पूर्व वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ बोले- राफेल के करीब भी नहीं आ सकता चीनी जेट J-20
नई दिल्ली। इंतजार खत्म हुआ है भारतीय वायुसेना (आईएएफ) को 29 जुलाई को पांच राफेल जेट मिल गए हैं। सोमवार को मेरीनेक से शुरू हुआ सफर बुधवार को राफेल की अंबाला में लैंडिंग के साथ अपने अंजाम पर पहुंच गया। राफेल का पहला बैच ऐसे समय में अंबाला लैंड कर रहा है जब लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर चीन के साथ टकराव जारी है। पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल (रिटायर्ड) बीएस धनोआ का कहना है कि अंबाला में उतरे पांच राफेल जेट के आगे चीन के खिलाफ जारी युद्ध एक कदम और आगे जाएगा। उन्होंने कहा राफेल के आने से वायुसेना काफी ताकतवर हो गई है और चीन इसके करीब भी नहीं पहुंच सकता है।

धनोआ ने बताया था राफेल को गेम चेंजर
पिछले वर्ष आईएएफ चीफ के पद से रिटायर हुए बीएस धनोआ ने ही पहली बार कहा था कि राफेल एक गेम चेंजर साबित होगा। इंग्लिश डेली हिन्दुस्तान टाइम्स से बात करते हुए उन्होंने बताया कि राफेल के पास टॉप लाइन के इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर हैं। इसके अलावा ये मीटिओर और स्कैल्प जैसी मिसाइलों से लैस है। इन हथियारों की वजह से चीन की वायुसेना अब आईएएफ के आगे कहीं नहीं टिकती है। धनोआ की देखरेख में ही 26 फरवरी 2019 को हुई बालाकोट एयर स्ट्राइक की रणनीति तैयार की गई थी। उन्होंने यह माना है कि चीनी जेट जे-20 पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट है। लेकिन उन्हें इस बात का पूरा भरोसा है कि राफेल और सुखोई के होने से आईएएफ अब चीन की किसी भी चुनौती का सामना आसानी से कर सकता है। उन्होंने कहा कि अगर चीनी फाइटर जेट इतने बेहतर हैं तो फिर पाकिस्तान ने बालाकोट एयर स्ट्राइक के अगले दिन यानी 27 फरवरी को अमेरिका के एफ-16 फाइटर जेट्स का प्रयोग क्यों किया था। चीनी जेट बस उनके फाइटर्स को कवर देने के लिए प्रयोग हुए थे।
पाकिस्तान को भी भरोसा नहीं!
बीएस धनोआ ने बताया कि पाकिस्तान एयरफोर्स के मिराज 3/5 ने सुरक्षित दूरी के साथ H 2/4 बम को गिरा दिया। लेकिन इस दौरान जेएफ-17 बस कवर दे रहा था। उन्होंने सवाल भी किया कि पाकिस्तान नॉर्थ ईस्ट में स्वीडन के बने अवॉक्स सिस्टम का प्रयोग क्यों करता है और दक्षिण में चीन का वॉर्निंग सिस्टम क्यों रखता है? वह यहीं नहीं रुके और बोले, चीनी जेएफ-17 पर पाकिस्तान यूरोप की राडार (सेलेक्स गैलीलियो) और टर्की को निशाना क्यों बना रहा है? जवाब काफी स्पष्ट है।' उन्होंने कहा कि भारतीय पायलट के पास उपलब्ध हथियारों और डिजिटल टेरेन एलिवेशन डेटा के स्तर-II के बाद राफेल अपने उन्नत इलाके के साथ हथियार की त्रुटि संभावना 10 मीटर तक कम हो जाती है। उन्होंने फिर इस बात को दोहराया कि राफेल एक गेम चेंजर है।












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