6 साल में दूसरा मौका जब सबसे स्वच्छ रही दिल्ली, जानिए क्या कहते हैं आंकड़े
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक में साल 2022 दूसरा मौका था जब दिल्ली की एयर क्लालिटी में सबसे अधिक सुधार देखा गया।

Delhi pollution data: दिल्ली और एनसीआर के लिए बीता साल कुछ मायने में खास रहा। साल 2022 में राष्ट्रीय राजधानी और एनसीआर की हवा सबसे अधिक स्वच्छ रही। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों को लेकर ये तथ्य सामने आए हैं कि पिछले 6 वर्षों में ये दूसरा मौका था जब दिल्ली स्वच्छ दिखी। हालांकि अधिकांश दिनों में दिल्ली की हवा जहरीली बनी रही। दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए ऐसा मौका बहुत कम आता है जब यहां का औसत पीएम 2.5 लेबल 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पाया गया हो।

साल 2017 में स्वच्छ हई थी हवा
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक साल 2022 में 2017 के बाद दूसरा मौका था जब दिल्ली का वार्षिक औसत PM 2.5 डेंसिटी से 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से नीचे गिरा। इस स्तर पर हवा में सुधार के बाद पिछले छह वर्षों में दूसरा सबसे स्वच्छ वर्ष बना। हालांकि बोर्ड ने कहा कि से हवा में प्रदूषण का स्तर कुछ समय के सुधरा।

CPCB ने जारी किए आंकड़े
2022 का औसत 40 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा। जो कि एयर क्वालिकटी मानक से 2.5 गुना अधिक था। ये विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा तय की गई सीमा से 5 से 20 गुना अधिक तक पहुंचा। 2022 में दिल्ली का PM2.5 स्तर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार 99.7 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था। जो कि 2020 में दर्ज किए गए औसत 99 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक था। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CRIA) के विश्लेषक सुनील दहिया ने कहा, "हालांकि दिल्ली की हवा साफ नहीं है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में किए गए प्रयासों और अनुकूल मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण वार्षिक एकाग्रता में कमी आई है।"

मौसम की स्थिति से सुधरा एक्यूआई स्तर
पिछले साल दिल्ली की एयर क्वालिटी में 8% सुधार दर्ज किया। जब वार्षिक औसत PM2.5 107.8 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था। CPCB के आंकड़ों के अनुसार, औसत वार्षिक PM2.5 का स्तर 2017 से 2019 तक 100 माइक्रोग्राम / क्यूबिक मीटर से ऊपर था, जो कि 2020 में एक मामूली गिरावट के बाद 2021 में फिर से बढ़ा।

एयर का PM लेवल
पीएम लेवल यानी पर्टिकुलेट मैटर लेवल। इसका मतलब हवा में कितने पर्टिकुलेट मैटर मिक्स हैं। पर्टिकुलेट मैटर का स्तर बढ़ने के साथ एयर क्वालिटी की खराब होती जाती है। पीएम 10 को पर्टिकुलेट मैटर कहते हैं। इन कणों का साइज 10 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास होता है। इसमें धूल, गर्दा और धातु के सूक्ष्म कण शामिल होते हैं। पीएम 10 और 2.5 धूल, कंस्ट्रक्शन और कूड़ा व पराली जलाने से अधिक बढ़ते हैं।
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