'सुप्रीम कोर्ट सिर्फ दिल्ली के नजदीक रहने वालों के लिए नहीं है'- मद्रास HC के एक जज ने केंद्र से की यह मांग
चेन्नई, 8 सितंबर: मद्रास हाई कोर्ट के एक जज ने सुप्रीम कोर्ट के रीजनल बेंच को लेकर केंद्र से बहुत बड़ी मांग कर दी है। उन्होंने केंद्र सरकार से कहा है कि संविधान में संशोधन करके सर्वोच्च अदालत की क्षेत्रीय पीठों का गठन किया जाए। मद्रास हाई कोर्ट के न्यायधीश जस्टिस एन किरुबाकरण ने कहा है कि सिर्फ नई दिल्ली के आसपास अदालतें और ट्रिब्यूनल होने से दिल्ली से दूर रहने वाले लोगों के साथ अन्याय हो जाता है। उन्होंने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट सिर्फ दिल्ली के पास रहने वाले लोगों के लिए ही नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के रीजनल बेंच गठित करने की मांग
मद्रास हाई कोर्ट के एक जज जस्टिस एन किरुबाकरण ने हाल ही में टिप्पणी की है कि, 'सिर्फ नई दिल्ली में ही कोर्ट और ट्रिब्यूनल होने से, रीजनल बेंचों के बिना, नई दिल्ली से काफी दूर रहने वाले लोगों के साथ अन्याय हो जाता है।' जज ने कहा कि आंकड़ों के हिसाब से सिर्फ वह अदालतें जो सुप्रीम कोर्ट के आसपास हैं, वहां के मुकदमों के सिलसिले में ही सर्वोच्च अदालत में केस या अपील दर्ज हो पाते हैं, लेकिन जो भारतीय वहां से काफी दूर है, उसके लिए 'न्याय के महान गढ़' तक पहुंच पाना असंभव हो जाता है। न्यायधीश की यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि न्याय की सही भावना के तहत सुप्रीम कोर्ट के रीजनल बेंचों की मांग लंबे समय से की जाती रही है।(तस्वीरें सौजन्य: मद्रास हाई कोर्ट)
'कोर्ट को केंद्र सरकार से कुछ कार्रवाई की उम्मीद है'
जस्टिस किरुबाकरण ने कहा, 'ऐसी धारणा नहीं बननी चाहिए कि माननीय सुप्रीम कोर्ट सिर्फ नई दिल्ली और उसके आसपास रहने वाले लोगों या नई दिल्ली के आसपास के राज्यों के लिए है। भारत एक बहुत विशाल महाद्वीप है, उत्तर में जम्मू और कश्मीर से लेकर दक्षिण में तमिलनाडु और पश्चिम में गुजरात से लेकर पूरब में मणिपुर तक।' इस आधार पर उन्होंने केंद्र सरकार से कहा है कि वह इस स्थिति में सुधार के लिए अपने विवेक का फौरन इस्तेमाल करे, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के रीजनल बेंचों की स्थापना के लिए संविधान संशोधन शामिल है, जिसको लेकर भारत के विभिन्न विधि आयोगों और संसदीय समितियों ने सिफारिशें की हैं। अदालत ने कहा कि 'ये टिप्पणियां अंधेरे में विलाप के रूप में या अप्रासंगिक बात के लिए नहीं की जा रही हैं। इस कोर्ट को केंद्र सरकार से कुछ कार्रवाई की उम्मीद है।'
सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाने की भी मांग
अदालत ने यह भी नजरिया जाहिर किया है कि सुप्रीम कोर्ट के 34 जज ही काफी नहीं है और इनकी संख्या और बढ़ाई जानी चाहिए। ये टिप्पणियां 19 अगस्त को जारी हुए एक आदेश में की गई हैं, जो जस्टिस किरुबाकरण ने अपनी रिटायरमेंट के एक दिन पहले सुनाया था, लेकिन इसे मंगलवार को अपलोड किया गया है।
दरअसल, कार्तिक रंगनाथ नाम के एक व्यक्ति ने एक याचिका दायर की थी कि वह दिल्ली स्थित बार काउंसिल ऑफ इंडिया से संपर्क करने में असमर्थ हैं। वह उनके खिलाफ चेन्नई स्थित बार काउंसिल ऑफ तमिलनाडु एंड पुडुचेरी की ओर से जारी एक आदेश के खिलाफ अपील करना चाहते हैं। इस मामले की सुनवाई जस्टिस एन किरुबाकरण और जस्टिस आर पोंगिअप्पन की खंडपीठ ने की थी। याचिकाकर्ता ने अपनी रिट याचिका में चेन्नई से दिल्ली की 2,186 किलोमीटर की दूरी का हवाला दिया था।












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