चुनावी राज्यों में भाजपा के खिलाफ लड़ रहीं पार्टियों के समर्थन में वोट मांगेंगे किसान- संयुक्त किसान मोर्चा

किसान नेताओं के संगठनों ने बुधवार को कहा कि उनके नेता विधानसभा चुनावों से गुजरने वाले राज्यों में जाएंगे और भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ रहीं पार्टियों के समर्थन में वोट मांगेंगे।

नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ लंबे समय से आंदोलन कर रहे किसान नेताओं के संगठनों ने बुधवार को कहा कि उनके नेता विधानसभा चुनावों से गुजरने वाले राज्यों में जाएंगे और भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ रहीं पार्टियों के समर्थन में वोट मांगेंगे। किसानों की प्रमुख समिति संयुक्त किसान मोर्चा ने किसानों के प्रति समर्थन जुटाने के लिए पूरे भारत में 'एमएसपी दिलाओ आंदोलन' चलाने का ऐलान किया है।

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    Balbir Singh Rajewal

    न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद की कानूनी गारंटी के लिए चलाए जाने वाले इस अभियान की शुरूआत दक्षिण भारतीय राज्यों कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना से की जाएगी, इसके बाद इसे अन्य राज्यों तक ले जाया जाएगा। भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के नेता बलवीर सिंह राजेवाल ने कहा, 'हम हाल ही में चुनावों से गुजरने वाले राज्यों जैसे बंगाल और केरल में अपने सदस्य भेजेंगे। हम किसी भी पार्टी का समर्थन नहीं करेंगे, लेकिन किसानों के प्रति भाजपा के रवैए को देखते हुए हम लोगों से अपील करेंगे कि वो ऐसे व्यक्ति को वोट दें जो भाजपा को हरा सके।'

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    इस बारे में और अधिक जानकारी देते हुए स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने कहा, '12 मार्च से कोलकाता में होने वाली सार्वजनिक बैठक के साथ इस आंदोलन की शुरूआत हो जाएगी। हम लोगों से अपील करेंगी कि वो भाजपा और इसकी सहयोगी पार्टियों को किसान विरोधी कानून लाने की सजा दें।' केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ लंबे समय से आंदोलन कर रहे किसान नेताओं के संगठनों ने मंगलवार को कहा उनके नेता विधानसभा चुनावों से गुजरने वाले राज्यों में जाएंगे और भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ रहीं पार्टियों के समर्थन में वोट मांगेंगे।

    संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधि तमिलनाडु और असम जैसे चुनावी राज्यों का भी दौरा करेंगे लेकिन उनका ध्यान पश्चिम बंगाल और केरल पर ज्यादा केंद्रित है जहां वह अखिल भारतीय किसान सभा से जुड़े वामपंथी दलों की मदद से इस आंदोलन के समर्थन में ज्यादा लोगों जनसमर्थन जुटा सकते हैं। संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि वह 10 प्रमुख केंद्रीय ट्रेय यूनियनों के साथ मिलकर 15 मार्च को निजीकरण विरोधी दिवस मनाएगा। वहीं, योगेंद्र यादव ने कहा कि यह तय किया गया है कि किसान और मजदूर मिलकर इस लड़ाई को लड़ेंगे। उन्होंने आगे कहा कि हम 15 मार्च को निजीकरण और निगमीकरण के खिलाफ देश भर में सड़कों पर उतरेंगे।

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