सुधारों की मांग की बात कही थी। बीजेपी का दावा है कि, पवार साहेब ने खुद ही निजीकरण को प्रोत्साहित किया था। बीजेपी के आरोपों पर पलटवार करते हुए पवार ने कहा कि, बीजेपी सिर्फ मुद्दा भटकाने की कोशिश कर रही है।

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    Letter Dispute: BJP के आरोपों पर Sharad Pawar का पलटवार, कहा- मुद्दे से ना भटकाएं | वनइंडिया हिंदी
    Sharad Pawars counterattack on BJPs allegations, says They are just trying to divert the attention

    एनसीपी चीफ शरद पवार ने कहा कि, मैंने कहा था कि एपीएमसी को कुछ सुधारों की जरूरत है। एपीएमसी अधिनियम को जारी रखा जाना चाहिए लेकिन सुधारों के साथ। इसमें कोई संदेह नहीं है कि मैंने पत्र लिखा था। लेकिन इनके तीन अधिनियमों में एपीएमसी का भी उल्लेख नहीं है। वे सिर्फ ध्यान हटाने की कोशिश कर रहे हैं। महत्व देने की जरूरत नहीं है। शरद पवार ने मंगलवार को कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात करने के पहले कृषि कानूनों पर चर्चा करेंगे और सामूहिक रुख अपनाएंगे।

    शरद पवार ने शीला दीक्षित (दिल्ली) और शिवराज चौहान (मध्य प्रदेश) जैसे मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा था कि वे अपने राज्यों में कृषि उपज विपणन समिति (एपीएमसी) अधिनियम में संशोधन करने के लिए कहें। भाजपा की ओर से इस पत्र को ऑनलाइन वायरल किया गया है। पुरानी चिट्ठी वायरल होने के बाद केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया था कि यूपीए सरकार में बतौर कृषि मंत्री शरद पवार ने एपीएमसी ऐक्ट में बदलाव की मांग की थी ताकि निजी क्षेत्र को बढ़ावा मिल सके।

    उन्होंने कहा कि, अब जब यही मोदी सरकार कर रही है तो पवार इसका विरोध कर रहे हैं। इस पर एनसीपी का कहना है कि जिसमें संशोधन के लिए कहा था वह 2003 में वाजपेयी सरकार का ही लाया गया कानून था। इससे पहले एनसीपी प्रवक्ता ने कहा कि आदर्श APMC कानून 2003 को वाजपेयी सरकार लेकर आई थी। हालांकि कई राज्य उस वक्त इसे लागू करने के मूड में नहीं थे। एनसीपी ने आगे कहा, 'यूपीए सरकार में कृषि मंत्री के रूप में पवार ने एक्ट के कार्यान्वयन के लिए सुझाव आमंत्रित करके राज्य कृषि विपणन बोर्डों के बीच सहमति बनाने की कोशिश की थी।

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