लोकसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी की 'टेंशन' बढ़ा सकता है RSS का ये आंकड़ा
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कोलकाता। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ लगातार पश्चिम बंगाल में अपने पैर पसार रही है। पिछले एक वर्ष में आरएसएस ने 250 नई शाखाओं की शुरुआत की है, साथ ही आने वाले समय में और विस्तार करने की योजना बना रही है। आरएसएस लोगों तक अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए मंडल और ग्राम पंचायत स्तर पर प्रचार प्रसार कर रही है। संघ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शाखाओं में बढ़ोतरी की बड़ी वजह पिछेड़े और गरीब लोगों का संघ की तरफ रुझान है। लोगों ने संघ को अपना समर्थन देना शुरू किया है जिससे की इसका लगातार नेटवर्क बढ़ रहा है।

पिछड़े इलाको में लोकप्रिय
पश्चिम बंगाल के हुगली और दुर्गापुर जिले में संघ की शाखाओं में काफी बढ़ोतरी हुई है, यह 2016 में कुल 1100 शाखाएं थीं जो कि 2018 में बढ़कर 1350 हो गई। संघ के वरिष्ठ सदस्य का कहना है कि जिन जगहों पर विकास नहीं हुआ और लोग आर्थिक रूप से पिछड़े हैं, साथ ही स्वास्थ्य, शिक्षा का स्तर काफी खराब है वहां संघ ज्यादा लोकप्रिय हुआ है। लोगों के संघ के प्रति रुझान और लोकप्रियता को देखते हुए हम लगातार शाखाओं की संख्याओं में बढ़ोतरी कर रहे हैं, जिससे कि अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचा जा सके।

20 फीसदी बढ़ोतरी
संघ के एक बड़े पदाधिकारी ने बताया कि स्थानीय स्तर पर विकास करने के हमारे मॉडल को लोग काफी सराह रहे हैं, जिसकी मदद से शाखा लगातार मजबूत हो रही है। हमारे लगातार प्रयासों और लोगों के सहयोग की वजह से पश्चिम बंगाल में पिछले वर्ष 20 फीसदी शाखाओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। हम आने वाले समय में भी इसे बढ़ाने के लिए लगातार काम करते रहेंगे।

लगातार हो रहा है विस्तार
मौजूदा समय में संघ 650 जगहों पर 910 शाखाओं का संचालन करता है, दक्षिण बंगाल में 452 शाखाएं हैं जबकि उत्तरी बंगाल में 373 शाखाएं हैं। पूरे पश्चिम बंगाल में हर हफ्ते होने वाले मिलन कार्यक्रम की संख्या 1091 है, जबकि मासिक कार्यक्रम मंडली की संख्या 226 है। संघ के अहम फैसले लेने वाली संस्था अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा ने तीन दिन की बैठक के बाद अपनी रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल में संघ की बढ़ते कदम का भी उल्लेख किया है।
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