विदेशी पत्रकार की एस जयशंकर ने की बोलती बंद, शिवसेना प्रवक्ता चतुर्वदी भी हुईं मुरीद
नई दिल्ली, 12 अप्रैल। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के बीच भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अमेरिका के दौरे पर हैं। भारत रूस से तेल का आयात कर रहा है, जिसको लेकर पश्चिमी देश और वहां का मीडिया लगातार भारत पर निशाना साध रहा है। टू प्लस टू मंत्रियों के साथ अमेरिका में बैठक के बाद जब प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकार ने भारत द्वारा रूस से ईंधन के आयात को लेकर सवाल किया तो विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ऐसा जवाब दिया जिसकी हर तरफ तारीफ हो रही है। यहां तक कि मोदी सरकार के विरोधी भी विदेश मंत्री के जवाब की तारीफ कर रहे हैं।

जयशंकर के जवाब की हो रही तारीफ
एस जयशंकर से जब प्रेस वार्ता के दौरान रूस से तेल आयात को लेकर सवाल किया गया तो विदेश मंत्री ने कहा कि हम इस पूरे विवाद में चाहते हैं कि हिंसा रुके और इसे रोकने की दिशा में हर संभव मदद करने के लिए हम तैयार हैं। जहां तक ईंधन के आयात की बात है तो हां हम अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से तेल का आयात कर रहे हैं, लेकिन आपका ध्यान इस तरफ होने की बजाए यूरोप पर होना चाहिए। हम जितना ईंधन एक महीने में रूस से आयात कर रहे हैं उससे कहीं ज्यादा यूरोप हर रोज रूस से तेल आयात कर रहा है।

प्रियंका चतुर्वेदी हुईं मुरीद
विदेश मंत्री के इस जवाब की सोशल मीडिया पर काफी तारीफ हो रही है। शिवसेना की प्रवक्ता और वरिष्ठ नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी विदेश मंत्री की तारीफ की है। विदेश मंत्री के जवाब की प्रियंका चतुर्वेदी भी मुरीद हो गईं, उन्होंने विदेश मंत्री के बयान का विडियो शेयर करते हुए लिखा सुपर्ब। अहम बात यह है कि शिवसेना अक्सर केंद्र सरकार और पीएम मोदी पर हमलावर रहती है, लेकिन बावजूद इसके जिस तरह से प्रियंका चतुर्वेदी ने विदेश मंत्री की तारीफ की है उसके बाद हर कोई उनकी तारीफ कर रहा है।

रूस से भारत 1-2 फीसदी करता है आयात
गौर करने वाली बात है कि यूक्रेन के खिलाफ युद्ध का ऐलान करने के बाद रूस के खिलाफ अमेरिका सहित तमाम देशों ने कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। लेकिन भारत जिस तरह से रूस से तेल का आयात कर रहा है उसको लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। हालांकि पीएम मोदी और राष्ट्रपति जो बाइडेन के बीच वर्चुअल मीट के बाद अमेरिका की ओर से बयान जारी करके कहा गया है कि रूस से भारत तकरीबन 1-2 फीसदी ही तेल आयात कर रहा है और यह कतई रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों का उल्लंघन है।

रूस के खिलाफ वोटिंग से दूर भारत
गौर करने वाली बात है कि भारत ने यूएन में रूस के खिलाफ वोटिंग नहीं की थी और खुद को वोटिंग से अलग रखा था। भारत लगातार कई बार हिंसा को रोकने की अपील कर चुका है। भारत कई बार शांति की अपील अलग-अलग मंच पर कर चुका है। राष्ट्रपति बाइडेन के साथ वर्चुअल मीट के दौरान पीएम मोदी ने यूक्रेन के बूचा में हुई हिंसा की निंदा की और एक बार फिर से कहा कि हिंसा रुकनी चाहिए और शांति स्थापित करने की कोशिश होनी चाहिए।












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