मांसाहार को मोहन भागवत ने बताया तामसिक भोजन, बोले- ये गलत रास्ते पर लेकर जाता है
नई दिल्ली, 30 सितंबर। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत ने कहा कि लोगों को ऐसा भोजन नहीं करना चाहिए जिसमे हिंसा शामिल हो। लोगों को गलत तरह का खाना नहीं खाना चाहिए। मोहन भागवत ने यह बात भारत विकास मंच की ओर से आयोजित कार्यक्रम के दौरान कही। मोहन भागवत इस कार्यक्रम में समग्र व्यक्तित्व विकास की बात कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने लोगों से ऐसा भोजन नहीं करने को कहा, जिसमे हिंसा शामिल हो। उन्होंने कहा कि अगर आप गलत तरह का खाना खाते हैं, यह आपको गलत रास्ते पर लेकर जाएगा। आपको तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। लोगों को ऐसा भोजन नहीं करना चाहिए जिसमे बहुत सारी हिंसा शामिल हो। बता दें कि तामसिक भोजन को मांसाहार भोजन के तौर पर जाना जाता है।

मोहन भागवत ने इस दौरान शाकाहारी और मांसाहारी भोजन की तुलना की। उन्होंने कहा कि भारत में ऐसे लोग हैं जो मांस खाते हैं, जैसा कि दुनिया के अन्य हिस्सों में खाया जाता है, लेकिन हमारे देश में जो मांसाहारी लोग हैं उनके भी कुछ नियम हैं, जिसका वह पालन करते हैं। जो लोग यहां पर मांसाहारी भोजन करते हैं, वह सावन के पूरे महीने मांसाहारी भोजन नहीं करते हैं। ये लोग सोमवार, मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को मांसाहार का सेवन नहीं करते हैं। ये लोग खुद पर कुछ नियम लागू करते हैं।
संघ प्रमुख ने कहा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरा देश त्योहारों के रंग में रंगा है। नवरात्र चल रहे हैं, कुछ ही दिनों में लोग दशहरा मनाएंगे। बता दें कि नवरात्र में लोग उपवास करते हैं, खुद को मांसाहार से दूर रखते हैं। जीवन में अध्यात्म की अहमियत को बताते हुए भागवत ने कहा कि अध्यात्म भारत की आत्मा है। जब श्रीलंका और मालद्वीव संकट में थे तो सिर्फ भारत ने उनकी मदद की, जबकि दूसरे देश इन देशों में व्यवसायिक अवसर तलाश रहे थे। अध्यात्म भारत की आत्मा है, भारत को हर किसी को यह बताने की जरूरत है कि आखिर कैसे जीवन को जिया जाता है, अपने अनुभव के आधार पर दुनिया को बताने की जरूरत है कि कैसे अध्यात्म से अच्छा जीवन जिया जाता है। बिना अहंकार के जीवन जीना, पहले देश की आत्मा थी। चीन, अमेरिका, पाकिस्तान जैसे देशों ने श्रीलंका का रूख किया था, यहां इन लोगों को बिजनेस के अवसर दिख रहे थे।












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