मालवा और निमार इलाके में जीत से तय होगा, मध्य प्रदेश में किसकी बनेगी सरकार
भोपाल। मध्य प्रदेश में हो रहे विधासभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच इस बार काफी कड़ा मुकाबला हो रहा है। पूरे प्रदेश में ही दोनों पार्टियां मेहनत कर रही हैं लेकिन मालवा और निमार क्षेत्र में मुकाबला बेहद दिलचस्प है। माना जा रहा है कि जो इस इलाके में बढ़त बनाएगा, वो ही प्रदेश में भी सरकार बनाएगा। बीते चुनाव में इस इलाके की 66 सीटों में से 56 भाजपा के खाते में आई थीं और भाजपा की सरकार सूबे में बनी थी। इस क्षेत्र का महत्व ही है कि शिवराज सिंह चौहान, अमित शाह और राहुल गांधी ने यहीं से चुनाव प्रचार की शुरुआत की।

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का मालवा इलाके में काफी प्रभाव माना जाता है, इस इलाके से कई बड़े नेता प्रदेश को मिले हैं। पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई ठाकरे, सुंदरलाल पटवा, कैलाश जोशी और वीरेंद्र सकलेचा यहीं से आते हैं। वही धार, झाबुआ, अलीराजपुर, रतलाम जैसे एरिया में कांग्रेस का प्रभाव है।
ये वही इलाका है, जहां किसान आंदोलन शुरू हुआ और पुलिस की गोली से पांच किसानों की मौत हुई। यहां करीब 50 पाटादीर रहते हैं और गुजरात के पाटीदार लीडर हार्दिक पटेल भी इस क्षेत्र के लोगों के लगातार टच में हैं। यहां हार्दिक ने कई पाटीदारों को कांग्रेस से टिकट दिलाया है।
2003 में भाजपा ने 230 में से 173 सीट जीतकर यहां सरकार बनाई थी। तब भाजपा का वोट प्रतिशत 42.5 था। 2008 में भाजपा को 37.6 फीसदी वोट मिले तो वहीं 2013 में भाजपा को एक बार फिर 44.9 फीसदी वोट के साथ 165 सीटें मिली। वहीं कांग्रेस को 2003 में 31.6 तो 2013 में 36.4 फीसदी वोट मिले।
भाजपा को चंबल, विन्ध्यप्रदेश, महाकौशल, मालवा में जीतती रही है। मालवा ट्राइबल की 28 और मालवा नॉर्थ की 68 सीटों पर लगातार भाजपा को कांग्रेस पर बढ़त मिलती रही है। महाकौशल में भी भाजपा की पकड़ है। चंबल और विन्ध्यप्रदेश में कांग्रेस की अच्छी पकड़ है।
भाजपा इस रीजन की 50 सीटों में से 2008 में 27 तो 2013 में 45 सीटों पर जीत हासिल कर चुकी है। इसी का असर था कि पूरे प्रदेश में भाजपा को 208 के मुकाबले 22 सीटें ज्यादा मिलीं। 45 सीटों को बचाना इस बार भाजपा के लिए बड़ी चुनौती होगा। बेरोजगारी, पेट्रोल डीजल की कीमतें, किसानों का गुस्सा और एससी/एसटी एक्ट जैसे मुद्दे इस बार भाजपा के सामने हैं।












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