तालिबान की मदद करने के लिए भारत ने पाक को लताड़ा, कहा-अफगान जानते हैं कि कौन बेहतर दोस्त थे
नई दिल्ली, अक्टूबर 09: भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अफगानिस्तान के बहाने पाकिस्तान को जमकर खरी-खोटी सुनाई हैं। केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि अफगानिस्तान के लोग अच्छी तरह से जानते हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच अंतर कैसे बनाया जाए। भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले एक दशक में भारत द्वारा युद्धग्रस्त राष्ट्र को जितनी मदद दी गई है। इसके इतर उन्होंने साफ किया कि, अफगानिस्तान पर बहुत निश्चित रुख अपनाना मुश्किल है क्योंकि वहां अब भी स्थिति का स्पष्ट होना जारी है।

जयशंकर ने गुरुवार को डीडी न्यूज कॉन्क्लेव में कहा, अफगान लोग जानते हैं कि भारत ने उनके लिए क्या किया है, हम किस तरह के दोस्त हैं, मुझे यकीन है कि उसी अवधि में पाकिस्तान ने उनके साथ जो किया है, उसी के आधार पर उन्होंने तुलना की है। तालिबान के काबुल पर कब्जा करने से पहले तक भारत और अफगानिस्तान के बीच घनिष्ठ व्यापारिक, सांस्कृतिक और वाणिज्यिक संबंध रहे हैं। भारत और अफगानिस्तान के बीच साल 2019-20 के बीच द्विपक्षीय व्यापारिक संबंध करीब डेढ़ अरब डॉलर का रहा है।
तालिबान के सरकार की बागडोर संभालने से पहले भारत और अफगानिस्तान के बीच गहरे व्यापार, सांस्कृतिक और वाणिज्यिक संबंध थे। भारत और अफगानिस्तान के बीच 2019-20 के लिए कुल द्विपक्षीय व्यापार 1.5 अरब डॉलर का था। भारत ने 2017 में चाबहार बंदरगाह के संचालन में भी मदद की और उसी वर्ष भारत-अफगानिस्तान फाउंडेशन (IAF) की स्थापना की, जो दोनों देशों के बीच आर्थिक, वैज्ञानिक, शैक्षिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ाता है।
जयशंकर ने कहा कि अफगानिस्तान के लिए भारत ने जो कुछ भी किया है, उसके आधार पर वह यह बेहतर समझने की स्थिति में है कि उसके अच्छे दोस्त कौन हैं। उन्होंने कहा कि भिन्नताएं अवश्य हैं। जयशंकर ने पाकिस्तान की भी आलोचना की और कहा कि हर देश अपने पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध रखना चाहता है, लेकिन यह तभी हो सकता है जब सामने वाला नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का सम्मान करता हो।
उन्होंने कहा, हर कोई अपने पड़ोसियों से दोस्ती करना चाहता है, लेकिन आप उन शर्तों पर दोस्त बनना चाहते हैं जिन्हें एक सभ्य दुनिया स्वीकार करेगी। निश्चित तौर पर आतंकवाद उन शर्तों में से एक नहीं है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद का इस्तेमाल राज्य के एक हथियार के रूप में करता है जो अस्वीकार्य है। उन्होंने यह भी कहा कि संपर्क, व्यापार, द्विपक्षीय सहयोग और विकास को बढ़ावा देने के लिए पड़ोसी मौजूद हैं। उन्होंने आगे कहा, इस पड़ोसी के साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ है।












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