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Covid-19: इन दवाओं की हुई पहचान, कोरोना मरीजों के इलाज में आ सकती हैं काम

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नई दिल्ली- कोरोना वायरस के खात्मे के लिए दवाओं के अनुसंधान पर दुनिया भर की प्रयोगशालाओं में दिन-रात मेहनत की जा रही है। हजारों वैज्ञानिक मानवता की रक्षा के लिए तरह-तरह के रिसर्च कर रहे हैं। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया की कई प्रयोगशालाओं में वैज्ञानिकों ने अब तक 69 ऐसी दवाओं का पता लगाया है, जो उनके मुताबिक कोरोना वायरस को मारने में कारगर साबित हो सकते हैं। कई दवाएं तो ऐसी हैं, जो अभी भी दूसरी बीमारियों के इलाज के लिए प्रचलन में हैं। इनमें से अभी कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट भी होते हैं। लेकिन, अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक इनमें से कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट की क्षमता ही कोरोना से लड़ाई में हमारे काम आ सकती है। कम से कम 22 कंपाउंड ऐसे हैं, जिनका परीक्षण आखिरी दौर में है और किसी भी वक्त उनके नतीजे भी सामने आ सकते हैं।

69 दवाओं और कंपाउंड्स ने इलाज की उम्मीद बढ़ाई

69 दवाओं और कंपाउंड्स ने इलाज की उम्मीद बढ़ाई

वैज्ञानिकों ने 69 दवाओं और कंपाउंड्स की पहचान की है जो कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के इलाज में कारगर साबित हो सकती है। इस काम में जुटे अनुसंधानकर्ताओं की एक टीम ने रविवार रात को ये जानकारी दी है। न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक अनुसंधान में जुटे वैज्ञानिकों ने बताया है इनमें से कुछ दवा अभी भी कुछ दूसरी बीमारियों के उपचार में इस्तेमाल भी की जा रही है। लेकिन, अब अनुसंधानकर्ता इसे इस इरादे से नए सिरे से उपयोग करने की कोशिशों में लगे हैं, जिससे कि कोविड-19 के मरीजों का उपचार हो सके और शरीर में घुस चुके वायरस को मारा जा सके। क्योंकि, इस वक्त जल्द इलाज के लिए ये विकल्प ज्यादा उपयोगी साबित हो सकते हैं, बजाय कोई नई दवा के ईजाद करने में ज्यादा समय लगाने के।

अब तक की स्टडी के अच्छे रिजल्ट

अब तक की स्टडी के अच्छे रिजल्ट

नई स्टडी में वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के 29 जीनों में से 26 की जांच की है, जो कि वायरस में प्रोटीन्स के उत्पादन को निर्धारित करते हैं। अनुसंधानकर्ताओं ने पाया है कि कोरोना वायरस मानव के 332 प्रोटीन्स को निशाना बनाते हैं। वैज्ञानिकों को लगता है कि वायरस के कुछ प्रोटीन्स मानव के सिर्फ एक प्रोटीन को निशाना बनाते हैं, जबकि उसके दूसरे प्रोटीन इंसान के एक दर्जन सेल्युलर प्रोटीन्स पर हमला करने में सक्षम हैं। शोधकर्ताओं को ऐसी दवा की दरकार है जो उन इंसानी प्रोटीन्स पर को प्रभावित सके, जिसे मानव के सेल्स में घुसकर अपने विस्तार के लिए कोरोना वायरस को बहुत जरूरत है। शोधकर्ताओं का यही रिसर्च उनकी उम्मीदों को परवान चढ़ा रहा है।

कुछ प्रचलित दवाओं में भी दिखी उम्मीद

कुछ प्रचलित दवाओं में भी दिखी उम्मीद

आखिरकार शोधकर्ताओं ने ऐसी 24 दवाओं का पता लगाया है जो अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन से कैंसर, पार्किंसन्स और हाइपरटेंशन जैसी बीमारियों में इलाज के लिए मान्यताप्राप्त हैं। इसी तरह मानसिक रोग में इस्तेमाल होने वाली हैलोपेरिडॉल और टाइप 2 डायबिटीज में इस्तेमाल होने वाली मेटफॉर्मिन जैसी दवाएं भी हैं, जिसको लेकर अनुसंधानकर्ता काफी उत्साहित हैं। शोधकर्ताओं की ऐसी 69 दवाओं की लिस्ट में कुछ एंटीबायॉटिक्स भी शामिल हैं। माना जा रहा है कि इनमें से कुछ दवा मानव प्रोटीन्स से जुड़ जाती हैं। लेकिन, शोधकर्ताओं का मानना है कि इन दवाओं का यही साइड इफेक्ट इसके एंटी-वायरल उपचार की संभावनाएं पैदा करता है। इसी तरह मलेरिया में इस्तेमाल होने वाली एक दवा क्लोरोक्वीन भी है, जो कोरोना वायरस के असर को कम कर सकता है। हाल में इसको लेकर खूब चर्चा भी हो चुकी है। हालांकि, इसके साइड इफेक्ट की चिंताएं अभी तक वैज्ञानिक खारिज नहीं कर पाए हैं।

22 कंपाउंड के परीक्षण के नतीजों का इंतजार

22 कंपाउंड के परीक्षण के नतीजों का इंतजार

इसी तरह न्यूयॉर्क के माउंट सिनाय इचान स्कूल औफ मेडिसीन और पेरिस के पस्तेउर इंस्टीट्यूट ने भी जिंदा वायरस के खात्मे के लिए अपनी प्रयोगशालाओं में दूसरे 22 कंपाउंड पर भी परीक्षण शुरू कर दिया है। हालांकि, रविवार रात तक (न्यूयॉर्क के स्थानीय समय के मुताबिक ) इसके परीक्षण के पहले परिणाम का इंताजार किया जा रहा था।

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English summary
Researchers identify some medicines, may work in the treatment of coronavirus patients
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