'मेइती और कुकी लंबे समय से साथ रह रहे थे, लेकिन...': दशहरा रैली में RSS चीफ ने कर दिया बड़ा इशारा
आरएएस प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि मणिपुर में हिंसा की साजिश रची गई थी और इसके लिए उन्होंने 'बाहरी ताकतों' पर आरोप लगाया है। गौरतलब है कि पूर्वोत्तर भारत का यह राज्य पिछले 3 मई से ही अशांत है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक भागवत ने विजयादशमी के मौके पर महाराष्ट्र के नागपुर में संघ के मुख्यालय में आयोजित दशहरा रैली के वार्षिक संबंधोन के दौरान यह आरोप लगाया है।

'मणिपुर की हिंसा सुनियोजित'
मोहन भागवत ने पूछा, 'मेइती और कुकी वहां लंबे समय से साथ में रह रहे थे। यह एक सीमावर्ती राज्य है। इस तरह के अलगाववाद और आंतरिक संघर्ष से किसे लाभ होता है? बाहरी ताकतों को भी लाभ मिलता है। वहां जो कुछ भी हुआ क्या उसमें बाहर के लोग शामिल थे।'
उन्होंने कहा, 'केंद्रीय मंत्री अमित शाह तीन दिनों तक मणिपुर में थे। वास्तव में संघर्ष को किसने बढ़ावा दिया? ये (हिंसा) हो नहीं रही है, इसे कराया जा रहा है।' आरएसएस चीफ ने सवाल किया कि 'मणिपुर में अशांति और अस्थिरता का लाभ उठाने में किन विदेशी शक्तियों की रुचि हो सकती है? क्या इन घटनाओं में दक्षिण पूर्व एशिया की भू-राजनीति की भी कोई भूमिका है...'
हिंसा को कौन भड़का रहा है?- मोहन भागवत
उन्होंने गंभीर सवाल उठाया कि 'जब शांति बहाल होने लगती है, तो कोई न कोई घटना घट जाती है। इसके चलते समुदायों के बीच दूरियां बढ़ती हैं। ऐसे कार्य करने वालों के पीछे कौन लोग हैं? हिंसा को कौन भड़का रहा है?'
2024 से पहले हिंसा भड़काने की कोशिशों को लेकर किया आगाह
मोहन भागवत बोले कि उन्हें संघ के स्वयंसेवकों पर गर्व है, जिन्होंने मणिपुर में हिंसा स्थापित करने के लिए काम किया। भागवत ने 2024 के आम चुनावों से पहले वोट लेने के लिए भावनाओं को भड़काने की कोशिशों के खिलाफ भी आगाह किया। उन्होंने देश की एकता, अखंडता, अस्मिता और विकास को ध्यान में रखकर लोगों से वोट करने को कहा।
उन्होंने हिंसा भड़काने और आपसी अविश्वास और नफरत पैदा करने वाले 'टूलकिट' के इस्तेमाल की भी चर्चा की। वे बोले, 'जो लोग एकता की इच्छा रखते हैं, वे इस बात पर जोर नहीं दे सकते कि एकता के बारे में सोचने से पहले सभी तरह की समस्याएं खत्म होनी चाहिए.....हमें छिटपुट घटनाओं से विचलित हुए बिना, शांति और संयम से काम लेना पड़ेगा...'
भागवत बोले कि 'तीन तत्व, मातृभूमि के प्रति समर्पण, पूर्वजों पर गर्व और समान संस्कृति, भाषा, क्षेत्र, धर्म, संप्रदाय, जाति और उप-जातियो की हर विविधताओं को एक साथ जोड़ कर हमें एक राष्ट्र बनाते हैं।' उन्होंने कहा कि जो लोग देश के बाहर से आए धर्मों का पालन करते हैं, उन्हें भी इन तत्वों का समर्थन करना चाहिए।
भागवत ने कहा कि सांस्कृतिक मार्क्सवाद और वोक तत्व (woke elements) अराजकता, अव्यवस्था और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं। उनके मुताबिक मीडिया, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में अपने प्रभाव के दम पर वे सामाजिक व्यवस्था, नैतिकता, संस्कृति, गरिमा और संयम को बिगाड़ना चाहते हैं। (इनपुट-पीटीआई)












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