शाहीन बाग : जानें सीएए के विरोध में चल रहे प्रदर्शन का केन्द्र सरकार पर क्यों नहीं पड़ रहा असर
The sit-in protest against the CAA in Shaheen Bagh is not affecting the central government. The main reason for this is the location of Shaheen Bagh. Apart from this, there are many other reasons due to which it is not impacting the central government.
बेंगलुरु। दिल्ली के शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ चंद लोगों द्वारा शुरु किए विरोध-प्रदर्शन में अब हजारों की संख्या में लोग शामिल हो चुके हैं। इसमें अधिकांश महिलाएं धरने पर बैठी हैं। कई औरतें अपने बच्चों को भी साथ यहां धरना कर रही हैं। इन्हीं बच्चों में शामिल चार महीने के मोहम्मद जहान की 30 जनवरी की रात ठंड लगने से मौत हो गयी हैं।

राजनीतिक पार्टियां शाहीन बाग प्रदर्शन को दिल्ली में हो रहे विधानसभा चुनाव में लाभ उठाने के लिए एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप तो कर रही लेकिन यह प्रदर्शन खत्म हो और महिलाएं अपने मासूम बच्चों के साथ घर जाए इसमें किसी की कोई दिलचस्पी नहीं दिख रही। वहीं शाहीन बाग प्रदर्शन से केन्द्र सरकार को भी फर्क नहीं पड़ रहा। ऐसे में ऐसे हालात बनते जा रहे जिसके कारण यह प्रतीत होने लगा है कि यह प्रदर्शन प्रदर्शनकारियों को बंद भी करना पड़ सकता है। जानिए इसकी वजहें क्या है?

प्रदर्शनकारियों द्वारा सड़क जाम कर किया जा रहा प्रदर्शन
बता दें कि आज से लगभग 52 दिन पहले शुरु हुआ प्रदर्शन शुरुआती दिनों में प्रदर्शनकारियों की संख्या कम होने के कारण इतना शांत था कि उस पर पुलिस प्रशासन तक की नजर नहीं पड़ी इसलिए न ही इसे रोका गया और न ही सरकार ने इसको तब्बजों दी। लेकिन चंद दिनों में सीएए को लेकर हो रहे देश भर में केन्द्र सरकार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन के साथ ही इस प्रदर्शन में भी हजारो की संख्या में लोग जुड़ गए। हालात ये हो गए कि प्रर्दशनकारियों ने पूरी सड़क बंद कर दी। जिस कारण यहां के दुकानदारों को अपनी दुकानें बंद करनी पड़ी।

सरकार नहीं व्यापारियों और आम जन को हो रही परेशानी
इस प्रदर्शन के कारण शाहीन बाग की मुख्य सड़क प्रदर्शनकारियों द्वारा कई दिनों से बंद कर हैं। हर दिन हजारों की संख्या में लोग इस प्रदर्शन के कारण सड़क जाम से घंटो जूझ रहे हैं। आसपास की दुकानें बंद हो गईं। लोगों को काम ठप हो गया व्यापारियों को हर दिन लाखों का नुकसान हो रहा है। जिस कारण यहां के व्यापारियों ने पिछले रविवार को इस प्रदर्शन के खिलाफ भी प्रोटेस्ट किया। शुरुआत में चंद लोग आए और नारेबाजी करने लगे। धीरे-धीरे आसपास के करीब 150 लोग वहां पहुंच गए और शाहीन बाग खाली कराने के लिए नारेबाजी शुरू कर दी। कल तक जो लोग शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों को सही बता रहे थे, उनमें से अधिकतर लोग अब ये भी मान रहे हैं कि शाहीन बाग के प्रदर्शन की वजह से वहां के स्थानीय लोगों का जीना मुहाल हो गया है।

