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'भारत किसी एक का नहीं, सबका है', नए साल पर RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा संदेश, जाति को लेकर की ये अपील

RSS chief Mohan Bhagwat: देश में प्रवासियों पर बढ़ते हमलों और हाल ही में देहरादून में त्रिपुरा के एक छात्र की मौत के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत का बयान काफी अहम माना जा रहा है। एक नस्लीय हमले में जान गंवाने वाले छात्र का मामला सामने आने के बाद भागवत ने साफ शब्दों में कहा कि भारत किसी एक वर्ग या समुदाय का नहीं है, बल्कि यह हर भारतीय का देश है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी को भी उसकी जाति, भाषा, क्षेत्र या आर्थिक स्थिति के आधार पर न आंका जाए।

बुधवार (31 दिसंबर 2025) को छत्तीसगढ़ के सोनपैरी गांव में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा, "किसी को जाति, संपत्ति, भाषा या क्षेत्र के आधार पर मत परखिए। हर व्यक्ति को अपना समझिए। पूरा भारत मेरा है और मैं पूरे भारत का हूं।" उनके इस बयान को देश में सामाजिक सौहार्द को लेकर एक स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

RSS chief Mohan Bhagwat

त्रिपुरा के छात्र की मौत और परिवार का आरोप

इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में देहरादून की वह दर्दनाक घटना है, जिसमें अंतिम वर्ष के एमबीए छात्र एंजेल चकमा की मौत हो गई। एंजेल को 26 दिसंबर को अस्पताल में 17 दिन तक भर्ती रहने के बाद मृत घोषित किया गया। उनके पिता का आरोप है कि एंजेल अपने छोटे भाई को बचाने की कोशिश कर रहे थे, जिसे कथित तौर पर नस्लीय गालियां दी जा रही थीं और "चीनी" कहकर बुलाया गया। जब एंजेल ने अपनी भारतीय पहचान पर जोर दिया, तो हमलावरों ने उस पर धारदार और कुंद हथियारों से हमला कर दिया।

भेदभाव खत्म करना ही पहला कदम: RSS प्रमुख

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि सामाजिक समरसता की पहली शर्त है मन से भेदभाव और अलगाव की भावना को खत्म करना। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक हम एक-दूसरे को बराबरी से नहीं देखेंगे, तब तक समाज में सच्ची एकता नहीं आ सकती। उनके मुताबिक, "पूरा देश सभी का है और यही सोच वास्तविक सामाजिक सौहार्द की नींव है।"

सार्वजनिक और धार्मिक स्थलों पर बराबरी की बात

मोहन भागवत ने यह भी कहा कि सार्वजनिक सुविधाएं और धार्मिक स्थल सभी के लिए खुले होने चाहिए। किसी भी तरह का भेदभाव न केवल समाज को कमजोर करता है, बल्कि टकराव को भी जन्म देता है। उन्होंने इसे टकराव नहीं, बल्कि एकता का प्रतीक बताया और कहा कि समान अवसर ही मजबूत लोकतंत्र की पहचान है।

बांग्लादेश और अल्पसंख्यकों पर चिंता

अपने संबोधन में मोहन भागवत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ते अपराधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि केवल चर्चा से समाधान नहीं निकलता, बल्कि समस्याओं पर गंभीर आत्ममंथन और व्यावहारिक समाधान जरूरी है। उनका कहना था कि यदि समाज अंदर से मजबूत और स्थिर है, तो कोई भी संकट उसे छू नहीं सकता।

धर्मांतरण के मुद्दे पर क्या बोले मोहन भागवत?

धर्मांतरण के मुद्दे पर बोलते हुए RSS प्रमुख ने कहा कि समाज में भरोसे की कमी इसके पीछे एक बड़ा कारण है। उन्होंने सुझाव दिया कि जमीनी स्तर पर लोगों से फिर से जुड़ना और आपसी विश्वास बहाल करना बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक, भरोसा और समझ ही किसी भी समाज को जोड़कर रखने की सबसे मजबूत कड़ी होती है।

एक संदेश, जो हर भारतीय से जुड़ता है

मोहन भागवत का यह बयान केवल एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि वह पूरे देश को यह याद दिलाता है कि भारत की ताकत उसकी विविधता और आपसी सम्मान में है। जाति, भाषा या क्षेत्र के नाम पर बंटवारा नहीं, बल्कि एकता ही इस देश को आगे ले जा सकती है।

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