कोरोना वैक्सीन: सीरम इंस्टीट्यूट ने शुरू किए तीसरे चरण के ट्रायल, 1600 लोगों को दिए जाएंगे डोज

पुणे। फार्मास्युटिकल कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) से इस महीने की शुरुआत में मंजूरी मिलने के बाद भारतीय फार्मास्युटिकल दिग्गज सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने कोरोनो वायरस वैक्सीन के 2 और 3 चरण के क्लिनिकल ट्रायल की शुरुआत कर दी है। क्लिनिकल ट्रायल रजिस्ट्री इंडिया के अनुसार, अध्ययन का वैज्ञानिक शीर्षक कहता है कि स्वस्थ भारतीय वयस्कों में कोविशिल्ड (COVID-19 वैक्सीन) की सुरक्षा और प्रतिरक्षण क्षमता निर्धारित करने के लिए चरण 2/3 चरण के क्लिनिकल ट्राय़ल में प्रभावों का अध्ययन किया जाएगा।

17 साइटों पर 1600 को दिए जाएंगे डोज

17 साइटों पर 1600 को दिए जाएंगे डोज

इस दवा की क्लिनिकल ट्रायल 18 वर्ष से अधिक या उससे अधिक आयु के कुल 1,600 पात्र प्रतिभागियों पर भारत में 17 अलग-अलग साइटों पर किया जाएगा। इन साइटों में - आंध्र मेडिकल कॉलेज (विशाखापत्तनम), जेएसएस एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च, (मैसूर), सेठ जीएस मेडिकल कॉलेज और केईएम हॉस्पिटल (मुंबई), केईएम हॉस्पिटल रिसर्च सेंटर (वडू), बीजे मेडिकल कॉलेज और ससून जनरल हॉस्पिटल (पुणे), अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जोधपुर), राजेंद्र मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, (पटना), इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन (मद्रास), पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER), भारती विद्यापीठ डीम्ड विश्वविद्यालय मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (पुणे), जहांगीर अस्पताल (पुणे), एम्स (दिल्ली), आईसीएमआर- क्षेत्रीय चिकित्सा अनुसंधान केंद्र (गोरखपुर), टीएन मेडिकल कॉलेज और बीवाईएल नायर अस्पताल (मुंबई), महात्मा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (सेवाग्राम) और गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (नागपुर) शामिल हैं।

 कोविशिल्ड या ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन का हो रहा है ट्रायल

कोविशिल्ड या ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन का हो रहा है ट्रायल

कुल 1,600 योग्य प्रतिभागियों में से 400 प्रतिभागी इम्युनोजेनेसिटी कॉहोर्ट का हिस्सा होंगे। जिसमें 3:1 के अनुपात में कोविशिल्ड या ऑक्सफोर्ड / AZ-ChAdOx1 nCoV-19 के डोज दिए जाएंगे। सुरक्षा कॉहोर्ट में शेष 1,200 प्रतिभागियों को क्रमशः कोविशिल्ड या प्लेसबो के 3:1 के अनुपात में वैक्सीन के डोज दिए जाएंगे। क्लिनिकल ट्रायल रजिस्ट्री इंडिया ने कहा कि कोविशिल्ड को दिन 1 और 29 पर 2 खुराक के रूप में 0.5 मिली इंट्रामस्क्युलर रूप से दिलाई जाएगी। वहीं प्लेसबो को निर्धारित दिनों 1 और 29 पर 2 खुराक के रूप में 0.5 मिली खुराक में इंट्रामस्क्युलर किया जाएगा।

ट्रायल को पूरा होने में कम से कम पांच से छह महीनें का समय लगेगा

ट्रायल को पूरा होने में कम से कम पांच से छह महीनें का समय लगेगा

क्लीनिकल स्टडी दो मानदंडों पर आधारित है - समावेशन और बहिष्करण। शामिल किए जाने के मानदंडों में - 18 वर्ष के या उससे अधिक आयु के स्वस्थ वयस्क अध्ययन में भाग लेंगे। ट्रायल को पूरा होने में कम से कम पांच से छह महीनें का समय लगेगा। कोविड-19 के प्रतिदिन नए मामलों और बीमारी के कारण होने वाली मौत के मामलों में 13 अगस्त से गिरावट देखी गई है। हालांकि, मंत्रालय ने कोई ढिलाई बरते जाने को लेकर चेतावनी दी और कहा कि पांच दिन की गिरावट महामारी के संदर्भ में एक छोटी अवधि है।

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