UGC Equity Regulations 2026 पर SC की रोक! राजभर बोले-‘अदालत के फैसले पर सवाल नहीं’,अखिलेश ने क्या कहा?
SC Stay on UGC equity Regulations 2026: सुप्रीम कोर्ट द्वारा UGC रेगुलेशंस 2026 पर अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद देश की राजनीति में प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। जहां कुछ नेताओं ने अदालत के फैसले का सम्मान करते हुए इसे संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया।
वहीं कई दलों ने इस मुद्दे पर सतर्क टिप्पणी करते हुए अंतिम फैसले का इंतजार करने की बात कही है। इस पूरे मामले ने शिक्षा में समानता, भेदभाव और संवैधानिक अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

OP Rajbhar on SC Order: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ओपी राजभर का बयान
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का खुलकर समर्थन करते हुए कहा कि न्यायालय के फैसले पर सवाल उठाना किसी के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। ओपी राजभर ने कहा, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कोई उंगली नहीं उठा सकता। आज सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई है। हर किसी को सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रखने का अधिकार है। राज्य और केंद्र सरकार संविधान के अनुसार काम कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में न्यायपालिका की भूमिका सर्वोपरि है और सरकारें अदालत के निर्देशों का सम्मान करती हैं।
Balmukund Acharya On SC Stay Order: बीजेपी विधायक बालमुकुंद आचार्य: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर टिप्पणी ठीक नहीं
जयपुर से बीजेपी विधायक बालमुकुंद आचार्य ने भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए संयम बरतने की बात कही। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर टिप्पणी करना ठीक नहीं है। साथ ही मुझे मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार पर पूरा भरोसा है। मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद देश में सर्वांगीण विकास हुआ है। बालमुकुंद आचार्य ने यह भी दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में भेदभाव को खत्म कर सभी वर्गों का विश्वास जीता है, और सरकार का उद्देश्य सबका साथ, सबका विकास है।
Akhilesh Yadav on UGC Bill: अखिलेश बोले- किसी के साथ अन्याय न हो
UGC रेगुलेशंस 2026 पर सुप्रीम कोर्ट की रोक को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने न्याय और निष्पक्षता की बात कही। अखिलेश यादव ने कहा, हम सब मानते हैं कि दोषियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए और निर्दोष लोगों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। उनका बयान इस ओर इशारा करता है कि किसी भी कानून या नियम का उद्देश्य न्याय सुनिश्चित करना होना चाहिए, न कि किसी वर्ग विशेष को नुकसान पहुंचाना।
तमिलनाडु में DMK की प्रतिक्रिया: यह अंतरिम दौर है
तमिलनाडु में सत्तारूढ़ डीएमके के वरिष्ठ नेता टीकेएस एलंगोवन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को एक अंतरिम चरण बताते हुए अंतिम निर्णय का इंतजार करने की बात कही। उन्होंने कहा, यह एक अंतरिम स्थिति है, देखते हैं आगे क्या होता है। लोगों की राय अलग-अलग हो सकती है, लेकिन जज के सामने रखे गए तर्क सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं। एलंगोवन ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी संवैधानिक मुद्दे पर भावनाओं से ज्यादा कानूनी तर्क और न्यायिक विवेचना निर्णायक होती है।
UGC Equity Regulations 2026 क्या है पूरा मामला?
UGC एक नया बिल 2026 लेकर आया है जो 2012 से अलग है। इस में 4 नए नियम जोड़े गए हैं और इसी नियम को लेकर विरोध हो रहा है। आरोप है कि ये नियम भेदभाव विरोधी तंत्र को सीमित दायरे में परिभाषित करते हैं, जिससे शिक्षा संस्थानों में समानता के सिद्धांत पर असर पड़ सकता है।
इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों के प्रवर्तन पर रोक लगाते हुए 2012 के पुराने नियमों को फिलहाल लागू रखने का निर्देश दिया है। दिलचस्प बात यह है कि अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं की राय भले ही अलग हो, लेकिन सभी ने एक स्वर में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करने की बात कही है। यह दिखाता है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर फिलहाल राजनीतिक दल अंतिम फैसले से पहले न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा जता रहे हैं।
अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें?
अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि UGC रेगुलेशंस 2026 में संशोधन होगा या उन्हें पूरी तरह से दोबारा तैयार किया जाएगा। यह फैसला न सिर्फ उच्च शिक्षा व्यवस्था, बल्कि संविधान में निहित समानता और न्याय के सिद्धांतों की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।
UGC 2026 नियमों पर लगी रोक ने एक बार फिर 'जाति आधारित सुरक्षा' बनाम 'समान सुरक्षा' की बहस को जन्म दे दिया है। जहां विपक्ष इसे दलित और पिछड़े वर्गों के अधिकारों से जोड़कर देख रहा है, वहीं सत्तापक्ष इसे न्यायिक प्रक्रिया और व्यापक विकास के नजरिए से पेश कर रहा है।












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