RRB NTPC Results: रेलवे की परीक्षा को लेकर आंदोलित छात्रों के ग़ुस्से की वजह क्या

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पटना के 'भिखना पहाड़ी' इलाक़े में काफ़ी गहमागहमी रही. रेलवे की परीक्षा देने वाले छात्रों और पुलिस के बीच लगातार दूसरे दिन भी झड़पें हुईं.

RRB NTPC Results: why the students protest over the railway exam

पुलिस ने जहाँ छात्रों पर बेरहमी से डंडे बरसाए, वहीं छात्रों ने भी पलटवार करते हुए पत्थर और रोड़े फेंके. कई पुलिसकर्मी भी छात्रों की ओर से किए गए इस जवाबी हमले में घायल हुए हैं. पुलिस ने क़रीब आधा दर्जन प्रदर्शनकारी छात्रों को गिरफ़्तार भी किया है.

बिहार के दूसरे ज़िलों से रेलवे की संपत्ति को नुक़सान पहुँचाए जाने की ख़बरें और तस्वीरें सामने आई हैं. आरा से जहाँ रेल कोच के जलाए जाने की तस्वीरें आ रही हैं, वहीं नवादा से ऐसी तस्वीरें आ रही हैं कि वहाँ प्रदर्शनकारियों ने डायनेमिक टेम्पिंग एक्सप्रेस मशीन को ही आग के हवाले कर दिया. प्रदर्शन की आंच बिहार से निकलकर पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश को भी सुलगाने लगी है.

उत्तर प्रदेश में प्रयागराज समेत कई जगहों से छात्रों की ओर से रेल रोकने की कोशिश और पुलिस कार्रवाई की तस्वीरें और वीडियो सामने आने लगे हैं.

मंगलवार को बिहार में प्रतियोगी छात्रों के प्रदर्शन का दूसरा दिन था. रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड द्वारा नॉन टेक्निकल पॉपुलर कैटेगरी (RRB NTPC Result) में अलग-अलग पदों पर निकली भर्तियों में धांधली और लापरवाही को लेकर बिहार के छात्रों का प्रदर्शन उग्र होता जा रहा है. छात्रों का प्रदर्शन थमने के बजाय बढ़ता ही चला जा रहा है.

सूबे में कई जगहों पर जहाँ रेलवे सेवा पूरी तरह ठप हो गई है, वहीं कई ट्रेनों के रूट में बदलाव करना पड़ा है. सोमवार को छात्रों ने पटना के 'राजेन्द्र नगर टर्मिनल' पर घंटों रेल का परिचालन रोके रखा था.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, रेलवे ने हिसंक विरोध-प्रदर्शन के बाद एनटीपीसी और लेवन वन परीक्षाओं को निलंबित कर दिया है. रेलवे ने प्रदर्शनकारी छात्रों की शिकायत की जाँच के लिए एक समिति भी बनाई है.

आख़िर छात्र क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन?

रेलवे ने साल 2019 में ऐन चुनाव (लोकसभा चुनाव) के वक़्त एनटीपीसी के माध्यम से 35,308 पोस्टों के लिए और ग्रुप डी के लिए लगभग एक लाख तीन हज़ार पोस्टों के लिए आवेदन मंगाया.

फ़रवरी-मार्च में छात्रों ने फ़ॉर्म भरा. अप्रैल-मई में नई सरकार बन गई. जुलाई तक परीक्षा लेने की संभावित तारीख़ दी गई थी. लेकिन साल 2019 में परीक्षा नहीं ली गई.

पटना के भिखना पहाड़ी मोड़ पर प्रदर्शन कर रहे हज़ारों छात्रों में से अमरजीत भी एक थे. अमरजीत इस पूरे मामले में छात्रों का पक्ष रखते हुए कहते हैं, "साल 2021 में परीक्षा हुई और साल 2022 में CBT-1 (NTPC) का रिज़ल्ट जारी किया गया. उस वक़्त नोटिफ़िकेशन में यह बात लिखी गई थी कि रेलवे बोर्ड CBT-1 (NTPC) में 20 गुना रिज़ल्ट देगा, लेकिन इन्होंने एक छात्र को पाँच जगह गिना. इससे यह तो हुआ कि छात्र को 20 गुना रिज़ल्ट दिया. वास्तविकता में रेलवे बोर्ड ने मात्र 10-11 गुना रिज़ल्ट दिया है."

https://twitter.com/TejYadav14/status/1486207083532132354

एक और अभ्यर्थी छात्र ने कहा कि एनटीपीसी ने जो रिज़ल्ट जारी किया है, उसमें पाँच लेवल जनरेट किया गया है. उनके अनुसार किसी का पाँचों लेवल में रिज़ल्ट है तो किसी का चार में और किसी का तीन में और किसी का अच्छा ख़ासा नंबर होने के बावजूद एक में भी रिज़ल्ट नहीं है.

