इश्क के मैदान में भारत की 'चीन पर फतह', बागपत की बहू बनकर आई चाइनीज दुल्हन
बागपत के रॉबिन की निगाहें चीन की मिन्हुआ जोंग से टकराई तो दोनों ने साथ जीने-मरने की कसमें खाते हुए शादी करने का फैसला कर लिया।
नई दिल्ली। कहते हैं, अगर किसी चीज को पूरी शिद्दत से चाहो तो सारी कायनात उसे आपसे मिलाने में जुट जाती है। शाहरुख खान की सुपरहिट फिल्म 'ओम शांति ओम' का यह डायलॉग यूपी के बागपत में रहने वाले रॉबिन पंवार के लिए सही साबित हुआ। बागपत के रॉबिन की निगाहें चीन में रहने वाली मिन्हुआ जोंग से टकराई तो दोनों एक दूसरे को दिल दे बैठे। इश्क आगे बढ़ा और दोनों ने साथ जीने-मरने की कसमें खाते हुए शादी करने का फैसला कर लिया। इसके बाद रॉबिन और मिन्हुआ ने अपने-अपने परिजनों को इस बारे में बताया। परिजनों ने भी एक-दूसरे के प्रति दोनों की चाहत को देखते हुए इस रिश्ते के लिए हां कर दी।

कैसे परवान चढ़ा दोनों का इश्क
सोमवार को धूमधाम से बागपत के दोघट इलाके में स्थित लक्ष्मी गार्डन में रॉबिन और मिन्हुआ की शादी हुई और दोनों सात फेरों के बंधन में बंध गए। दरअसल रॉबिन पेशे से योगा टीचर हैं और पिछले डेढ़ साल से चीन के तियुडोंग में लोगों को योग सिखा रहे हैं। मिन्हुआ जोंग भी रॉबिन के पास योग सीखने आती थीं। मिन्हुआ एक टीचर हैं और चीन के एक सरकारी स्कूल में पढ़ाती हैं। योगा क्लासेस के दौरान दोनों ने एक दूसरे को पसंद कर लिया और शादी करने का फैसला लिया। परिजनों की सहमति मिलने के बाद दोनों ने अग्नि के सात फेरे ले लिए। रॉबिन अब मिन्हुआ को प्यार से मानवी बुलाते हैं।

आसपास के गांवों में भी शादी की चर्चा
रॉबिन और मिन्हुआ की शादी भारतीय परंपरा के अनुसार हुई। शादी में शामिल होने के लिए दुल्हन पक्ष की ओर से मिन्हुआ के पिता जिंग जोंग, मां सिओयिंग किन, मौसी और उनका भाई जैन जोंग पहुंचे। वहीं, दूल्हे की तरफ से रॉबिन के पिता सोहनवीर पंवार, उनकी मां, दोनों भाई और कुछ यार-दोस्तों के अलावा नजदीकी रिश्तेदार शामिल हुए। शादी के बाद रॉबिन के परिजन अपने बेटे की पसंद की दुल्हन पाकर खुश हैं। आस-पास के गांवों में भी इस शादी को लेकर काफी चर्चाएं हैं और लोग आशीर्वाद देते हुए दोनों के खुशहाल जीवन की कामना कर रहे हैं।

खजुराहो का दूल्हा, रूस की दुल्हन
आपको बता दें कि ऐसी ही एक शादी पिछले दिनों मध्य प्रदेश के खजुराहो में भी हुई थी। सोशल नेटवर्किंग साइट के जरिए खजुराहो के रहने वाले अंजुलसिंह राजावत की मुलाकात रूस में रहने वाली सोआता से हुई। दोनों के बीच बातचीत आगे बढ़ी तो पहले दोस्ती और फिर इश्क परवान चढ़ने लगा। इसके बाद दोनों ने पहले रूस में शादी की और उसके बाद भारत आकर सात फेरे लिए। खजुराहो के प्रसिद्ध मां बघराजन देवी मंदिर में एक-दूसरे को जयमाला पहनाकर दोनों ने शादी की। भारतीय परंपरा के मुताबिक दोनों ने शादी से जुड़े सभी रस्मो-रिवाज निभाए।












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