मिलिए महाकाल मंदिर की उस लेडी सिंघम से जिसकी सूक्ष-बूझ से पकड़ा गया शातिर गैंगस्टर विकास दूबे,जानें कहानी

मिलिए महाकाल मंदिर की उस लेडी सिंघम से जिसकी सूक्ष-बूझ से पकड़ा गया शातिर गैंगस्टर विकास दूबे

नई दिल्ली। कानपुर में सीओ समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या का मुख्य आरोपी और हिस्‍ट्री शीटर विकास दुबे गुरुवार को फिल्मी अंदाज में उज्जैन के महाकाल मंदिर से गिरफ्तार कर लिया गया। पांच लाख के इनामी गैंगस्टर को पुलिस सेंटर में रखकर पूछताछ की जा रही है। 8 पुलिस वालों को मौत के घाट उतारने के बाद पूरी 152 घंटे तक यूपी पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहे विकास दूबे को आज सुबह साढ़े आठ बजे उज्जैन के महाकाल मंदिर में एक महिला सुरक्षा अधिकारी की सूझ-बूझ के चलते इतना खतरनाक अपराधी पुलिस की गिरफ्त में आया। माना जा रहा है कि अगर इस महिला अधिकारी ने चलाकी से काम न लिया तो एक बार फिर विकास दूबे पुलिस को चकमा देकर फरार होने में कामयाब हो जाता। आइए जानते हैं कौन है ये महिला पुलिस सुरक्षा अधिकारी और कैसे किया इतने शातिर अपराधी को गिरफ्तार ?

रूबी यादव ने बताया कि कैसे पुलिस के शिंकंजे में आया विकास दूबे

रूबी यादव ने बताया कि कैसे पुलिस के शिंकंजे में आया विकास दूबे

ये पुलिस अधिकारी महाकाल मंदिर की सुरक्षा अधिकारी ले‍डी सिंघम रूबी यादव हैं। रूबी यादव ने बताया कि सुबह 7.15 बजे मंदिर के एक फूलवाले ने इनकी टीम को सूचना दी कि उसने विकास दुबे जैसे संदिग्ध को देखा हैं। मेरी टीम ने मुझे सूचना दी। जिस पर मैंने अपनी टीम से कहा कि जब तक पुष्टि न हो जाएं तब तक उसको पकड़ना नहीं है क्योंकि तब तक विकास दुबे बाहर घूम रहा था और कुछ भी कर सकता था। फिर मेरी टीम उसकी निगरानी करती रही विकास ने उसने 250 रुपये का टिकट लिया और शंख द्वार से एंट्री की और दर्शन के लिए अंदर गया। मेरे मना करने के कारण मेरी टीम ने उसको रोका नही। फिर मैंने अपने सिक्युरिटी गार्ड से फोटो मंगाई लेकिन उसका हुलिया बदला हुआ था चेहरे पर चश्‍मा और मास्‍क था और वो कमजोर भी लग रहा था।

ऐसे रुबी यादव ने सूझ-बूझ दिखाते हुए विकास दूबे को ले गई मंदिर के अंदर

ऐसे रुबी यादव ने सूझ-बूझ दिखाते हुए विकास दूबे को ले गई मंदिर के अंदर

ये विकास यादव ही है इसलिए मैंने उसकी फोटो गूगल पर तलाशी जिसमें उसके सिर पर मुझे चोट का निशान दिखा जिसके बाद मैंने वो फोटो देखी जो मेरे गार्ड ने भेजा था, उसे फिर मैंने जूम करके देखा तो उसके माथे पर चोट के निशान थे। इसके बाद मैं कन्फर्म हो गई कि ये विकास दुबे है, लेकिन मैंने ये बात अपनी टीम से शेयर नहीं की, ताकि कोई पैनिक ना हो। इसके बाद मैंने अपने एसपी को सूचित किया और फिर मैंने सुरक्षा गार्डों से कहा कि उसे लड्डू काउंटर पर बैठाओ और उसे शक नहीं होना चाहिए कि हम उसे वॉच कर रहे हैं। जिसके बाद मेरे कहने पर मेरे सुरक्षा गार्डो ने उससे उसका नाम पूछा तो उसने अपना नाम शुभम बताया और जब कि आईडी कार्ड जो दिय उस पर नवीन पाल था।

