Seshadri Chari के बहाने तमिलनाडु के चुनावी गणित को साधने में जुटी BJP? PM Modi और संघ ने खेला बड़ा दांव
Seshadri Chari News: जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद से उपराषट्रपति का पद खाली है। इस पोस्ट के लिए कई नामों की चर्चा चल रही है और इस कड़ी में अब एक और नाम शेषाद्रि चारी का जुड़ गया है। तमिलनाडु से ताल्लुक रखने वाले शेषाद्रि चारी का आरएसएस से लंबा जुड़ाव रहा है। संघ के मुखपत्र ऑर्गनाइजर के वह संपादक रह चुके हैं। इसके अलावा, सनातन और हिंदुत्व के मामलों पर उनकी गहरी समझ है और वह अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के भी जानकार हैं। सूत्रों का कहना है कि उनके नाम पर संघ और पीएम मोदी दोनों की सहमति है।
तमिलनाडु की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करने की लगातार कोशिश में जुटी भारतीय जनता पार्टी रणनीतिक तौर पर सधे हुए कदम उठा रही है। प्रदेश की सत्ता में वापसी के लिए एआईएडीएमके (AIADMK) के साथ गठबंधन किया है। माना जा रहा है कि कांग्रेस और डीएमके को घेरने के लिए तमिलनाडु से आने वाले शेषाद्रि चारी को उपराष्ट्रपति बनाकर बीजेपी सधा हुआ दांव चलने के मूड में है।

Seshadri Chari के जरिए तमिलनाडु को बड़ा संदेश
वरिष्ठ विचारक और संघ परिवार से जुड़े रहे शेषाद्रि चारी की सक्रियता को सियासी हलकों में खास संकेत के रूप में देखा जा रहा है। केंद्र की सत्ता में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के बाद भी बीजेपी के लिए तमिलनाडु और केरल जैसे प्रदेश चुनौती बने हुए हैं। दक्षिण भारत विशेषकर तमिलनाडु में अगले साल होने वाले चुनाव से पहले बीजेपी अपना मजबूत आधार बनाना चाहती है।
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2026 के विधानसभा चुनावों से पहले प्रदेश के एक बड़े चेहरे और हिंदुत्व की राजनीति के पैरोकार को संवैधानिक पद देकर वोटर्स के बीच बड़ा सांकेतिक संदेश दे रही है। कांग्रेस और डीएमके के पास भी इस कदम के विरोध और बीजेपी के तर्क को काटने के लिए कोई ठोस आधार नहीं बचेगा।
तमिलनाडु की राजनीति में हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की एंट्री
तमिलनाडु की अब तक की राजनीति का बड़ा केंद्र द्रविड़ आंदोलन और पेरियार की विचारधारा रही है। पिछले कुछ सालों में इसके जवाब में सनातन परंपरा का उभार भी सीमित दायरे में देखने को मिला है। शेषाद्रि चारी न सिर्फ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पुराने चेहरे रहे हैं, बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के समय से संगठनात्मक मजबूती के रणनीतिकार हैं। उन्हें तमिलनाडु की सामाजिक-राजनीतिक बिसात की गहरी समझ है। यही कारण है कि उनकी सक्रिय एंट्री को भाजपा की एक सोची-समझी सोशल इंजीनियरिंग के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है।
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तमिलनाडु के जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश
तमिलनाडु की राजनीति में जाति अहम केंद्र रहा है। पीएम मोदी और संघ फिलहाल मंदिर-संस्कृति-तमिल गौरव जैसे मुद्दों को उभारते हुए हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के साथ विकास की विचारधारा पर जोर दे रहे हैं। संघ और बीजेपी दोनों इस तथ्य को समझते हैं कि सोशल इंजीनियरिंग के बिना प्रदेश की राजनीति में पकड़ बनाना संभव नहीं है। शेषाद्रि चारी तमिल ब्राह्मण हैं। दूसरी ओर दलित गायक इलैया राजा को भी बीजेपी ने ही राज्यसभा में मनोनीत सदस्य के तौर पर भेजा है। इसी तरह से नैनार नागेंद्रन को अन्नामलाई की जगह पर नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है जो प्रभावशाली थेवर जाति से आते हैं। बीजेपी की कोशिश जातीय समीकरणों को भी साधने की है।
कुल मिलाकर बीजेपी अपने इस एक कदम के पीछे लंबे समय के लिए राजनीतिक समीकरण और संभावनाओं को तलाश रही है। सभी पहलुओं को सोचने-समझने के बाद ही संघ और बीजेपी कोई बड़ा फैसला लेंगे, इसमें दो राय नहीं है।












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