गौरी लंकेश हत्याकांड: 'आरोपी' की जमानत याचिका पर फैसले से पहले SC ने कर्नाटक HC से कही ये बात
नई दिल्ली, 03 जुलाई। कार्यकर्ता एवं पत्रकार गौरी लंकेश हत्याकांड को 3 साल से भी अधिक समय बीत चुका है लेकिन अभी भी मामला कर्नाटक हाई कोर्ट में है। आरोपी मोहन नायक के खिलाफ संगठित आपराध के आरोपों को खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए गौरी लंकेश की बहन कविता लंकेश ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की, जिस पर आज न्यायालय ने सुनवाई की। मामले की सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक सरकार से जवाब मांगा है।
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शनिवार को कविता लंकेश की याचिका पर न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर की अगुवाई वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने सुनवाई की। न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस भी इस पीठ का हिस्सा थे। पीठ ने आरोपी मोहन नायक की जमानत याचिका पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कर्नाटक हाई कोर्ट आरोपी नायक के आरोप खारिज करने के आदेश से प्रभावित हुए बिना उसकी जमानत याचिका पर कोई फैसला करे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कर्नाटक सरकार और अन्य के खिलाफ नोटिस भी जारी किया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने अपने नोटिस में कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार और अन्य से जवाब मांगा है। पीठ ने कहा कि अंतरिम राहत के लिए प्रार्थना और विशेष अनुमति याचिका दायर करने की अनुमति मांगने वाले आवेदकों के खिलाफ भी नोटिस जारी किया जाए। पीठ ने कहा कि आरोपी के वकील की दलीलें सुनने के बाद हमारा मानना है कि हाई कोर्ट में दायर उसकी जमानत याचिका पर उस फैसले से प्रभावित हुए बिना फैसला सुनाया जाए, जिसे कविता लंकेश द्वारा चुनौती दी गई है। आपको बता दें कि 5 सितंबर, 2017 को कार्यकर्ता एवं पत्रकार गौरी लंकेश की बेंगलुरु में उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।












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