Ritabrata Banerjee Net Worth: ममता के लिए चुनौती ऋतब्रत? कितनी है दौलत-कितने केस? पत्नी की आय में 220% उछाल!
Bengal Politics Ritabrata Banerjee Vs Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल की राजनीति में 28 साल बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदर पहली बड़ी दरार आ गई है। पूर्व राज्यसभा सांसद और अब विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने 58 विधायकों के समर्थन के साथ पार्टी के भीतर बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है। विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस ने उन्हें नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दे दी है और LoP का कक्ष भी आवंटित कर दिया गया है।
ममता बनर्जी के लिए यह झटका ऐतिहासिक है। एक तरफ पार्टी के संस्थापक के रूप में उनका कद, दूसरी तरफ उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल। ऋतब्रत बनर्जी अब खुद को 'असली TMC' का चेहरा बता रहे हैं। इस Explainer में उनकी राजनीतिक सफर, संपत्ति का पूरा ब्योरा, पत्नी दुर्बा सेन की आय में भारी उछाल, क्रिमिनल केस और ममता-अभिषेक के साथ टकराव की पूरी कहानी विस्तार से एक-एक पहलू पर बात करते हैं...

Who Is Ritabrata Banerjee: ऋतब्रत बनर्जी कौन हैं? राजनीतिक सफर
15 नवंबर 1979 को कोलकाता में जन्मे ऋतब्रत बनर्जी की उम्र फिलहाल 46 साल है। पिता प्रियभूषण बनर्जी। साउथ पॉइंट हाई स्कूल, अशुतोष कॉलेज से स्नातक और कलकत्ता विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में मास्टर्स (2003) किया।
उनकी राजनीतिक शुरुआत छात्र आंदोलन से हुई। वे CPI(M) की छात्र इकाई SFI (Students' Federation of India) के राष्ट्रीय महासचिव बने। 2014 में मात्र 35 साल की उम्र में CPI(M) ने उन्हें राज्यसभा भेजा। 2017 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में CPI(M) से निष्कासित कर दिए गए। 2020 में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए और INTTUC जैसी ट्रेड यूनियन विंग में सक्रिय रहे। 2026 के चुनाव में उलुबेड़िया पूर्व सीट से विधायक बने।
अब जून 2026 में वे TMC के सबसे बड़े बागी नेता के रूप में उभरे हैं। 58 विधायकों (TMC के कुल 80 में से) का समर्थन दावा करते हुए उन्होंने स्पीकर को पत्र सौंपा। स्पीकर ने उन्हें नेता प्रतिपक्ष मान्यता दी। बागी गुट ने ममता बनर्जी को 'मुख्य सलाहकार' बनाने का प्रस्ताव रखा है, लेकिन अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) के नेतृत्व को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
ममता बनर्जी से रिश्ता: राजनीतिक, पारिवारिक नहीं
ऋतब्रत और ममता बनर्जी के बीच कोई खून का रिश्ता नहीं है। पहले CPI(M) में रहते हुए वे ममता के कट्टर आलोचक थे। TMC में आने के बाद करीबी बने, लेकिन 2026 में संगठनात्मक लोकतंत्र, परिवारवाद और अभिषेक बनर्जी के बढ़ते दबदबे को लेकर असंतोष जाहिर किया। बागियों का कहना है कि हम ममता दीदी को सम्मान देते हैं, लेकिन पार्टी को निजी परिवार की संपत्ति नहीं बनने देंगे।
Who Is Ritabrata Banerjee Wife: पत्नी दुर्बा सेन की आय में 220% का उछाल - आंकड़े चौंकाते हैं
