'संभल जामा मस्जिद परिसर में अवैध निर्माण, बदला गया मूल स्वरूप ', ASI ने कोर्ट में क्या- क्या कहा?
यूपी के संभल में जामा मस्जिद में पुरातात्विक सर्वेक्षण के विरोध में हिंसक घटना के बाद कोर्ट में एएसआई ने बड़ी बात कही है। आदालत में अपने सब्मिशन में एएसआई ने कोर्ट को बताया कि मस्जिद परिसर में प्राचीन इमारतों और पुरातात्विक अवशेषों के संरक्षण अधिनियम 1958 के प्रावधानों पूरी तरह से उल्लंघन हो रहा है। जांच एजेंसी ने दावा किया कि संभल की जामा मस्जिद परिसर के अंदर अवैध निर्माण कर धार्मिक स्थल का मूल स्वरूप ही बदल दिया गया है।
संभल की मस्जिद में एएसआई को सर्वेक्षण की अनुमति कोर्ट ने प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत दिया था। लेकिन इसका स्थल पर विरोध कर रहे कुछ लोग हिंसक हो गए। उपद्रव के दौरान जमकर पथराव हुआ। इस दौरान तीन लोगों की मौत हो गई। जिसके बाद इलाके में तनाव बढ़ गया था। स्थिति को देखते हुए इलाके में भारी सुरक्षाबलों की तैनाती की गई।

शाही जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर मामले में शुक्रवार को जिला अदालत में सुनवाई हुई। इस दौरान मामले में प्रतिवादी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने भी अपना लिखित हलफनामा दाखिल किया। जिसमें एएसआई की ओर से अधिवक्ता विष्णु शर्मा द्वारा पेश किए गए जवाब में जामा मस्जिद के केंद्रीय संरक्षित स्मारक होने का उल्लेख किया गया है। इसमें यह भी बताया गया है कि वर्ष 1920 से विवादित स्थल एएसआई के संरक्षण में था। एएसआई द्वारा कहा गया है कि मस्जिद की संरचना में फेरबदल किया गया है।
बता दें कि केंद्र सरकार ने 1958 के कानून के अंतर्गत 3600 से ज्यादा स्मारकों और स्थलों को राष्ट्रीय महत्व का घोषित किया है जिनमें से एक संभल की जामा मस्जिद भी है। एएसआई के अनुसार, जब किसी प्राचीन स्मारक को राष्ट्रीय महत्व का घोषित किए जाने पर उसे संरक्षित स्मारक कहा जाता है। वहीं अब संभल की जामा मस्जिद को बड़ा दावा किया जा रहा है।












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