सुप्रीम कोर्ट का सोनिया के मुंह पर 'संवैधानिक तमाचा', जाट आरक्षण रद्द
नयी दिल्ली (ब्यूरो)। जाट को समुदाय को पिछड़ा माने जाने के केंद्र सरकार के मत पर असहमति जताते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को तत्कालीन मनमोहन सिंह द्वारा 4 मार्च, 2014 को जारी उस अधिसूचना को रद्द कर दिया। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सोनिया गांधी के मुंह पर संवैधानिक तमाचा है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र का फैसला दशकों पुराने आंकड़ों पर आधारित है और आरक्षण के लिए पिछड़ेपन का आधार सामाजिक होना चाहिए, न कि आर्थिक या शैक्षणिक। उल्लेखनीय है कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने शिक्षा और सरकारी नौकरियों में जाटों को लाभ देने के लिए उन्हें ओबीसी के तहत आरक्षण देने का प्रावधान किया था।

तत्कालीन संप्रग सकार ने इस मामले में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) की अनुशंसा की अनदेखी करते हुए यह अधिसूचना जारी की थी। न्यायमूर्ति गोगोई ने आदेश पारित करते हुए कहा, "जाट जैसे राजनीतिक रूप से संगठित वर्ग को आरक्षण के हकदारों की श्रेणी में शामिल करने की पुष्टि नहीं की जा सकती।"












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