एस जयशंकर बोले- नए दौर में जा रहे अंतरराष्ट्रीय संबंध, इंडो-पैसिफिक रीजन में दिखेगा खास असर
विदेश मंत्री एस जयशंकर बोले- नए दौर में जा रहे अंतरराष्ट्रीय संबंध, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र क दिखेगा खास प्रभाव
नई दिल्ली, 6 सितंबर: भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि दुनियाभर में अंतरराष्ट्रीय संबंध एक नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं। कई पुराने सिद्धांत अब फेल हो रहे हैं और नई चीजें सामने आ रही हैं। जयशंकर ने हिंद- प्रशांत क्षेत्र और चीन का विशेष तौर पर नाम लिया। सोमवार को ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी में जेजी क्रॉफर्ड ओरेशन 2021 में अपने संबोधन में भारतीय विदेश मंत्री ने ये बातें कही हैं।

विदेश मंत्री एस जयशंकर वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों और कोरोनो महामारी से बढ़ते आर्थिक और मानवीय संकट के बीच इंडो-पैसेफिक पर भारत और भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों पर भारत के दृष्टिकोण पर बोल रहे थे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, दुनिया अंतरराष्ट्रीय संबंधों के नए चरण में प्रवेश कर रही है। एकपक्षवाद के दिन खत्म हो गए हैं, द्विपक्षीयता की अपनी सीमाएं हैं तो बहुपक्षवाद भी नाकाफी साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वक्त में हम वैश्विक दबदबे के लिहाज से देखें तो अमेरिका एक मजबूत शक्ति के तौर पर संघर्ष कर रहा है और आने वाले नए दौर में चीन के फिर से उभरने का प्रभाव प्रमुख वैश्विक ताकतों की तुलना में अधिक महसूस किया जाएगा।
भारत-चीन संबंधों को लेकर पूर्व पीएम राजीव गांधी का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा, सन 1988 में उस समय के हमारे प्रधानमंत्री राजीव गांधी चीन गए थे। हमारे संबंध इस तथ्य पर आधारित थे कि सीमा पर शांति होगी। दोनों देश विभिन्न समझौतों के जरिए इस पर आगे भी बढ़े जिससे विश्वास पैदा हुआ। इसमें कहा गया था कि दोनों ही देश अपनी सेनाओं को सीमा पर नहीं लाएंगे। फिर भी हमने पिछले साल एक बड़ी बड़ी घटना देखी। पिछले साल बिना किसी वजह के सीमा पर बहुत बड़ी मात्रा में चीनी सेना आ गई थी। इसके बाद जून में एक बहुत हिंसक झड़प हुई, जिसने द्विपक्षीय संबंधों पर गहरा असर डाला। मुझे लगता है कि भारत और चीन के संबंधों को कैसे पटरी पर लाया जाए, ये इस समय की एक चुनौती है।












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