Samosa and Cigarette: क्या समोसा-जलेबी खाना सिगरेट पीने जितना जानलेवा? फैक्ट चेक में पकड़ा झूठ
Samosa and Cigarette: जरा सोचिए की समोसे-जलेबी की दुकानों पर सिगरेट की तर्ज पर वैधानिक चेतावनी वाला फोटो लगा हो और आपको ये नाश्ता जानलेवा बताया जा रहा हो। ये असल में होने वाला है।दरअसल, स्वास्थ्य मंत्रालय ने देशभर के सभी केंद्रीय संस्थानों, जिनमें नागपुर का AIIMS भी शामिल है, को निर्देश दिया है कि वे 'ऑयल और शुगर बोर्ड' लगाएं, जिन पर आपके नाश्ते में छिपे हुए फैट और शुगर की मात्रा साफ-साफ लिखी हो। इसे जंक फूड को तंबाकू जैसे गंभीर खतरे के रूप में देखने की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है। लेकिन जब इसकी पड़ताल की गई तो मामला कुछ और ही निकला।
फैक्ट चेक में पकड़ा झूठ
जब इस मामले की हमने पड़ताल की तो एक चौकाने वाली बात सामने आई। दरअसल किसी भी सरकारी संस्थान या बोर्ड ने इस तरह का कोई आदेश या निर्देश जारी नहीं किया है। हर जगह जाकर जब इस मामले में पूछताछ की तो पता चला कि ये सिर्फ सोशल मीडिया के जरिए फैलाया गया एक झूठ मात्र है। हालांकि ये बात अलग है कि यदि इन खाद्य सामग्रियों की जांच हो तो इनमें से कितने सही निकलेंगे।

AIIMS नागपुर का आया था नाम!
वायरल पोस्ट में दावा किया गया कि AIIMS नागपुर के अधिकारियों ने इस निर्देश की पुष्टि की है। अब कैफेटेरिया और सार्वजनिक जगहों पर ऐसे चेतावनी बोर्ड लगाए जाएंगे। सिर्फ समोसा और जलेबी ही नहीं बल्कि जांच के दायरे में अब लड्डू, वड़ा पाव और पकौड़े भी होंगे। यही नहीं इसमें कार्डियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया की नागपुर शाखा के अध्यक्ष डॉ. अमर आमले के हवाले से छापा गया कि , 'यह शुरुआत है उस दौर की जब खाने की लेबलिंग उतनी ही गंभीर होगी जितनी सिगरेट की चेतावनी। शुगर और ट्रांस फैट अब इस पीढ़ी के तंबाकू हैं। इसलिए लोगों को यह जानने का अधिकार है कि वे क्या खा रहे हैं।' लेकिन जब वनइंडिया ने AIIMS नागपुर में बात की तो पता चला इस तरह का कोई बयान उन्होंने नहीं दिया है।
मोटापे की बीमारी भारत के लिए समस्या
ये बात और है कि भारत में बढ़ता मोटापा समस्या बनता जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंतरिक दस्तावेज में देश में बढ़ते मोटापे पर गंभीर चिंता जताई गई है। अनुमान है कि 2050 तक भारत में 44.9 करोड़ लोग मोटापे या अधिक वजन से ग्रस्त होंगे- जो इसे अमेरिका के बाद दूसरा सबसे प्रभावित देश बना देगा। मतलब, देश की लगभग आधी आबादी मोटापे जैसी खतरनाक बीमारी की चपेट में होगी। ये तो हो गया भविष्य का आंकलन, अब वर्तमान स्थिति भी जान लीजिए। फिलहाल, हर पांच में से एक शहरी वयस्क मोटापे का शिकार है। इनमें बच्चें भी शामिल हैं, बच्चों में बढ़ता मोटापा, गलत खानपान और घटती शारीरिक गतिविधियों की वजह से चिंता और भी ज्यादा बढ़ती जा रही है।
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