2024 के राज्यसभा चुनावी हलफनामे के अनुसार, पत्नी दुर्बा सेन (Durba Sen) का पेशा Mackintosh Burn Limited में Managing Director की Confidential Assistant है। आय का मुख्य स्रोत सैलरी और ब्याज।
Durba Sen Net Worth: पत्नी दुर्बा सेन की आय (पिछले 5 वर्ष):
- 2023-24: ₹12,41,340
- 2022-23: ₹11,85,180
- 2021-22: ₹1,97,310
- 2020-21: ₹3,55,250
- 2019-20: ₹3,87,570
वृद्धि का आंकलन: 2019-20 से 2023-24 के बीच आय में करीब 220% की भारी बढ़ोतरी हुई है। 2021-22 में आय अचानक बहुत कम थी, लेकिन उसके बाद लगातार उछाल आया। राजनीतिक विरोधी इसे 'सवालिया' बता रहे हैं, जबकि समर्थक कहते हैं कि प्रोफेशनल तरक्की और निवेश से हुआ है।
Ritabrata Banerjee Net Worth: ऋतब्रत बनर्जी की खुद की आय:
- 2023-24: ₹4,75,567
- 2022-23: ₹14,91,440 (सबसे अधिक)
- 2021-22: ₹9,66,940
- 2020-21: ₹5,78,610
- 2019-20: ₹11,21,080
कुल संपत्ति: लगभग ₹3.44 करोड़
2024 के हलफनामे के अनुसार:
- चल संपत्ति: ऋतब्रत के नाम करीब ₹99.20 लाख, पत्नी के नाम करीब ₹1.25 करोड़
- अचल संपत्ति: कोलकाता के Salbani Apartments में संयुक्त फ्लैट (Flat No. C-502)। ऋतब्रत की हिस्सेदारी की अनुमानित कीमत करीब ₹91.57 लाख
- कुल संपत्ति: लगभग ₹3.44 करोड़
- नकद: ऋतब्रत ₹20,233, पत्नी ₹75,600
- गाड़ी: पत्नी के नाम Innova Crysta (2021 मॉडल, ₹24.62 लाख कीमत की)
- जेवर: ऋतब्रत के पास 15 ग्राम (₹1.10 लाख), पत्नी के पास 350 ग्राम (₹25 लाख)
- निवेश: SBI म्यूचुअल फंड, LIC पॉलिसी, बैंक FD आदि।
देनदारियां: ऋतब्रत पर करीब ₹27.28 लाख (हाउसिंग लोन), पत्नी पर करीब ₹21.08 लाख (हाउसिंग + कार लोन)। सरकारी बकाया (IT, GST आदि) NIL। राज्यसभा सचिवालय से No Dues Certificate भी उपलब्ध।
Ritabrata Banerjee Criminal Cases: 3 क्रिमिनल केस
हलफनामे के अनुसार कुल 3 लंबित आपराधिक मामले, कोई सजा (Conviction) नहीं।
- केस 1 (2013): Parliament Street PS, दिल्ली। IPC 186, 353, 147, 149, 34। योजना भवन के बाहर प्रदर्शन से जुड़ा। चार्जशीट नहीं हुई।
- केस 2 (2017): Balurghat PS, दक्षिण दिनाजपुर। IPC 195A, 214, 506, 120B, 34। Anticipatory bail मिली।
- केस 3 (2017): Balurghat PS। IPC 417, 376(2)(n), 214, 354, 506, 509। एक महिला का शादी के झांसे में संबंध बनाने का आरोप। Anticipatory bail मिली। ऋतब्रत इन आरोपों को राजनीतिक साजिश और ब्लैकमेल बताते रहे हैं।
TMC Rebellion Reason: TMC में बगावत का कारण क्या?
बागी गुट का मुख्य आरोप:
- अभिषेक बनर्जी का एकाधिकार और परिवारवाद
- संगठन में लोकतंत्र की कमी
- टिकट वितरण और फैसलों में पारदर्शिता न होना
ऋतब्रत ने कहा कि संख्या बल राज करता है। 80 में से 58 हमारे साथ हैं, जो दो-तिहाई (54) से ज्यादा है। हम दल-बदल कानून से सुरक्षित हैं। उन्होंने ममता से 'मुख्य सलाहकार' बनने की अपील की है। TMC की तरफ से कुणाल घोष जैसे नेताओं ने इसे 'पीठ में छुरा' बताया और भाजपा से सांठगांठ का आरोप लगाया। ममता बनर्जी ने पार्टी की सभी मोर्चा इकाइयों को भंग कर पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
आइए अब समझते हैं कि क्यों TMC में कथित टूट की तुलना महाराष्ट्र की शिवसेना और NCP संकट से हो रही है?
पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर उभरे विवाद और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बागी खेमे के दावों की तुलना महाराष्ट्र में शिवसेना (2022) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-NCP (2023) में हुई ऐतिहासिक टूट से की जा रही है। इसकी वजह सिर्फ विधायकों की संख्या नहीं, बल्कि सत्ता, संगठन, नेतृत्व और कानूनी मान्यता की वही लड़ाई है जो महाराष्ट्र में देखने को मिली थी।
शिवसेना में कैसे हुई थी टूट?
जून 2022 में महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा भूचाल आया था। शिवसेना नेता Eknath Shinde अपने समर्थक विधायकों के साथ मुंबई छोड़कर पहले सूरत और फिर गुवाहाटी पहुंच गए। शिंदे गुट ने दावा किया कि उनके साथ शिवसेना के दो-तिहाई से अधिक विधायक हैं और पार्टी अपने मूल हिंदुत्व एजेंडे से भटक गई है।
उस समय मुख्यमंत्री Uddhav Thackeray थे। शिंदे की बगावत इतनी बड़ी थी कि महाविकास अघाड़ी सरकार अल्पमत में आ गई। आखिरकार उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और भाजपा के समर्थन से एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बन गए।
इसके बाद लड़ाई सिर्फ सरकार की नहीं रही, बल्कि सवाल उठने लगा कि 'असली शिवसेना कौन?'। मामला चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। चुनाव आयोग ने आखिरकार शिंंदे गुट को शिवसेना का नाम और चुनाव चिह्न 'धनुष-बाण' सौंप दिया। वहीं, उद्धव गुट की शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) मिला। यह भारतीय राजनीति में पार्टी पर नियंत्रण की सबसे चर्चित लड़ाइयों में से एक बन गई।
NCP में क्या हुआ था?
जुलाई 2023 में महाराष्ट्र में दूसरा बड़ा राजनीतिक विस्फोट हुआ। इस बार बगावत हुई शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में। पार्टी के वरिष्ठ नेता Ajit Pawar अपने समर्थक विधायकों के साथ अलग हो गए और भाजपा-शिंदे सरकार में शामिल हो गए।
अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके समर्थकों का दावा था कि पार्टी के अधिकांश विधायक उनके साथ हैं। इसके बाद फिर वही सवाल उठा कि 'असली NCP किसकी?'
कई महीनों तक चुनाव आयोग, अदालत और संगठनात्मक स्तर पर संघर्ष चला। आखिरकार, चुनाव आयोग ने अजित पवार गुट को NCP का आधिकारिक नाम और चुनाव चिह्न दे दिया। इससे शरद पवार की दशकों पुरानी राजनीतिक विरासत को बड़ा झटका लगा। वहीं, घड़ी सिंबल अजित गुट के पास गया।
TMC से तुलना क्यों?
बंगाल में भी बागी खेमा संख्या बल के आधार पर राजनीतिक वैधता का दावा कर रहा है। महाराष्ट्र की तरह यहां भी बहस इस बात पर केंद्रित है कि क्या बड़ी संख्या में विधायक किसी दल के मूल नेतृत्व को चुनौती दे सकते हैं? क्या विधानसभा में बहुमत वाला गुट 'असली प्रतिनिधि' कहलाएगा? और क्या संगठन तथा चुनाव चिह्न पर भी विवाद पैदा हो सकता है?
यही वजह है कि बंगाल के TMC संकट की तुलना शिवसेना और NCP के संकट से हो रही है। हालांकि, एक महत्वपूर्ण अंतर यह है कि महाराष्ट्र में बगावत के बाद कानूनी और चुनावी संस्थाओं ने अंतिम फैसले दे दिए थे, जबकि बंगाल में किसी भी दावे की अंतिम वैधानिक स्थिति संबंधित संवैधानिक संस्थाओं और कानूनी प्रक्रिया से ही तय होगी।
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो शिवसेना और NCP की टूट ने यह साबित किया कि भारतीय राजनीति में सिर्फ पार्टी का नाम नहीं, बल्कि विधायकों का संख्या बल, संगठन पर पकड़ और कानूनी मान्यता ही असली शक्ति तय करती है। यही कारण है कि TMC के मौजूदा संकट को महाराष्ट्र के उन दो बड़े राजनीतिक भूकंपों की याद दिलाने वाला माना जा रहा है।
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