छात्रों की माँग है कि रेलवे 'वन स्टूडेंट-वन रिज़ल्ट' जारी करे. छात्रों का कहना है कि पिछले बार की परीक्षा भी एकल परीक्षा हुई थी, लेकिन उस समय सीटों का बँटवारा मेन्स में हुआ था जबकि इस बार सीट का बंटवारा प्री में ही करके अच्छे प्रतिभागियों को बाहर कर दिया गया है.

छात्रों का आरोप है कि रेलवे के ऐसा करने के कारण परीक्षा देने वाले छात्र गुड्स गार्ड और स्टेशन मास्टर जैसे पदों के लिए क्वॉलीफ़ाई नहीं कर सकते हैं.

भिखना पहाड़ी मोड़ पर प्रदर्शन कर रहे एक और छात्र अमित कहते हैं, "पहली ग़लती तो उन्होंने यही कर दी कि इंटरमीडिएट वाले में ग्रेजुएशन वाले को बैठा दिया. यहाँ तक तो हमने बर्दाश्त किया लेकिन जब रिज़ल्ट आया तो कट ऑफ़ अलग-अलग निकाल दिया जबकि पहले नोटिफ़िकेशन में यह लिखा था कि सबका रिज़ल्ट एक होगा."

https://twitter.com/TejYadav14/status/1486009054191550471

अमित रेलवे पर सवाल उठाते हुए कहते हैं, "हम रेलवे से पूछना चाहते हैं कि पोस्ट के हिसाब से कट ऑफ़ CBT-1 में क्यों दिया? पोस्ट के हिसाब से कट ऑफ़ तो CBT-2 में होता है और इतना अधिक कट ऑफ़ जाने का एक ही कारण हो सकता है कि यहाँ छात्रों को 20 गुना रिज़ल्ट नहीं दिया गया है."

अमित का दावा है कि रेलवे ने यहाँ एक छात्र को चार से पाँच पोस्टों पर रिपीट किया है यानी उनकी पुनरावृत्ति की गई है. अमित पूछते हैं कि ''अगर किसी छात्र का चयन पाँच जगह हो गया और वह छात्र मेन्स के साथ स्किल और मेडिकल भी पास कर ले तो उस छात्र का क्या होगा? उस लड़के को रेलवे कहाँ नौकरी देगी?"

उनके अनुसार, वह छात्र तो दस जगह क्वॉलीफ़ाई कर गया, लेकिन आप उसे नौकरी तो एक ही जगह देंगे तो फिर नौ सीटें तो ख़ाली ही रहेंगी ना?

https://twitter.com/RailMinIndia/status/1485953219566383105

प्रदर्शनकारियों को आजीवन प्रतिबंधित कर सकती है रेलवे

इस पूरे प्रदर्शन पर और रेलवे पर धांधली के आरोप पर रेल मंत्रालय ने प्रदर्शनकारी छात्रों को ही चेतावनी दी है. रेल मंत्रालय ने एक सार्वजनिक नोटिस में कहा कि "यह संज्ञान में आया है कि रेलवे की नौकरी के इच्छुक उम्मीदवार रेलवे पटरियों पर विरोध-प्रदर्शन, ट्रेन संचालन में व्यवधान, रेलवे संपत्तियों को नुक़सान पहुँचाने जैसी उपद्रवी/ग़ैर क़ानूनी गतिविधियों में संलिप्त हुए हैं. इस तरह की गतिविधियां उच्चतम स्तर की अनुशासनहीनता प्रदर्शित करती हैं जो ऐसे उम्मीदवारों को रेलवे की सरकारी नौकरियों के लिए अनुपयुक्त बनाती है."

रेल मंत्रालय ने उस नोटिस में यह भी आगे लिखा है कि ऐसी गतिविधियों के वीडियो की विशेष एजेंसी की मदद से जाँच कराई जाएगी और ग़ैरक़ानूनी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने वाले उम्मीदवार पर पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ उन्हें रेलवे की नौकरी प्राप्त करने से आजीवन प्रतिबंधित भी किया जा सकता है.

