दो वर्षों में बिगड़ गए हैं भारत के नेपाल के साथ संबंध, पाक भी जस का तस
नई दिल्ली। वर्ष् 2014 में जब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तो उनसे विदेशों के साथ संबंध सुधारने और इंटरनेशनल लेवल पर भारत की एक मजबूत छवि बनाने की उम्मीद थी। कुछ हद तक पीएम मोदी ने इस उम्मीद को पूरा भी किया लेकिन कहीं-कहीं विदेश नीति में वह असफल साबित हुए हैं।
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पाकिस्तान है कि मानता नहीं
पीएम मोदी की दो वर्षों में असफल विदेश नीति का सबसे बड़ा उदाहरण है पाकिस्तान और नेपाल। एक देश जो अपनी हरकतों से बाज नहीं आता और दूसरा जो भारत को सबसे करीबी दोस्त हुआ करता था, अब रूठा हुआ है।
दिसंबर में मोदी का दौरा और जनवरी में पठानकोट
पीएम मोदी दिसंबर में अचानक ही जब लाहौर पहुंचे तो कई लोगों को लगा कि अब शायद पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज आ जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जनवरी में पठानकोट आतंक हमला हुआ और पीएम की सारी कोशिशों पर पानी फिर गया।
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पाक के प्रति नरम भारत का रवैया
पाक से जांच दल भारत तो आया लेकिन उसने भारत के सुबूतों को मानने से ही इंकार कर दिया। इसके अलावा और अब तक इस हमले के गुनाहगार पाक में आजाद है।
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पाक की ओर से कोई एक्शन लाया ही नहीं गया और भारत की ओर से बनाया गया सारा दबाव बस कोरा ही साबित हुआ। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान के लिए पीएम का रवैया काफी नरम है और पाक कहीं न कहीं इसका फायदा उठा रहा है।
नए संविधान से रिश्तों में नया मोड़
वर्ष 2015 में नेपाल में भूकंप आया और भारत ने एक अच्छे पड़ोसी का कर्तव्य निभाते हुए मदद भी की। इसके बाद नेपाल का नया संविधान बना और यहीं से दोनों देशों के रिश्तों में एक अजीब सा मोड़ आ गया।
चीन के करीब होता नेपाल
मधेशियों के विरोध प्रदर्शन के बाद भारत ने नेपाल से लगी सीमा को सील कर दिया।बॉर्डर सील का मुद्दा इतना बढ़ गया कि नेपाल को चीन का रुख करना पड़ गया। आज नेपाल, भारत से ज्यादा चीन के करीब हो गया है।
नेपाल के साथ बिगड़ते रिश्ते
पीएम मोदी के आने के बाद नेपाल के साथ भारत के साथ और अच्छे हुए लेकिन देखते ही देखते संबंधों में दरार आने लगी। किसी को समझ नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है। पीएम बनने के बाद मोदी 2014 में दो बार नेपाल गए।













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