हवा में भी घंटों जिंदा रह सकता है Coronavirus,नई स्टडी के बाद WHO ने दी ये सलाह

नई दिल्ली- कोरोना वायरस से निपटने के लिए न तो अभी तक कोई कारगर दवा हाथ आई है और नहीं निकट भविष्य में कोई वैक्सीन आने की ही उम्मीद है। लेकिन, इसका संकट घटने के बजाय रोजाना नए-नए रूप में बढ़ता ही जा रहा है। अब जानकारी मिली है कि इस वायरस से संक्रमित लोगों के इलाज में जुटे स्वास्थ्यकर्मियों को अपनी सावधानियां और बढ़ाने की जरूरत है, क्योंकि नई स्टडी में पता चला है कि इसका वायरस हवा में तीन घंटे तक जिंदा रह सकता है। दरअसल, इलाज के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों को कई तरह की मेडिकल प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं, इस दौरान संक्रमित व्यक्ति से निकला हुआ वायरस उनको सीधा चपेट में ले सकता है। इसीलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्वास्थ्यकर्मियों को अपनी सावधानियां और पुख्ता करने की सलाह दी है, ताकि किसी भी तरह का जोखिम न रह जाय।

हवा में 3 घंटे तक जिंदा रह सकता है कोविड-19

हवा में 3 घंटे तक जिंदा रह सकता है कोविड-19

कोरोना वायरस हवा में भी घंटों जिंदा रह सकता है, एक नई स्टडी में यह जानकारी सामने आने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन भी हरकत में आ गया है। अब यह वैश्विक संगठन मेडिकल प्रोफेशनल्स के लिए 'हवा से जुड़ी सावधानियों' पर विचार कर रहा है। न्यूयॉर्क पोस्ट में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक डब्ल्यूएचओ के इमर्जिंग डिजिजेज एंड जूनोसिस की हेड डॉक्टर मारिया वैन केरखोव ने सोमवार को इस बात की गंभीरता पर जोर दिया है कि नई स्टडी के सामने आने के बाद कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के इलाज से जुड़े हेल्थकेयर वर्कर्स को अपनी सुरक्षा के लिए अतिरिक्त कदम उठाने होंगे। बता दें कि ये वायरस आमतौर पर सांस की बूंदों जैसे कि कोई छींकता है या खांसता है तब यह एक से दूसरे में संक्रमित होता है। लेकिन, नई स्टडी से पता चला है कि यह हवा में तीन घंटे तक पड़ा रह सकता है।

स्वास्थ्यकर्मी बरतें अतिरिक्त सतर्कता- विश्व स्वास्थ्य संगठन

स्वास्थ्यकर्मी बरतें अतिरिक्त सतर्कता- विश्व स्वास्थ्य संगठन

हालांकि, डब्ल्यूएचओ की डॉक्टर ने कहा है कि नई स्टडी से हर आदमी को परेशान होने की जरूरत नहीं है। लेकिन, मेडिकल स्टाफ को इस खतरे को गंभीरता से लेना चाहिए। मसलन, स्वास्थ्यकर्मियों को कोविड-19 के मरीज की सांस लेने में सहायता करने के लिए उसके गले में ट्यूब डालनी पड़ती है और इसीलिए उन्हें अब बेहद सावधान रहना जरूरी है। डॉक्टर मारिया के मुताबिक, 'जब आप मेडिकल केयर के दौरान कोई एयरोसोल-जेनेरेटिंग प्रोसेड्योर जैसा कुछ करते हैं, तब यह संभव है कि आप इन कणों को जिसे हम एयरोसोलाइज कहते हैं, कर लें। इसका मतलब ये है कि ये हवा में कुछ ज्यादा देर तक जिंदा रह सकता है।' उन्होंने कहा है कि, 'यह बहुत ही महत्वपूर्ण है कि हेल्थकेयर वर्कर जब इन मरीजों का इलाज कर रहे होते हैं और इस तरह की प्रक्रिया निभा रहे होते हैं तो उन्हें अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए।'

स्वास्थ्यकर्मियों को सावधान रहना बेहद जरूरी

स्वास्थ्यकर्मियों को सावधान रहना बेहद जरूरी

बता दें कि अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजिज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन ने मौजूदा समय में हेल्थकेयर वर्क्स को ये सलाह दी हुई है कि वे एन95 मास्क पहनें, जो कि 95 फीसदी तक सभी तरह के तरल और हवा में मौजूद कणों को फिल्टर करने में सक्षम है। लेकिन, अब विश्व स्वास्थ्य संगठन की डॉक्टर की टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब दुनियाभर में हजारों डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी कोविड-19 के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं। क्योंकि, इससे संक्रमित मरीजों की संख्या करीब तीन लाख तक पहुंच चुकी है और रोजाना उसमें हजारों का इजाफा हो रहा है।

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