विपक्ष हमलावर

प्रतियोगी छात्रों के इस प्रदर्शन को विपक्ष के नेताओं का भी समर्थन मिल रहा है. राजद विधायक तेज प्रताप यादव ने बीते रोज़ प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस की ओर से छोड़े जा रहे आंसू गैस के गोलों की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, "यह तस्वीरें कश्मीर से नहीं, पटना (बिहार) से हैं और ये आतंकवादी नहीं. RRB NTPC के अभ्यर्थियों पर बर्बरता हो रही है. याद रहे कि बिहार में डबल इंजन वाली सरकार है और बिहार के मुखिया अपने आप को "सुशासन बाबू" कहते फिरते हैं."

वहीं भिखना पहाड़ी मोड़ पर तमाम प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में पहुँचे भाकपा (माले) के विधायक संदीप सौरभ बीबीसी से बातचीत में कहते हैं, "देखिए आरआरबी की ओर से इस बहाली के लिए निकाली गई विज्ञप्ति में ऐसा कहा गया था कि कुल पदों से 20 गुना अधिक रिज़ल्ट देंगे. तो क़ायदे से 35,000 बहालियों के लिए सात लाख लोगों का रिज़ल्ट देना था, लेकिन आरआरबी ने सिर्फ़ साढ़े तीन लाख लोगों का रिज़ल्ट दिया है. एक व्यक्ति का छह लेवल पर रिज़ल्ट दिया है. तो इसका सीधा मतलब निकलता है कि आप अपनी विज्ञप्ति से ही पलट जा रहे हैं और ऐसा छात्रों के साथ सरासर नाइंसाफ़ी है. हम इसके विरोध में उतरे छात्रों के समर्थन में हैं."

https://www.youtube.com/watch?v=18GpKHYEDUY

संदीप कहते हैं कि अभ्यर्थियों ने इन तमाम प्रदर्शनों से पहले सरकार और रेलवे को अल्टीमेटम भी दिया था. देश भर के छात्रों ने ट्विटर पर ट्रेंड कराया. नंबर वन ट्रेंड हुआ, लेकिन सरकार छात्रों के तमाम गुहारों को अनसुना करती रही.

संदीप आगे कहते हैं, "अंतिम विकल्प के तौर पर छात्र सड़कों पर हैं और सरकार तमाम असहमतियों की आवाज़ को हिंसा से कुचलने पर उतारू है. सरकार अपनी ज़िद छोड़े ताकि लाखों अभ्यर्थियों को इंसाफ़ मिले."

यहाँ क़ानून का राज चलेगा- प्रशासन

भिखना पहाड़ी मोड़ पूरे दिन चले अभ्यर्थियों के प्रदर्शन और देर शाम हुई झड़प पर मजिस्ट्रेट रैंक के प्रशासनिक पदाधिकारी एमएस ख़ान कहते हैं, "देखिए एनटीपीसी द्वारा ली गई परीक्षा में गड़बड़ी हुई ऐसा छात्रों का कहना है. छात्रों की बात कितनी सही है या ग़लत इस पर मुझे कोई टिका-टिप्पणी नहीं करनी, लेकिन उनका इस तरह प्रदर्शन करना अवैध और ग़ैरक़ानूनी है. सोमवार को उन्होंने रेलवे ट्रैक जाम किया और आज सड़क रोककर आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त किया."

एमएस ख़ान आगे कहते हैं, "आज भी हमने इन्हें ऑफ़र दिया कि आरआरबी महेन्द्रू में आप पाँच लोगों का प्रतिनिधिमंडल लेकर चलें. अपनी बात रखें, संवाद करें लेकिन वे नहीं माने. यहां सारे छात्र बिल्कुल नेतृत्वहीन थे और हिंसक भी हो गए. कई पुलिस के जवान घायल हैं. यहां क़ानून का राज चलेगा."

गणतंत्र दिवस के मद्देनज़र छात्रों ने अपने प्रदर्शन को बुधवार को ज़रा थाम रखा है, लेकिन अभ्यर्थियों के हवाले से आने वाली ख़बरों के हिसाब से 28 तारीख़ को देश भर में व्यापक आंदोलन करने की योजना है.

अभ्यर्थियों का प्रतिनिधिमंडल बुधवार को बैठक करेगा. इस बीच कई अभ्यर्थी छात्र 28 तारीख़ को भारत बंद की घोषणा कर चुके हैं और वामपंथी छात्र संगठनों ने ग्रुप डी की परीक्षा में आए इस नए फ़रमान के ख़िलाफ़ बिहार बंद की कॉल दी है.

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