सियाचिन में शहीद हुए देखिए हनुमनथप्पा के नौ साथियों की तस्वीरें
नई दिल्ली। मद्रास रेंजीमेंट के लांस नायक हनुमनथप्पा आखिरकार जिंदगी की जंग हार गए। छह दिनों तक बर्फ में दबे रहने के बाद उन्हें मंगलवार को सियाचिन गई इंडियन आर्मी की रेस्क्यू टीम ने जिंदा निकाला था। काफी कोशिशों के बाद
भी उन्हें बचाया नहीं जा सका।
इंडियन आर्मी ने भेजी थी 200 लोगों की रेस्क्यू टीम
तीन फरवरी को सियाचिन में आए बर्फीले तूफान में सिर्फ लांस नायक हनुमनथप्पा ही नहीं बल्कि उनके नौ और साथी भी दब गए थे। लेकिन उन नौ सैनिकों और उनके परिवार की तकलीफों का दर्द शायद बाकी लोग नहीं समझ नहीं पा रहे हैं।
यह देखकर शायद हनुमनथप्पा की आत्मा को भी तकलीफ होगी। एक सैनिक को पहले अपने साथी की चिंता होती है। उसके बाद वह खुद के बारे में सोचता है।
सियाचिन की अहमियत
इस बात को ही ध्यान में रखकर ही हम हनुमनथप्पा के उन बाकी नौ साथियों को भी श्रद्धांजलि देंगे जो उस बर्फीले तूफान का शिकार बन काल के गाल में समा गए थे। आगे की स्लाइड्स में देखिए उन सभी नौ लोगों की फोटोग्राफ्स।

कर्नाटक के सूबेदार नागेश
42 वर्षीय सूबेदार नागेश टीटी कर्नाटक के हासन जिला के तहत आने वाले तेजूर गांव के रहने वाले थे। उनका नौ वर्ष का बेटा अमित अपने पापा की कॉल का इंतजार कर रहा था लेकिन वह न तो तीन फरवरी को आई और न कभी आएगी। अमित की नजरें एक सेकेंड भी मोबाइल से नहीं हट रही थीं।

हवलदार इलुमलाई एम
हवलदार इलुमलाई भी सियाचिन में शहीद हो गए हैं। वह तमिलनाडु के वेल्लोर जिले के दुक्कम पराई गांव के रहने वाले थे।

लांस हवलदार एस कुमार
एक कुमार भी तमिलनाडु के टेनी जिला के गांव कुमानन थेजु के निवासी थे।

लांस नायक सुधीश बी
गांव- मोरोईथुरूथ, जिला- कोल्लम, केरल।

सिपाही नर्सिंग सहायक सूर्यवंशी एसवी
गांव- मसकरवाड़ी, जिला-सतारा, महाराष्ट्र

सिपाही महेश पीएन
गांव- एचडी कोते, जिला- मैसूर, कर्नाटक।

सिपाही गणेशन जी
गांव- चोक्काथेवन पट्टी, जिला-मदुरै, तमिलनाडु।

सिपाही राम मूर्ति
गांव- गुडीसतना पल्ली, जिला- कृष्णा गिरि, तमिलनाडु।

सिपाही मुश्ताक अहमद एस
गांव-परनापल्ले, जिला-कुरनूल, आंध्र प्रदेश।












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