सुप्रीम कोर्ट ने कहा- बेटी अगर पिता से कोई रिश्‍ता नहीं रखती तो खर्च की हकदार नहीं

नई दिल्ली,17 मार्च: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि अगर बेटी अपने पिता के साथ कोई रिश्‍ता नहीं रखती है तो वह अपने पिता से किसी भी खर्च की हकदार नहीं होगी।

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सुप्रीम कोर्ट जस्टिस संजय किशन कौल और एमएम सुंदरेश की बेंच ने दोनों पक्षों के बीच विवाह के टूटने के कारण एक जोड़े को तलाक का फरमान सुनाते हुए ये फैसला सुनाया।का फरमान सुनाते हुए फैसला सुनाया।

शीर्ष अदालत ने पति को सभी दावों के पूर्ण और अंतिम निपटान के रूप में 10 लाख रुपये की लागत जमा करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही यह कहा यह राशि दो महीने के भीतर इस न्यायालय में जमा की जानी है और अपीलकर्ता की अलग हुई पत्नी को जारी कर दी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि जमा की तारीख से एक महीने की अवधि के लिए राशि की मांग नहीं की जाती है, तो इसे 91 दिनों की अवधि के लिए एफडीआर अर्जित ब्याज में रखा जाएगा, जिसे नवीनीकृत रखा जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जहां तक ​​बेटी की शिक्षा और शादी के खर्च का सवाल है, तो उसकी बातों से ऐसा प्रतीत होता है कि वह अपीलकर्ता के साथ कोई संबंध नहीं रखना चाहती और उसकी उम्र लगभग 20 वर्ष है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा वह अपना रास्ता खुद चुनने की हकदार है, लेकिन फिर अपीलकर्ता से शिक्षा के लिए राशि की मांग नहीं कर सकती है। इस प्रकार, हम मानते हैं कि बेटी किसी भी राशि की हकदार नहीं है, लेकिन प्रतिवादी को स्थायी गुजारा भत्ता के रूप में भुगतान की जाने वाली राशि का निर्धारण करते समय, हम अभी भी इस बात का ध्यान रख रहे हैं कि यदि प्रतिवादी बेटी का समर्थन करना चाहता है, तो विकल्‍प उपलब्ध है।

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