रूसी वैज्ञानिकों ने बनाई 'स्पुतनिक लाइट' नाम की नई वैक्सीन, एंटीबॉडी के लिए एक ही डोज काफी
नई दिल्ली, मई 6: साल 2019 के अंत में चीन में कोरोना वायरस का पता चला, जब तक अन्य देश कोई कदम उठाते, तब तक ये महामारी बनकर पूरी दुनिया में फैल गया। हालांकि वैज्ञानिकों ने कड़ी मेहनत की और एक साल के अंदर इसकी वैक्सीन विकसित कर ली। अभी तक दुनिया में जिनती भी वैक्सीन आई हैं, उनकी दो डोज लोगों को देना जरूरी है। उसके दो से चार हफ्ते बाद शरीर में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी बनती है, लेकिन अब रूसी वैज्ञानिकों ने एक नया कीर्तिमान रचा है। साथ ही स्पुतनिक सीरीज की एक नई वैक्सीन इजाद की है, जो ज्यादा तेजी से काम करती है।

रूस ने गुरुवार को जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने स्पुतनिक फैमिली की एक नई वैक्सीन को दुनिया के सामने रखा है। इसे अभी स्पुतनिक लाइट (Sputnik Ligh) नाम दिया गया है। पुरानी वैक्सीन में जहां दो शॉट लोगों को दिए जाते थे, तो वहीं लाइट वर्जन में वैक्सीन का एक ही शॉट काफी होगा। इसके अलावा ये वैक्सीन वायरस पर 80 प्रतिशत तक असरदार होगी। रूस का दावा है कि स्पुतनिक लाइट की वजह से दुनियाभर में टीकाकरण प्रक्रिया तेजी से बढ़ सकती है। साथ ही जब भी किसी देश या राज्य में महामारी का पीक आने वाला होगा, तो ये उसे रोकने में मदद करेगी।
रूसी वैज्ञानिकों के मुताबिक कोविड-19 वायरस के खिलाफ नई वैक्सीन ओवरऑल 79.4 प्रतिशत प्रभावी है। इसके अलावा जिन लोगों को वैक्सीन दी गई है, उनमें से 91.7 प्रतिशत लोगों के अंदर एंटीबॉडी बन गई, हालांकि इसमें 28 दिन का वक्त लगता है। वहीं ट्रायल में शामिल 100 प्रतिशत लोगों का सेल इम्युन रिस्पांस सिस्टम कोरोना वायरस के खिलाफ पूरी तरह से काम करता रहा। वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसे लोगों को भी ट्रायल में शामिल किया था, जिनके अंदर पहले से एंटीबॉडी मौजूद थी। उन लोगों में 10 दिन के अंदर ही 40 गुना ज्यादा एंटीबॉडी पाई गई।
भारत में भी स्पुतनिक को मंजूरी
कोरोना वायरस के खिलाफ रूस ने सबसे पहले वैक्सीन बनाई थी, जिसका नाम स्पुतनिक V रखा गया। भारत में बढ़ते मामलों को देखते हुए भारत सरकार ने भी इस वैक्सीन को मंजूरी दे दी है। 1 मई को इसकी 1.5 लाख डोज रूस से भारत आई। इसका ट्रायल चल रहा है, अगले दो-तीन हफ्तों में इसे लोगों को दिया जाएगा।












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