साल दर साल बढ़ रहा समुद्र का जलस्तर, भारत को इस खतरे का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए- मौसम विज्ञानी
समुद्र के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए मौसम वैज्ञानिकों ने भारत को आने वाले खतरे से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा है।
नई दिल्ली, 23 नवंबर। धरती का तापमान गर्म होने के कारण ग्लेशियरों के पिघलने की वजह से समुद्रों का जलस्तर बढ़ता जा रहा है। हिंद महासागर में लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए मौसम वैज्ञानिकों ने भारत को इस खतरे से निपटने के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी है।

26 मई को उत्तरी ओडिशा के तट पर जो यास चक्रवात आया था उसका समुद्र स्तर 17 मई को गुजरात के तट को पार करने वाले चक्रवाती तूफान तौकते की तुलना में काफी अधिक दर्ज किया गया। इसका मतलब साफ है कि समुद्र के जलस्तर बढ़ने की घटनाएं दिन प्रतिदिन, साल दर साल बढ़ती जा रही हैं। भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान में एक जलवायु वैज्ञानिक और जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल के सह-लेखक स्वप्ना पनिकल ने अगस्त में जारी 'द फिजिकल साइंस बेसिस' में कहा कि यह मुख्य रूप से ज्वार, स्थलाकृति और औसत समुद्र के स्तर के कारण है, जो समुद्र के चरम स्तर की घटनाओं की संभावना को निर्धारित करता है।
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पनिकल ने बदलते जलवायु पर उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान पर चल रहे अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में अपनी प्रस्तुति के दौरान कहा कि 1870 के बाद के समुद्र स्तर के आंकड़े दिखाते हैं कि ये घटनाएं मुंबई तट पर भी बढ़ रही हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि समुद्र के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए भारत के तटीय इलाकों को और बेहतर तरीके से तैयार करने की आवश्यकता है। रिपोर्ट के अनुसार 1870 और 2000 के बीच, वैश्विक औसत समुद्र स्तर में प्रति वर्ष 1.8 मिमी की वृद्धि हुई जो 1993 से 2017 की अवधि के दौरान लगभग दोगुनी होकर 3.3 मिमी प्रति वर्ष हो गई। पनिकल ने कहा कि जैसे-2 गर्मी बढ़ती है समुद्र का पानी फैलता है, ग्लेशियरों के पिघलने से भी समुद्र के जलस्तर में वृद्धि होती है।
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उन्होंने कहा कि वैश्विक औसत समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है, अरब सागर सहित हिंद महासागर के जलस्तर के भी बढ़ने का अनुमान है। 2050 तक, हिंद महासागर क्षेत्र में भी समुद्र के स्तर में 15 से 20 सेमी की वृद्धि होने की उम्मीद है और यह बेहद चिंता का विषय है। उन्होंने कहा की भारत को इन सब खतरों से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए।












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