Exclusive: जानिए बाबा ने क्यों ठुकरा दिया कैबिनेट मंत्री का पद
गुड़गांव। हरियाणा सरकार ने योग गुरु बाबा रामदेव को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देने का प्रस्ताव रखा तो बाबा ने ठुकरा दिया। और कहा, "मैं संन्यासी हूं और मुझे संन्यासी ही बने रहने दो।" जरा सोचिये भारत स्वाभिमान के रूप में बड़ा आंदोलन शुरू करने वाले बाबा रामदेव, जिन्होंने कभी खुद की पार्टी के गठन की बात कही थी, ने मंत्री के दर्जे को क्यों ठुकरा दिया? इसका जवाब हम आपको दे रहे हैं।
2009 में बाबा ने हरियाणा के एक अखबार को दिये गये साक्षात्कार में कहा था, "मैं अपने गुरु बाबा शंकर देवा का शिष्य हूं और हमेशा प्रयास करता हूं कि उनके बताये हुए रास्ते से न भटकूं। मैं राजनेताओं से प्रेम करता हूं, लेकिन कभी सक्रिय राजनीति में नहीं आउंगा।" जी हां बाबा के गुरु स्वामी शंकर देव ने ही बाबा रामदेव को 1995 में संन्यास दीक्षा दी थी।
कौन हैं बाबा शंकर देव
वैसे तो शंकर देव दिव्य योग मंदिर (ट्रस्ट) एवं पतंजलि योगपीठ (ट्रस्ट) के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं, लेकिन उनका दर्जा बाबा रामदेव के जीवन में बहुत ऊंचा है। बाबा रामदेव ने अपनी शिक्षा-दीक्षा इन्हीं के सानिध्य में प्राप्त की।
शंकर देव का जन्म 1930 में अलमोड़ा में हुआ था और बचपन से ही वे संन्यासी बनने की इच्छा रखते थे। बचपन से ही साधु-संतों के साथ सत्संग करने बैठ जाते थे। 1945 में 15 साल की उम्र में उन्होंने अपना घर छोड़ दिया और संन्यासियों के साथ तीर्थ पर निकल पड़े। कई धार्मिक स्थलों के चक्कर काटने के बाद वे हरिद्वार पहुंचे। और यहां वे संत स्वामी कृपालु देव जी महाराज के संपर्क में आये।
शंकर देव ने स्वामी कृपालु देव जी महाराज से दीक्षा ली। और फिर 1958 में स्वामी इंदर देव से गंगा दशहरा के दिर संन्यास दीक्षा। 1968 से शंकर देव दिव्य योग मंदिर के आश्रम विश्व ज्ञान मंदिर में ही रह रहे हैं।
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