Republic Day 2026: किस धर्म को मानते हैं गणतंत्र दिवस के मेहमान कोस्टा-उर्सुला? आस्था पर क्यों छिड़ी चर्चा
Republic Day 2026 Chief Guest: भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर कर्तव्य पथ पर एक ऐतिहासिक कूटनीतिक दृश्य देखने को मिलेगा। इस वर्ष यूरोपीय संघ (EU) के दो सबसे शक्तिशाली नेता, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, मुख्य अतिथि के रूप में भारत की राजकीय यात्रा पर आ रहे हैं। 25 से 27 जनवरी 2026 तक चलने वाले इस दौरे का उद्देश्य भारत और यूरोपीय संघ के बीच रक्षा, व्यापार और नवाचार के क्षेत्रों में नए आयाम स्थापित करना है।
इन दिग्गज नेताओं की उपस्थिति ने जहां कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, वहीं आम जनता के बीच उनके व्यक्तिगत जीवन और विश्वासों को लेकर भी गहरी जिज्ञासा पैदा हो गई है। गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि बनने के बाद से ही उनके जीवन के अनछुए पहलुओं पर चर्चा जोर-शोर से चल रही है। इसी कड़ी में, इस विस्तृत रिपोर्ट में हम यह जानने की कोशिश करेंगे कि ये दोनों अंतरराष्ट्रीय नेता किस धर्म और विचारधारा को मानते हैं और उनकी धार्मिक पृष्ठभूमि उनके राजनीतिक निर्णयों को किस तरह प्रभावित करती है।

Ursula von der Leyen religion: ईसाई धर्म और पारिवारिक संस्कारों का असर
यूरोपीय आयोग की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ईसाई धर्म को मानती हैं और उनकी राजनीति में भी इसकी झलक साफ दिखती है। वे जर्मनी की उस पार्टी (CDU) से आती हैं, जो पारंपरिक ईसाई मूल्यों और लोकतंत्र को साथ लेकर चलती है। उर्सुला के लिए उनके संस्कार और परिवार बहुत मायने रखते हैं। उनके पति हेइको वॉन डेर लेयेन भी एक पुराने प्रोटेस्टेंट परिवार से ताल्लुक रखते हैं। यही वजह है कि उर्सुला के काम करने के तरीके में नैतिकता और पुराने मूल्यों का काफी प्रभाव नजर आता है।
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Antonio Costa Religion: सेकुलर राजनीति और कैथोलिक बैकग्राउंड
एंटोनियो कोस्टा पुर्तगाल की सोशलिस्ट पार्टी के बड़े नेता हैं, जो धर्म को राजनीति से अलग रखने यानी सेकुलर शासन में भरोसा रखते हैं। हालांकि, उनकी पढ़ाई लिस्बन की कैथोलिक यूनिवर्सिटी से हुई है, जिससे पता चलता है कि वे कैथोलिक माहौल में पले-बढ़े हैं। कोस्टा भले ही अपनी पर्सनल आस्था को लेकर बहुत ज्यादा चर्चा नहीं करते और कानून-संविधान को ऊपर रखते हैं, लेकिन उनकी पुर्तगाली और भारतीय (गोवा) विरासत ने उन्हें हर धर्म और संस्कृति का सम्मान करना सिखाया है।
Antonio Costa Goa roots: गोवा की विरासत और भारत से गहरा नाता
एंटोनियो कोस्टा का भारत से सिर्फ डिप्लोमैटिक रिश्ता नहीं है, बल्कि उनका खून का रिश्ता है। उनके पिता गोवा के रहने वाले थे, इसलिए गोवा के लोग उन्हें आज भी प्यार से 'बाबुश' कहते हैं। उनकी राजनीतिक पहचान भले ही यूरोप की हो, लेकिन उनका कल्चर उन गोवावासियों जैसा है जिनमें कैथोलिक और भारतीय परंपराएं घुली-मिली होती हैं। गणतंत्र दिवस पर उनका आना भारत के लिए भी गर्व की बात है, क्योंकि यह हमारी विरासत के वैश्विक प्रभाव को दिखाता है।
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फैसलों पर धर्म और संस्कृति का प्रभाव
इन दोनों बड़े नेताओं के लिए धर्म सिर्फ एक व्यक्तिगत मामला नहीं है, बल्कि यह उनके लीडरशिप स्टाइल को भी प्रभावित करता है। उर्सुला जहां ईसाई-लोकतांत्रिक सिद्धांतों के जरिए यूरोप को एकजुट रखने की बात करती हैं, वहीं कोस्टा अपनी मिली-जुली संस्कृति की वजह से अलग-अलग विचारों को साथ लेकर चलने में माहिर हैं। भारत दौरे के दौरान, इन दोनों की यह धार्मिक और सांस्कृतिक समझ भारत-EU के रिश्तों को सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि भावनात्मक तौर पर भी मजबूत करेगी।












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