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Republic Day: क्या है ध्वजारोहण और झंडोत्तोलन में बड़ा फर्क? 90 फीसदी लोगों को नहीं होगा पता

Republic Day Falg Hoisting and Flag Unfurling Difference: भारत में हर साल 15 अगस्त और 26 जनवरी को राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा पूरे आन-बान और शान के साथ लहराया जाता है। अक्सर आम बोलचाल में हम दोनों मौकों के लिए एक ही शब्द का उपयोग करते हैं, लेकिन कूटनीतिक और संवैधानिक दृष्टि से इन दोनों दिनों की प्रक्रिया, स्थान और ध्वज फहराने वाले व्यक्ति में मौलिक अंतर होता है।

स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) पर जहां 'ध्वजारोहण' (Flag Hoisting) किया जाता है, वहीं गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) पर झंडा 'फहराया' (Flag Unfurling) जाता है। यह सूक्ष्म अंतर न केवल हमारे इतिहास के संघर्ष को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि एक देश के रूप में भारत ने किस प्रकार अपनी संप्रभुता और संविधान को स्थापित किया। आइए समझते हैं तिरंगे से जुड़ी इन दो अलग-अलग परंपराओं के पीछे का दिलचस्प तथ्य...

Republic Day

ध्वजारोहण बनाम झंडा फहराना (Flag Hoisting vs Flag Unfurling)

तिरंगा लहराने की प्रक्रिया इन दोनों दिनों में तकनीकी रूप से भिन्न होती है:

स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त): इस दिन तिरंगा खंभे के नीचे बंधा होता है। इसे रस्सी के सहारे नीचे से खींचकर ऊपर ले जाया जाता है और फिर खोलकर फहराया जाता है। इसे 'ध्वजारोहण' या 'Flag Hoisting' कहते हैं। यह प्रक्रिया उस ऐतिहासिक संघर्ष का प्रतीक है, जिसके बाद भारत ने लंबी गुलामी के बाद अपनी आज़ादी का ध्वज ऊपर उठाया था।

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गणतंत्र दिवस (26 जनवरी): इस दिन तिरंगा पहले से ही खंभे के शीर्ष पर बंधा रहता है। रस्सी खींचते ही झंडा खुलता है और हवा में लहराने लगता है। इसे 'Flag Unfurling' कहा जाता है। इसका अर्थ है कि भारत पहले से ही एक स्वतंत्र राष्ट्र था और इस दिन उसने केवल अपना संविधान लागू कर एक गणराज्य का स्वरूप लिया।

कौन फहराता है तिरंगा?

संवैधानिक मर्यादा के अनुसार, दोनों दिनों के लिए मुख्य व्यक्ति अलग-अलग होते हैं:

26 जनवरी: इस दिन देश के राष्ट्रपति झंडा फहराते हैं। राष्ट्रपति देश के संवैधानिक प्रमुख होते हैं, इसलिए संविधान लागू होने के उपलक्ष्य में वही यह सम्मान प्राप्त करते हैं।

15 अगस्त: इस दिन देश के प्रधानमंत्री ध्वजारोहण करते हैं। स्वाधीनता के समय देश का राजनीतिक नेतृत्व प्रधानमंत्री के हाथों में था, और तब तक भारत का संविधान पूरी तरह अस्तित्व में नहीं आया था, इसलिए यह परंपरा आज भी कायम है।

आयोजन स्थल का महत्व

राष्ट्रीय समारोहों के लिए स्थान का चयन भी उनके महत्व के बारे में बताता है:

लाल किला (15 अगस्त): स्वतंत्रता दिवस का मुख्य कार्यक्रम दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर होता है, जहाँ से प्रधानमंत्री देश को संबोधित करते हैं।

कर्तव्य पथ (26 जनवरी): गणतंत्र दिवस समारोह दिल्ली के कर्तव्य पथ (पूर्व में राजपथ) पर आयोजित होता है। यहाँ सैन्य परेड और विभिन्न राज्यों की झांकियों के जरिए देश की ताकत और सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन किया जाता है।

विशेषता 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस)
1
प्रक्रिया नीचे से ऊपर ले जाना (Hoisting) ऊपर ही खोलना (Unfurling)
2
प्रमुख व्यक्ति प्रधानमंत्री राष्ट्रपति
3
स्थान लाल किला कर्तव्य पथ
4
प्रतीक आज़ादी और संघर्ष का प्रतीक संविधान और लोकतंत्र का सम्मान

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