विकास दूबे को चारों ओर से ऐसे धर दबोचा

विकास दूबे को चारों ओर से ऐसे धर दबोचा

रुबी यादव ने ये भी बताया कि मंदिर में पकड़े जाने के बाद उसने वहीं स्‍वीकार लिया था कि वो ही विकास दूबे है। इस दौरान उसने हमारे एक गार्ड से हाथपाई और गाली गलौच की उसने एक गार्ड का नेम प्लेट निकाल लिया और उसकी घड़ी तोड़ दी। रुबी यादव ने बताया कि उसके अंदर जरा भी डर नहीं दिख रहा था। एसपी और एक एरिया की पुलिस ने आकर उसे हिरासत में जब लिया तो वो जोर-जोर से चिल्‍लाने लगा कि मैं ही विकास दूबे हूं कानपुर वाला। जब पुलिस उसे गाड़ी में बैठाने लगी तभी वह जोर से चिल्लाया कि मैं विकास दुबे हूं कानपुर वाला।

मंदिर परिसर के अंदर आने का इसलिए किया गया इंतजार

मंदिर परिसर के अंदर आने का इसलिए किया गया इंतजार

रुबी ने बताया कि मंदिर में अंदर आने के पहले सभी की असलहें और सामग्रियों की तलाशी होती है इसलिए मैंने सोचा कि पहले इसे निहत्‍था मंदिर के अंदर प्रवेश करने देते हैं तब तक कन्‍फर्म भी हो गया कि वह ही विकास दूबे हैं। जब पुलिस उसे गाड़ी में बैठाने लगी तभी वह जोर से चिल्लाया कि मैं विकास दुबे हूं कानपुर वाला।

रूबी यादव मनचलों के होश ठिकाने लगाने के लिए चर्चित रही हैं

रूबी यादव मनचलों के होश ठिकाने लगाने के लिए चर्चित रही हैं

बता दें कि रूबी यादव इससे पहले भी मनचलों के होश ठिकाने लगाने के लिए चर्चित रही हैं। तीन साल पहले किसी मनचले के साथ हुई हाथापाई के बाद जिस कदर रूबी ने उसे सख्त समझाइश देते हुए पुलिस को सौंपा था, वह घटना काफी सुर्खियों में थी। रूबी यादव को जब से महाकालेश्वर मंदिर के सुरक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है तब से वे मंदिर में श्रद्धालु के भेष में आने वाले चोर उच्चको की सतत मॉनिटरिंग कर रही है और उन पर पेनी नजर रही हैं। बता दें जब रुबी यादव होमगार्ड के पद पर पुलिस में भर्ती हुई तब उन्‍होंने अपने परिवार और समाज की सोच बदल दी थी। रुबी अपने पिता की मर्जी के खिलाफ पुलिस में भर्ती हुई थी। रुबी सीहोर के नसरुल्लागंज के मध्यमवर्गीय परिवार की बेटी है। पिता बिजली विभाग में कार्यरत हैं। रुबी के परिवार में तीन बहन और एक भाई है। 2013 में रुबी ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। पिता रविशंकर यादव ने कहा- पढ़ाई पूरी हो गई, अब तुम्हारे लिए रिश्ता देख रहे हैं। रुबी ने कहा- मुझे शादी नहीं करना, नौकरी करुंगी। पिता नहीं माने। उन्हें मनाने की रुबी ने कोशिश की लेकिन उन्होंने खाना-पीना छोड़ दिया। तीन दिन तक खुद को कमरे में बंद रखा। रूबी यादव ने बताया- मां निर्मला ने उन्हें मनाया। फिर ट्रेनिंग पर जाने की इजाजत मिली लेकिन तीन महीने तक पिताजी ने बात नहीं की। एक बार मैं वर्दी पहनकर उनके सामने आई तो वे मुझे देखकर रो पड़े, गले लगा लिया। अब वे खुद ही लोगों से कहने हैं- बेटियों की जल्द शादी मत करो, उन्हें खूब पढ़ाओ, आत्मनिर्भर बनाओ।

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