सरकार इसीलिए नहीं दे रही तबज्जों
केन्द्र सरकार को भी इसका अंदाजा था कि एक न एक दिन इस प्रदर्शन के खिलाफ लोग सड़कों पर आ जाएंगे और थक हार कर इन प्रदर्शनकारियों को उनको समाने झंडे डालने पड़ सकते हैं। बता दें रविवार को हुए प्रदर्शन में कई महिलाएं शामिल हुई । भले ही शाहीन बाग के प्रदर्शन के खिलाफ राजनीति हो रही है, लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि इस प्रदर्शन की वजह से स्थानीय लोग बहुत परेशान हो गए हैं। खासकर कारोबारी, जिनकी दुकानें नहीं खुल पा रही हैं। वैसे देखा जाए तो इन सबके लिए जिम्मेदार भी खुद शाहीन बाग के प्रदर्शनकारी हैं, जिन्होंने विरोध में शामिल होने से वहां के व्यापारियों और सामान्य लोगों की इस परेशानी के बारे में नहीं सोचा।

प्रदर्शकारियों को शाहीन बाग के बजाय चुननी चाहिए थी ये जगह
डेढ़ महीने से चल रहे इस प्रदर्शन का असर किसी भी नेता या सरकार को इसलिए भी प्रभावित नहीं कर रहा क्योंकि इससे उनका कोई नुकसान नही हो रहा। इससे केवल यहां के स्थानीय जनता प्रभावित हो रही हैं। अगर यही प्रदर्शन जंतर-मंतर में होता तो इससे आम जनता प्रभावित नहीं होती। अगर यही प्रदर्शन संसद के सामने होता तो वहां से पुलिस अब तक इन्हें हटाने के लिए कोशिशें कर चुकी होती या फिर खुद सरकार ने सामने आकर बात करने की कोशिश की होती। अब क्योंकि ये प्रदर्शन शाहीन बाग में है, जहां से सरकार को आना-जाना ही नहीं है तो कोई प्रदर्शनकारियों की सुध नहीं ले रहा है।

प्रदर्शनकारियों की ये गलती उन्हें ही भारी पड़ रही है
इस प्रदर्शन के अभी तक सफल न होने का एक प्रमुख कारण ये भी है कि इन प्रदर्शकारियों की ओर से सरकार के सामने बात करने वाला कोई नहीं हैं। बता दें भाजपा द्वारा पिछले कई दिनों में कई बार यह बात कही जा चुकी है कि वो इस संबंध में बात करें तो किससे करें? यह सरकार का बहाना ही है लेकिन सरकार को यह मौका प्रदर्शनकारियों ने ही दिया हैं। शाहीन बाग के प्रदर्शकारी इस बात पर अड़े हुए है कि जब तक केन्द्र सरकार द्वारा नागरिकता कानून वापस नहीं लिया जाता, तब कोई बातचीत नहीं होगी। अगर जिद अड़े प्रदर्शनकारी अगर आगे बढ़ कर सरकार से इस पर बात करें तो शायद बीच का कोई रास्ता निकलने की गुंजाइश नजर आती। ऐसे में ये ही लगता है कि इन धरनों के पीछे जो राजनीतिक पार्टियां है वो चाहती ही नहीं है कि ये धरना समाप्त हो!

सुप्रीम कोर्ट में प्रदर्शन को हटाने के लिए दाखिल की गयी है दो याचिका
बता दें सुप्रीम कोर्ट के पास शाहीन बाग के प्रदर्शन को हटाने से संबंधित दो याचिका दाखिल की गई है। । मंगलवार को याचिकाकर्ता ने इसकी जल्द सुनवाई का अनुरोध किया। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि इन दिनों लोगो में प्रोटेस्ट करनी की प्रवृति बढ़ गई है। लेकिन इसके लिए गाइड लाइन दी जाए। वकील का कहना है कि इससे आम लोगों की जिंदगी पर असर पड़ता है। और इससे हजारों लोग परेशान हैं ।
वहीं बीजेपी नेता नंद किशोर गर्ग ने अदालत से दिल्ली और नोएडा को जोड़ने वाले अहम मार्ग पर संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ करीब दो महीने से चल रहे प्रदर्शन के कारण लोगों को आ रही समस्या पर गौर करते हुए अपनी याचिका पर तत्काल सुनवाई करने का अनुरोध किया। मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस संबंध में संबद्ध अधिकारी के पास जाने को कहा। उम्मीद है कि जनता को हो रही परेशानियों के चलते कोर्ट जल्द इस प्रदर्शन को सड़क से हटाने का भी आदेश दे सकती है।
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